
हरियाणा में इलेवन पावर को गुरुग्राम और नूंह में 25 साल का बिजली वितरण लाइसेंस मिला। बिजली कर्मचारी संगठनों ने फैसले का विरोध किया, जानिए पूरा मामला।
चंडीगढ़ | 19 अक्टूबर 2026 | THE ASIA PRIME – TAP NEWS
हरियाणा के बिजली क्षेत्र में 19 अक्टूबर को बड़ा बदलाव हुआ है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड (Eleven Power Private Limited) को गुरुग्राम और नूंह राजस्व जिलों में 25 वर्षों के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने का आदेश जारी किया है। इससे इन क्षेत्रों में मौजूदा दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के साथ दूसरी वितरण कंपनी को भी चरणबद्ध तरीके से बिजली आपूर्ति करने का रास्ता खुल गया है। आयोग के इस फैसले का बिजली कर्मचारी संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे सार्वजनिक बिजली व्यवस्था और कर्मचारियों के हितों के लिए गंभीर खतरा बताया है।
8.3 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को मिल सकता है विकल्प
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित लाइसेंस क्षेत्र में 8.3 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें घरेलू उपभोक्ताओं के साथ किसान, दुकानदार, औद्योगिक इकाइयां और कार्यालय भी शामिल हैं। नई कंपनी का नेटवर्क संबंधित क्षेत्रों तक पहुंचने पर उपभोक्ताओं को बिजली वितरण कंपनी चुनने का विकल्प मिल सकता है।
यह हरियाणा में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस का पहला मामला बताया जा रहा है। बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 14 के तहत एक ही क्षेत्र में एक से अधिक वितरण लाइसेंसधारियों को काम करने की अनुमति दी जा सकती है।
₹4,717 करोड़ के निवेश की योजना
रिपोर्टों के मुताबिक, इलेवन पावर ने वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच लगभग ₹4,717 करोड़ निवेश करके बिजली वितरण नेटवर्क विकसित करने की योजना प्रस्तुत की है। कंपनी की ओर से उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति वित्त वर्ष 2027-28 से शुरू करने की योजना बताई गई है।
नेटवर्क को पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाना है। इसमें गुरुग्राम सिटी, गुरुग्राम सब-अर्बन, मानेसर, सोहना और नूंह क्षेत्र शामिल हैं। कंपनी ने अपनी योजना में नवीकरणीय ऊर्जा से बड़ी मात्रा में बिजली खरीदने की बात भी कही है। हालांकि, वास्तविक आपूर्ति शुरू होने का समय नेटवर्क निर्माण, नियामकीय शर्तों और कार्यान्वयन पर निर्भर करेगा।
बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों में नाराजगी
कर्मचारी संगठनों की आशंका है कि निजी कंपनी अधिक राजस्व देने वाले शहरी, औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को आकर्षित कर सकती है, जबकि ग्रामीण इलाकों, कृषि उपभोक्ताओं और कम आय वाले परिवारों को बिजली उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सरकारी निगम पर बनी रहेगी। संगठन का तर्क है कि इससे क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था और सरकारी निगमों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है।
मोर्चे ने यह भी चिंता जताई है कि इस फैसले से स्थायी, अस्थायी और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों सहित बिजली क्षेत्र में काम कर रहे कर्मियों के रोजगार और भविष्य पर असर पड़ सकता है। ये कर्मचारी संगठन की आशंकाएं हैं; लाइसेंस दिए जाने मात्र से बिजली दरों में बढ़ोतरी या कर्मचारियों की छंटनी होना तय नहीं हो जाता।
प्रो. संपत सिंह ने भी फैसले पर उठाए सवाल
पूर्व हरियाणा वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने भी गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के निर्णय की आलोचना की है। उन्होंने इसे सार्वजनिक बिजली क्षेत्र, किसानों, ग्रामीण उपभोक्ताओं और कमजोर वर्गों के हितों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।
उनका तर्क है कि बिजली जैसी बुनियादी सेवा में केवल प्रतिस्पर्धा और मुनाफे के आधार पर फैसले नहीं होने चाहिए। उनके अनुसार, यदि निजी कंपनी लाभदायक उपभोक्ताओं पर अधिक ध्यान देती है, तो सरकारी निगम पर कम लाभ वाले क्षेत्रों और उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराने का वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। इस मुद्दे पर पहले भी बिजली कर्मचारी संगठनों और राज्य के बिजली निगमों की ओर से आपत्तियां उठाई गई थीं।
सरकार और आयोग के सामने क्या हैं अहम सवाल?
इस फैसले के बाद बिजली क्षेत्र से जुड़े कई सवाल चर्चा में हैं। क्या नई कंपनी सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को समान रूप से बिजली उपलब्ध करा पाएगी? मौजूदा सरकारी नेटवर्क और नई कंपनी के नेटवर्क के बीच समन्वय कैसे होगा? सरकारी निगम के राजस्व और ग्रामीण बिजली आपूर्ति पर इसका क्या असर पड़ेगा? और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा का लाभ किस समय से मिलना शुरू होगा?
दूसरी ओर, समानांतर वितरण व्यवस्था के समर्थकों का तर्क है कि प्रतिस्पर्धा से उपभोक्ताओं को विकल्प मिल सकता है और बिजली आपूर्ति, नए कनेक्शन तथा शिकायत निवारण जैसी सेवाओं में सुधार की संभावना बन सकती है। अंतिम परिणाम नेटवर्क के विकास, कंपनी के प्रदर्शन और नियामकीय निगरानी पर निर्भर करेगा
फिलहाल मौजूदा बिजली उपभोक्ताओं को तत्काल किसी बदलाव की आवश्यकता नहीं बताई गई है। DHBVN अपनी मौजूदा व्यवस्था के तहत बिजली आपूर्ति जारी रखेगा। नई कंपनी का नेटवर्क संबंधित क्षेत्रों तक पहुंचने और उपभोक्ता के विकल्प उपलब्ध होने के बाद ही वितरण कंपनी बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
रिपोर्टों के अनुसार, इलेवन पावर को पहले चरण की विस्तृत कार्ययोजना और कंपनी बदलने के इच्छुक उपभोक्ताओं के लिए प्रक्रिया संबंधी विवरण 60 दिनों के भीतर आयोग को प्रस्तुत करना है। बिजली दरें भी नियामकीय निगरानी के अधीन रहेंगी। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि इस फैसले के कारण बिजली बिल तुरंत बढ़ जाएंगे।
बैठक में क्या निर्णय लिया गया, आंदोलन का अगला कार्यक्रम क्या होगा और कर्मचारी संगठन सरकार या आयोग के सामने कौन-सी मांगें रखेंगे—इसकी अलग से पुष्टि आवश्यक है।
हरियाणा में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस का यह फैसला उपभोक्ताओं को विकल्प देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके साथ सरकारी बिजली निगमों की वित्तीय स्थिति, ग्रामीण और कृषि उपभोक्ताओं की सेवा, कर्मचारियों के रोजगार तथा बिजली दरों से जुड़े सवाल भी उठे हैं। आने वाले समय में इस व्यवस्था की सफलता इस बात से तय होगी कि प्रतिस्पर्धा के साथ सार्वजनिक सेवा और सभी वर्गों के उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा किस तरह होती है।
