गुरुग्राम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर संग किसानों की 4 घंटे मैराथन बैठक: 10 मांगों पर सहमति के संकेत
गुरुग्राम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किसानों की मांगों पर जताई सहमति: पहली बार मिला सरकार का पॉजिटिव रिस्पांस, किसान बोले- "मांगें लागू होने पर ही होंगे संतुष्ट"

गुरुग्राम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और 13 राज्यों के किसान प्रतिनिधियों के बीच 4 घंटे लंबी बैठक हुई। पहली बार सरकार का पॉजिटिव रिस्पांस मिला, पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
13 राज्यों के किसान नेताओं संग रात 11 बजे तक चली 4 घंटे की मैराथन बैठक; भारत-अमेरिका ट्रेड डील से कृषि बाहर रखने और मुकदमों की वापसी पर मिला बड़ा आश्वासन
गुरुग्राम / नई दिल्ली | सतबीर जांडली THE ASIA PRIME / TAP NEWS
केंद्र सरकार और देश के अन्नदाताओं के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक और सकारात्मक प्रगति देखने को मिली है। गुरुग्राम में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के शीर्ष प्रतिनिधिमंडल के बीच करीब 4 घंटे तक मैराथन बैठक चली। देर रात लगभग 11 बजे तक चले इस लंबे मंथन में 13 राज्यों से पहुंचे किसान प्रतिनिधियों ने अपनी 10 सूत्रीय प्रमुख मांगों का विस्तृत चार्टर केंद्र सरकार के सामने रखा।
बैठक के बाद दोनों पक्षों की ओर से सकारात्मक रुख देखने को मिला। केंद्रीय मंत्री ने जहां अधिकांश मांगों पर संबंधित मंत्रालयों से समन्वय कर त्वरित समाधान कराने की बात कही, वहीं किसान नेताओं ने भी स्वीकार किया कि लंबे समय बाद सरकार की तरफ से सकारात्मक दृष्टिकोण (पॉजिटिव रिस्पांस) देखने को मिला है। हालांकि, किसान नेताओं ने दो-टूक कहा कि अभी सिर्फ आश्वासन मिला है और देश का किसान तभी संतुष्ट होगा जब ये मांगें धरातल पर पूरी होंगी।
बैठक के प्रमुख बिंदु: किन 5 बड़े मुद्दों पर बनी सहमति की राह?
4 घंटे तक चले इस आमने-सामने के संवाद में किसानों की चिंताओं और आशंकाओं पर बिंदुवार चर्चा हुई:

- भारत-अमेरिका ट्रेड डील से खेती और डेयरी को बाहर रखना: किसानों ने आशंका जताई थी कि प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते से भारतीय कृषि और डेयरी सेक्टर को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इस पर सरकार ने बड़ा आश्वासन देते हुए कहा कि कृषि और डेयरी को इस डील से बाहर रखा जाएगा और जल्द ही इस पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी होगा।
- एमएसपी (MSP) पर सीधी बातचीत का भरोसा: न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और फसलों के उचित भाव की पुरानी मांग पर केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिया कि वे कृषि मंत्रालय से चर्चा कर किसान नेताओं और विभाग के बीच सीधी उच्चस्तरीय वार्ता (नेगोशिएशन) कराएंगे।
- हाई-टेंशन बिजली लाइनों का नया मुआवजा: खेतों से गुजरने वाली एचटी (HT) ट्रांसमिशन लाइनों के मुआवजे के लिए एक नई किसान-हितैषी राष्ट्रीय नीति बनाने का भरोसा दिया गया।
- आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों की वापसी: देशभर में किसान आंदोलनों के दौरान दर्ज सभी पुलिस मामलों और एफआईआर को 8 से 10 दिनों के भीतर वापस लेने की मांग पुरजोर तरीके से रखी गई।
- भूमि अधिग्रहण कानून 2013 की बहाली: जमीन अधिग्रहण से पूर्व 75% किसानों की लिखित सहमति, बाजार दर से 4 गुना मुआवजा और प्राथमिकता पर बंजर भूमि अधिग्रहण के प्रावधानों को पुनः लागू करने पर सरकार ने विचार का आश्वासन दिया।
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किसान नेताओं का रुख: “अगर 5-10 दिनों में फैसला हुआ, तभी बढ़ेगा भरोसा”
बैठक के बाद संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के संयोजक जगदीप सिंह डल्लेवाल ने बताया कि वार्ता काफी गंभीर और विस्तृत रही। चार्टर के हर बिंदु पर खुलकर बात हुई है।
वहीं, किसान नेता व सचिव हरदीप सिंह गिल ने स्पष्ट किया:
“अभी हमें केवल मौखिक आश्वासन मिला है। आने वाला समय बताएगा कि नीयत कितनी साफ है। यदि अगले 5 से 10 दिनों के भीतर हमारी 2 से 4 प्रमुख मांगें भी पूरी हो जाती हैं, तो किसानों का सरकार पर भरोसा कायम होगा कि वह सचमुच किसान हित में काम करना चाहती है। हमारी पूर्ण संतुष्टि फैसले लागू होने पर ही होगी।’
13 राज्यों के दिग्गज किसान प्रतिनिधि रहे मौजूद
इस उच्चस्तरीय बैठक में देश भर के प्रमुख किसान नेताओं ने भाग लिया:
- पंजाब व हरियाणा: जगदीप सिंह डल्लेवाल, हरदीप सिंह गिल, अभिमन्यु कोहाड़, सुखदेव सिंह भोजराज, सतनाम सिंह बहरू और राजेंद्र सिंह चहल।
- दक्षिण व अन्य राज्य: तमिलनाडु से पी. आर. पांडेयन, कर्नाटक से शांता कुमार, मध्य प्रदेश से लीलाधर राजपूत, उत्तर प्रदेश से प्रहलाद पूनिया व सोमवीर और राजस्थान से इंद्रजीत पन्नीवाला शामिल रहे।
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लंबे टकराव के बाद केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की यह मध्यस्थता केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच जमी बर्फ को पिघलाने में अहम साबित हो सकती है। यदि सरकार अगले कुछ दिनों में मुकदमों की वापसी और ट्रेड डील पर औपचारिक नोटिफिकेशन जारी कर देती है, तो यह देश की कृषि राजनीति में एक बड़ा शांतिपूर्ण मोड़ साबित होगा।
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