PM मोदी से मिले बचपन के दोस्त, BJP विधायक से जुड़े जमीन विवाद में CBI जांच की मांग
81 वर्षीय वोहरा का दावा—1989 में खरीदी थी 2,810 वर्ग मीटर जमीन, न बेची न ट्रांसफर की; 2011 में फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप, 2015 में FIR के बाद 2026 में मिली CID रिपोर्ट

PM मोदी के बचपन के दोस्त 81 वर्षीय असगरअली वोहरा ने मीरा-भायंदर जमीन विवाद में CBI जांच की मांग की है। 1989 में खरीदी 2,810 वर्ग मीटर जमीन को लेकर गंभीर आरोप।
मुंबई/मीरा-भायंदर: Satbir Jandli THE ASIA PRIME / TAP NEWS
मुंबई/मीरा-भायंदर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन के स्कूल साथी 81 वर्षीय असगरअली वोहरा ने 8 सितंबर 2026 को पीएम मोदी से मुलाकात कर करीब चार दशक पुराने जमीन विवाद में हस्तक्षेप और CBI जांच की मांग की है। वोहरा का दावा है कि उन्होंने 1989 में भायंदर ईस्ट के नवघर रोड स्थित करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी, लेकिन बाद में उनकी जानकारी और सहमति के बिना जमीन से जुड़े कथित फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।
वोहरा ने प्रधानमंत्री को अपनी शिकायत से संबंधित पत्र भी सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में ‘सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स’ और ‘स्वयं बिल्डर्स’ से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए। उपलब्ध रिपोर्ट में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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वडनगर के बीएन स्कूल में साथ पढ़े थे PM मोदी और असगरअली
असगरअली वोहरा का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में पढ़ाई की थी। करीब 81 वर्ष की उम्र में भी वह पिछले कई वर्षों से अपनी जमीन के अधिकारों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में हुई मुलाकात के दौरान वोहरा ने पीएम मोदी को पूरे मामले की जानकारी दी और केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग रखी।
1989 में खरीदी थी 2,810 वर्ग मीटर जमीन
वोहरा के अनुसार, उन्होंने 1989 में रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के जरिए करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी। यह जमीन भायंदर ईस्ट के नवघर रोड क्षेत्र में स्थित है और इसका पुराना सर्वे नंबर 240, नया सर्वे नंबर 185, हिस्सा नंबर 6 बताया गया है।
वोहरा का दावा है कि उन्होंने यह जमीन न तो कभी बेची और न ही किसी दूसरे व्यक्ति या कंपनी के नाम ट्रांसफर की।
2011 के आसपास फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि करीब 2011 के आसपास इस जमीन से संबंधित कथित फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में स्वयं बिल्डर्स से जुड़े लोगों की मिलीभगत थी।
वोहरा के अनुसार, जमीन को उनकी जानकारी के बिना दो हिस्सों में बांटकर एक हिस्से पर स्वयं बिल्डर्स और दूसरे हिस्से पर सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स का कब्जा दिखाया गया।
हालांकि, इन आरोपों को अभी जांच और कानूनी प्रक्रिया के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। संबंधित पक्षों का जवाब सामने आने पर उसे भी रिपोर्ट में शामिल किया जाना जरूरी होगा।
2015 में FIR, करीब 11 साल बाद CID रिपोर्ट मिलने का दावा
वोहरा के अनुसार, इस मामले में 2015 में FIR दर्ज हुई थी, लेकिन CID की रिपोर्ट उन्हें वर्ष 2026 में मिली। उन्होंने इस लंबे अंतराल पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग में प्रभावशाली लोगों के कारण मामले में कार्रवाई प्रभावित हुई।
उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि जमीन से जुड़े दस्तावेजों और कथित लेन-देन की वास्तविकता सामने आ सके।
BJP नेता नरेंद्र मेहता से जुड़ी कंपनी का भी नाम
शिकायत में सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स का नाम भी सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कंपनी को BJP नेता और मीरा-भायंदर के पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता से जोड़ा गया है।
एक स्वतंत्र क्रेडिट-रेटिंग रिपोर्ट में भी Seven Eleven Constructions Pvt. Ltd. के बारे में नरेंद्र मेहता को कंपनी के संस्थापक के रूप में दर्ज किया गया था।
हालांकि, मौजूदा जमीन विवाद में वोहरा द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले जांच और न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार करना होगा।
PM मोदी से मुलाकात के बाद प्रशासन की नजर मामले पर
वोहरा की प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद स्थानीय प्रशासन और नगर निगम स्तर पर भी मामले को लेकर गतिविधियां बढ़ने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को निर्धारित है। इस दौरान संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों को भी उपस्थित रहने के लिए कहा गया है।
राजनीतिक दबाव के आरोप भी लगाए
वोहरा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि जमीन विवाद को लेकर उन्हें लंबे समय तक राजस्व कार्यालयों, नगर निगम और पुलिस के चक्कर लगाने पड़े। उन्होंने स्थानीय प्रशासन में कथित राजनीतिक प्रभाव की आशंका भी जताई है।
हालांकि, ये शिकायतकर्ता के आरोप हैं और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
करीब 40 साल पुरानी लड़ाई, अब PM से लगाई उम्मीद
असगरअली वोहरा का कहना है कि वह लगभग 40 वर्षों से जमीन के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री से मुलाकात कर CBI जांच की मांग रखी है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जमीन वास्तव में 1989 के रजिस्टर्ड एग्रीमेंट से खरीदी गई थी और शिकायतकर्ता ने इसे कभी बेचने या ट्रांसफर करने से इनकार किया है, तो बाद के दस्तावेजों में जमीन का स्वामित्व और कब्जा कैसे बदला—और इस पूरी प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका थी?
इन सवालों का जवाब दस्तावेजों की जांच और संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई से ही सामने आएगा।
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