हिसार का 9 साल पुराना केस: पूर्व CIA इंस्पेक्टर कप्तान सिंह समेत अन्य आरोपियों ने किया सरेंडर
हिसार के 2017 के मामले में बैंक मैनेजर रमनजीत सिंह ने अपहरण, मारपीट और कथित झूठे NDPS केस में फंसाने के आरोप लगाए। पूर्व CIA इंस्पेक्टर समेत आरोपियों ने सरेंडर किया।

हिसार में 9 साल पुराने मामले में बड़ा मोड़: बैंक मैनेजर को कथित तौर पर अफीम केस में फंसाने के आरोप, पूर्व CIA इंस्पेक्टर समेत आरोपियों ने किया सरेंडर
दिसंबर 2017 में कार की टक्कर से शुरू हुआ था विवाद; रमनजीत सिंह ने अपहरण, मारपीट और नकदी छीनने के आरोप लगाए, 2022 में NDPS केस से हो चुके हैं बरी
हिसार ब्यूरो, हरियाणा।THE ASIA PRIME | TAP NEWS । हिसार में करीब नौ साल पुराने एक मामले ने नया मोड़ ले लिया है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक रमनजीत सिंह को कथित तौर पर अगवा करने, उनके साथ मारपीट करने और अफीम बरामदगी के मामले में फंसाने के आरोपों से जुड़े प्रकरण में तत्कालीन CIA पुलिसकर्मियों सहित कई आरोपियों ने अदालत में आत्मसमर्पण किया है। मामला वर्ष 2017 की एक सड़क दुर्घटना के बाद शुरू हुए विवाद से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें झूठे मादक पदार्थ मामले में फंसाया गया था। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।
रेड स्क्वेयर मार्केट में कार की टक्कर के बाद शुरू हुआ विवाद
समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, 16 दिसंबर 2017 को हिसार के रेड स्क्वेयर मार्केट में रमनजीत सिंह की कार की टक्कर तत्कालीन CIA सहायक उपनिरीक्षक (ASI) वीरेंद्र सिंह के बेटे आशीष की कार से हो गई थी। रमनजीत सिंह ने कथित तौर पर माफी मांगने और वाहन की मरम्मत का खर्च देने की पेशकश की थी। शिकायत के अनुसार, इसके बावजूद बाद में फोन पर धमकियां मिलने लगीं और दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया।
18 दिसंबर को अगवा करने और मारपीट का आरोप
रमनजीत सिंह की शिकायत के अनुसार, 18 दिसंबर 2017 को वह नई कार खरीदने के लिए हिसार आए थे और उनके पास लगभग 3.35 लाख रुपये नकद थे। आरोप है कि जीत धर्मकांटा के पास आशीष, उसके पिता और कुछ अन्य लोगों ने उनकी गाड़ी को रोका, ईंटों से नुकसान पहुंचाया और उनके साथ मारपीट की। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उन्हें जबरन दूसरे वाहन में बैठाकर CIA थाने ले जाया गया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि थाने में उनके कपड़े उतरवाकर मारपीट की गई और उनसे 90 हजार रुपये ले लिए गए। रमनजीत सिंह के अनुसार, उन्होंने घटना के दौरान एक वकील को फोन पर जानकारी दी और पुलिस कंट्रोल रूम तक संदेश भी भिजवाया। इन आरोपों की पुष्टि और जिम्मेदारी तय करना अदालत की प्रक्रिया का विषय है।
अफीम बरामदगी का मामला दर्ज, 2022 में हुए बरी
इस विवाद के बाद रमनजीत सिंह के खिलाफ उनकी कार से अफीम बरामद होने के आरोप में NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्हें 8 जनवरी 2018 को इस मामले में जमानत मिली और 15 दिसंबर 2022 को अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। इसके बाद उन्होंने संबंधित CIA पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों के खिलाफ अदालत में शिकायत दायर की।
जून 2026 में हिसार की अदालत ने तत्कालीन CIA इंचार्ज इंस्पेक्टर कप्तान सिंह सहित 11 आरोपियों को शिकायत के सिलसिले में समन जारी किए थे। यह कार्रवाई शिकायत पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने का हिस्सा थी; इसे सभी आरोपियों के दोषी ठहराए जाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
सितंबर और अक्टूबर में आरोपियों ने किया आत्मसमर्पण
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 25 सितंबर 2026 को तत्कालीन CIA में तैनात रहे कुछ पुलिसकर्मियों सहित आरोपियों ने हिसार की अदालत में आत्मसमर्पण किया। अदालत ने संबंधित आरोपियों को 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दी।
इसके बाद 3 अक्टूबर को तत्कालीन CIA इंस्पेक्टर कप्तान सिंह, ASI भूप सिंह, आशीष और वीरसैन ने भी अदालत में आत्मसमर्पण किया। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने इन आरोपियों को भी 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दी और अगली सुनवाई 16 अक्टूबर के लिए निर्धारित की गई थी।
अब अदालत की कार्यवाही पर नजर
यह मामला पुलिस की जवाबदेही, हिरासत में नागरिकों के अधिकार और आपराधिक मामलों में निष्पक्ष जांच जैसे गंभीर सवाल उठाता है। हालांकि, किसी भी आरोपी की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण साक्ष्यों और अदालत के आदेशों के आधार पर ही होगा। आत्मसमर्पण या जमानत मिलना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है।
THE ASIA PRIME | TAP NEWS इस मामले में अदालत की अगली कार्यवाही, गवाहों के बयान और उपलब्ध आधिकारिक आदेशों के आधार पर आगे की जानकारी पाठकों तक पहुंचाएगा।