हिसार: उकलाना के विधाता नर्सिंग होम केस: डॉ. बिजेंदर टाक ने सुप्रीम कोर्ट से वापस ली जमानत याचिका
विधाता नर्सिंग होम आयुष्मान फर्जी क्लेम मामले में डॉ. बिजेंदर टाक ने सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका वापस ली। हाईकोर्ट पहले याचिका खारिज कर चुका है।

विधाता नर्सिंग होम आयुष्मान फर्जी क्लेम मामले में डॉ. बिजेंदर टाक ने सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका वापस ली। हाईकोर्ट पहले याचिका खारिज कर चुका है।
HISAR : उकलाना ब्यूरो THE ASIA PRIME /TAP NEWS
हिसार, 23 अगस्त। उकलाना स्थित विधाता नर्सिंग होम से जुड़े आयुष्मान भारत योजना के कथित फर्जी क्लेम और दस्तावेजों के मामले में आरोपी नर्सिंग होम संचालक डॉ. बिजेंदर टाक की अग्रिम जमानत की कानूनी लड़ाई फिलहाल रुक गई है। डॉ. टाक ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली है। इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुका था।
मामला आयुष्मान भारत योजना में कथित फर्जी क्लेम से जुड़ा है। मार्च 2026 में मुख्यमंत्री उड़नदस्ता (CM Flying) और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने उकलाना मंडी स्थित विधाता नर्सिंग होम की जांच की थी। इस कार्रवाई का नेतृत्व सीएम फ्लाइंग हिसार रेंज की इंचार्ज सुनैना ने किया था। उपलब्ध रिपोर्टों में भी इस छापेमारी और नवजात को कथित तौर पर रिकॉर्ड में भर्ती दिखाकर क्लेम किए जाने के आरोपों का उल्लेख मिलता है।
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सुप्रीम कोर्ट में याचिका वापस
जानकारी के अनुसार डॉ. बिजेंदर टाक ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 28 जुलाई 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस मामले की पहचान बिजेंदर टाक बनाम हरियाणा राज्य के रूप में सामने आती है। हाईकोर्ट के 28 जुलाई के मामले की ऑनलाइन न्यायिक जानकारी भी उपलब्ध है।

आपके उपलब्ध विवरण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में 22 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। अदालत ने अनुमति दे दी और याचिका को वापस लिए जाने के आधार पर निस्तारित कर दिया।
इसका अर्थ यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस चरण पर अग्रिम जमानत देने के सवाल पर कोई राहत प्रदान नहीं की, बल्कि याचिका वापस लिए जाने के कारण मामला समाप्त हुआ। आगे आरोपी की ओर से क्या कानूनी कदम उठाया जाता है, यह अलग विषय है।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की थी अग्रिम जमानत?
इस मामले में इससे पहले डॉ. बिजेंदर टाक ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की मांग की थी। हाईकोर्ट ने उपलब्ध प्रथम दृष्टया सामग्री पर विचार करते हुए राहत देने से इनकार किया था।
अदालत के आदेश से संबंधित ऑनलाइन रिकॉर्ड में मरीज सोनिया पत्नी संदीप और उनके नवजात बच्चे के रिकॉर्ड से जुड़े तथ्यों का उल्लेख मिलता है।
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आरोप यह है कि ऐसे मरीजों को अस्पताल में भर्ती दिखाया गया, जो संबंधित अवधि में अस्पताल में मौजूद नहीं थे। पुलिस जांच में यह पता लगाने की जरूरत बताई गई कि कथित रूप से ऐसी कार्यप्रणाली का इस्तेमाल अन्य आयुष्मान क्लेम में भी किया गया था या नहीं।
48 हजार रुपये के कथित क्लेम से खुला मामला
मार्च में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक बिठमड़ा निवासी संदीप कुमार ने शिकायत की थी। आरोप था कि उनके नवजात बच्चे को दोबारा अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया, लेकिन आयुष्मान भारत पोर्टल पर उसे भर्ती दिखाकर करीब 48 हजार रुपये का क्लेम किया गया। इसके बाद शिकायत के आधार पर सीएम फ्लाइंग और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल पहुंचकर रिकॉर्ड की जांच की थी।
जांच के दौरान रिकॉर्ड में कथित तौर पर कई अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई। इनमें डिस्चार्ज से संबंधित विवरण में कटिंग और रिकॉर्ड में कथित हस्ताक्षरों से जुड़े सवाल भी शामिल बताए गए हैं।
चिकित्सक के नाम पर इलाज दर्शाने का भी आरोप
जांच से जुड़े विवरण के अनुसार जिस चिकित्सक के नाम पर इलाज दर्शाया गया था, उन्होंने कथित तौर पर अस्पताल आने और संबंधित रिकॉर्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया। इसके बाद मामले की जांच को और गंभीरता से आगे बढ़ाया गया।
पुलिस शिकायत के आधार पर डॉ. बिजेंदर टाक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336(3), 338 और 340 के तहत मामला दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है।
वहीं, यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी आरोपी के खिलाफ दर्ज आरोप या एफआईआर अपने आप अपराध साबित नहीं करती। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका वापस लिए जाने के बाद मामले की जांच जारी रहने की संभावना है। हाईकोर्ट के आदेश में भी प्रभावी जांच के लिए आरोपी से पूछताछ की आवश्यकता पर विचार किया गया था।
अब पुलिस जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि कथित फर्जी क्लेम से जुड़े दस्तावेज कहां तैयार हुए, पोर्टल पर किस स्तर से जानकारी दर्ज की गई और क्या इस तरह के अन्य मामलों में भी समान प्रक्रिया अपनाई गई थी।
विधाता नर्सिंग होम मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आयुष्मान भारत जैसी सरकारी स्वास्थ्य योजना में फर्जी क्लेम से सरकार को आर्थिक नुकसान होने के साथ पात्र मरीजों के अधिकारों पर भी असर पड़ सकता है।
TAP NEWS / THE ASIA PRIME
सत्य • निर्भीक • निष्पक्ष