गोरखपुर में माड़ू राम आर्य लाइब्रेरी का उद्घाटन, शिक्षा-संस्कार पर जोर
गोरखपुर में माड़ू राम आर्य लाइब्रेरी का उद्घाटन, शिक्षा के साथ संस्कारों पर भी दिया जोर

गोरखपुर में माड़ू राम आर्य लाइब्रेरी का विधिवत उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम में असीम सिवाच, जसमेर सिवाच, डॉ. वीरेंद्र सिवाच सहित गणमान्य लोग मौजूद रहे।
फतेहाबाद गोरखपुर ब्यूरो satbir jandli/ THE ASIA PRIME / TAP NEWS ।
फतेहाबाद जिले के गांव गोरखपुर में विद्यार्थियों को पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से माड़ू राम आर्य लाइब्रेरी का विधिवत उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में गांव के गणमान्य लोगों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने भाग लिया।

लाइब्रेरी के उद्घाटन अवसर पर जिला परिषद प्रतिनिधि जसमेर सिवाच ने कहा कि गांव के सामूहिक सहयोग से बच्चों के लिए शानदार लाइब्रेरी तैयार की गई है। यहां बच्चे शांत वातावरण में पढ़ाई कर सकेंगे और नौकरी तथा शिक्षा से जुड़े अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
उन्होंने गांव और आसपास से पहुंचे गणमान्य लोगों, स्कूल के प्रिंसिपल एवं स्टाफ का आभार जताया। साथ ही कार्यक्रम में विद्यार्थियों की ओर से किए गए स्वागत के लिए भी उनका धन्यवाद किया।
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शिक्षा के साथ संस्कारों पर भी ध्यान जरूरी: डॉ. वीरेंद्र सिवाच
कार्यक्रम में फतेहाबाद सिवाच हॉस्पिटल के डॉ. वीरेंद्र सिवाच ने वर्तमान दौर में बच्चों और समाज के सामने मौजूद चुनौतियों पर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि आज तकनीक और मोबाइल का दौर है। बच्चे मोबाइल और सोशल मीडिया से तेजी से जुड़ रहे हैं, लेकिन पढ़ाई, समाज और परिवार के प्रति जिम्मेदारियों को भी समझना जरूरी है।
डॉ. सिवाच ने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल ज्ञान और विकास के लिए होना चाहिए। बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ बड़े-बुजुर्गों का सम्मान, परिवार के प्रति जिम्मेदारी और समाज के प्रति अपने दायित्व को भी समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केवल पढ़-लिखकर सफल होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अच्छा इंसान वही है जो जीवन में मिलने वाली विभिन्न जिम्मेदारियों पर खरा उतरे।

- गोरखपुर की मिट्टी का कर्ज: मुख्य अतिथि HCS श्री असीम ने भावुक होते हुए कहा, “मैं इसी गोरखपुर से पढ़कर आज HCS अधिकारी बना हूँ। यहाँ की पढ़ाई और माहौल ने मुझे आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया, जिसके बाद मुझे प्रशासनिक सेवा में काफी काम करने का मौका मिला।”
- घर जैसी सुविधा: उन्होंने गांव में बनी नई लाइब्रेरी की सराहना करते हुए कहा कि “यह गांव की लाइब्रेरी नहीं, बल्कि अब आपके अपने घर की लाइब्रेरी है।”
- अतीत और आज के दौर का अंतर: अपने पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे समय में इतनी बेहतरीन सुविधाएं और संसाधन नहीं मिलते थे। आज के युवाओं के पास आगे बढ़ने के बेहतरीन मौके हैं।
- किताबों के साथ टेक्नोलॉजी का संगम: उन्होंने आज के डिजिटल युग के महत्व को समझाते हुए कहा कि आज का दौर सिर्फ किताबों का नहीं बल्कि किताबों के साथ-साथ टेक्नोलॉजी (तकनीक) का भी है।
- गूगल से पढ़ाई हुई आसान: उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज पढ़ाई बहुत आसान हो गई है। अगर पढ़ते समय कुछ समझ न आए, तो तुरंत गूगल पर सर्च करके उसका जवाब पाया जा सकता है।
- सफलता का मूल मंत्र: असीम जी ने युवाओं को प्रेरित करते हुए आखिरी बात यह कही कि “संसाधनों की कमी नहीं है, बस आज के दौर में आगे बढ़ने वाला और लगन से पढ़ने वाला होना चाहिए।”
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HCS असीम सिवाच सहित अनेक गणमान्य लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि HCS श्री असीम सिवाच सहित डॉ. वीरेंद्र सिवाच, ओमप्रकाश शर्मा, डॉ. सुरेंद्र शर्मा, राजकुमार शर्मा, सुभाष बंसल, गुलाब सिंह, प्रताप फौजी, सतपाल नैन, पृथ्वी मेंबर, विकास मेंबर, राजू मेंबर, हरपाल मेंबर, नटवर लाल, सुभाष सिवाच और फूलकुमार शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
शिक्षा जगत से प्रिंसिपल प्रहलाद सिंह मालवीय, प्रिंसिपल ईश्वर सिंह लोहरा, मास्टर दिनेश यादव, मास्टर प्रदीप और मास्टर ओमप्रकाश सहित अन्य शिक्षक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
इसके अलावा शमशेर सिंह, दीपु, मनोज, रवि तथा लाइब्रेरी में अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
गांव के सामूहिक सहयोग से तैयार हुई लाइब्रेरी
माड़ू राम आर्य लाइब्रेरी को गांव के सामूहिक सहयोग, मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण का प्रतीक बताया गया। इसका उद्देश्य गांव के बच्चों और युवाओं को ऐसा शांत वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां वे नियमित रूप से अध्ययन कर सकें और प्रतियोगी परीक्षाओं सहित अपनी शिक्षा से जुड़े लक्ष्यों की तैयारी कर सकें।
कार्यक्रम में शिक्षा को गांव के विकास और युवाओं के बेहतर भविष्य से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन करने तथा अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया गया।
“जहाँ किताबों का सम्मान होता है, वहाँ भविष्य का निर्माण होता है।”