Skip to content
https://annapurnafoods.in
Delhi Ncr
Trending

चुनाव आयोग विवाद: 14 आपत्तियों की खबर पर बवाल

चुनाव आयोग में 14 कथित आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद विवाद बढ़ा। विपक्ष के सवालों पर EC ने कहा- SIR समेत सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए।

SIR और वोटर लिस्ट से जुड़े फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने CEC ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए, चुनाव आयोग ने रिपोर्ट की व्याख्या पर जताई असहमति

नई दिल्ली ब्यूरो:TAP NEWS / THE ASIA PRIME
नई दिल्ली: चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर 2026 की जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां/टिप्पणियां दर्ज कीं।

रिपोर्ट में जिन मुद्दों का उल्लेख किया गया है, उनमें मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR), Form-6 में बदलाव, चुनावी डेटा और डिजिटल सिस्टम तक अधिकारियों की पहुंच, पश्चिम बंगाल में मतदाता नाम हटाने से जुड़ी अपीलें तथा गोवा में पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने जैसे मामले शामिल हैं।
फतेहाबाद:नागपुर में कांग्रेस का ब्लॉक सम्मेलन, सिरसा लोकसभा सांसद कुमारी सैलजा के साथ कल्याण सिंह भादू ने की प्रोग्राम में शिरकत
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि आयोग के सदस्यों द्वारा किसी प्रस्ताव या फैसले के मसौदा चरण में सवाल, सुझाव या अलग-अलग विचार रखना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया है।
EC के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में SIR समेत आयोग के सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि उसके आधिकारिक आदेश और प्रशासनिक निर्देश कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी हुए हैं।

चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म और चुनावी डेटा सिस्टम निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित होते हैं तथा Electoral Registration Officers और District Election Officers अपने वैधानिक अधिकारों के तहत काम करते हैं।
DUSU चुनाव में NSUI का खाता नहीं खुला, निर्दलीय दीपांशु शौकीन की बड़ी जीत
रिपोर्ट में किन बातों पर आपत्ति का जिक्र?
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग मौकों पर आयोग के नाम से लिए गए कुछ फैसलों और प्रशासनिक कदमों पर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में Form-6 में बदलाव, चुनावी डेटाबेस के नियंत्रण के केंद्रीकरण, पश्चिम बंगाल में वोटर डिलीशन से संबंधित अपीलों और गोवा में पात्र मतदाताओं से जुड़े मामलों का उल्लेख है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ आपत्तियां एक ही दिन में भी दर्ज की गई थीं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से इस पूरे विवाद पर अलग से कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड
विपक्ष ने क्या कहा?
रिपोर्ट के बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया से जोड़ते हुए चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उनके बयान में SIR और कथित वोटर-लिस्ट गड़बड़ियों का मुद्दा प्रमुख रहा।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और दावा किया कि दोनों आयुक्तों की ओर से कई बार लिखित आपत्तियां दर्ज की गई थीं।
टोहाना में विनोद बबली की बढ़ती सक्रियता से सियासी चर्चा, क्या राजनीति में उतरेंगे?
वहीं अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल, कपिल सिब्बल और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग से जवाब और पारदर्शिता की मांग की है। कुछ नेताओं ने CEC को हटाने या SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने जैसी मांगें भी उठाई हैं। ये राजनीतिक नेताओं के दावे और मांगें हैं, जिन पर चुनाव आयोग ने अलग पक्ष रखा है।

BJP ने क्या कहा?
भाजपा ने चुनाव आयुक्तों के बीच विचारों में अंतर को आयोग के भीतर लोकतांत्रिक विचार-विमर्श का हिस्सा बताया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि सदस्यों के बीच असहमति या अलग-अलग विचार होना इस बात का संकेत है कि संस्थागत स्तर पर चर्चा होती है। भाजपा का कहना है कि अंतिम तौर पर SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

अब असली विवाद क्या है?
पूरे मामले में दो अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं।
एक तरफ, द इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से 10 महीने में 14 बार दर्ज की गई कथित आपत्तियों का उल्लेख है।

दूसरी तरफ, चुनाव आयोग कह रहा है कि ये टिप्पणियां और सुझाव आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा थे और अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए।

इसलिए फिलहाल सार्वजनिक बहस का मुख्य सवाल यही है कि इन आंतरिक नोट्स और आपत्तियों का वास्तविक संस्थागत और कानूनी प्रभाव क्या था। इस पर उपलब्ध रिपोर्टों में अलग-अलग दावे हैं और चुनाव आयोग ने रिपोर्ट की उस व्याख्या को स्वीकार नहीं किया है जिसमें इसे आयोग के भीतर निर्णायक टकराव के रूप में पेश किया गया है।

सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट में ₹17.29 करोड़ के जाली नोट, आम आदमी पर सख्ती पर उठे सवाल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button