DUSU चुनाव में NSUI का खाता नहीं खुला, निर्दलीय दीपांशु शौकीन की बड़ी जीत
DUSU चुनाव में NSUI को बड़ा झटका: निर्दलीय दीपांशु शौकीन की रिकॉर्ड जीत, कांग्रेस के टिकट बंटवारे पर उठे सवाल

DUSU Election Result 2026 में ABVP ने तीन पद जीते, जबकि पूर्व NSUI सदस्य दीपांशु शौकीन ने निर्दलीय उपाध्यक्ष पद जीता। NSUI के टिकट वितरण पर सवाल उठे।
दिल्ली विश्वविद्यालय : TAP NEWS / THE ASIA PRIME / छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 के नतीजों ने कांग्रेस की छात्र राजनीति में टिकट वितरण और संगठनात्मक रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। NSUI चारों केंद्रीय पदों में से एक भी सीट नहीं जीत सकी, जबकि पूर्व NSUI सदस्य दीपांशु शौकीन ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उपाध्यक्ष पद जीत लिया।
30,615 वोट लेकर दीपांशु शौकीन की बड़ी जीत
उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन को 30,615 वोट मिले। ABVP के ईशू मौर्य को 16,910 और NSUI के वीर चतरथ को 4,313 वोट मिले। शौकीन ने ईशू मौर्य को 13,705 वोटों के अंतर से हराया।
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दिलचस्प बात यह है कि उपाध्यक्ष पद पर NOTA को 4,359 वोट मिले, यानी NSUI प्रत्याशी वीर चतरथ के 4,313 वोट से भी 46 ज्यादा। �
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NSUI का टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय मैदान में उतरे शौकीन
रिपोर्टों के मुताबिक दीपांशु शौकीन लंबे समय से NSUI से जुड़े थे और उन्होंने संगठन से उपाध्यक्ष पद के लिए टिकट मांगा था। अंतिम सूची में नाम नहीं आने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। चुनाव में उन्होंने NSUI और ABVP दोनों के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ दिया। �
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शौकीन ने चुनाव के बाद कहा कि पार्टी टिकट दे सकती है, लेकिन अंतिम फैसला छात्र मतदाता करते हैं।
कांग्रेस नेता के बेटे को टिकट देने पर बहस
वीर चतरथ के बारे में द ट्रिब्यून ने रिपोर्ट किया कि वह कांग्रेस के प्रशासनिक सचिव मनीष चतरथ के बेटे हैं।
द फेडरल की एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में NSUI के भीतर टिकट वितरण को लेकर असंतोष और शौकीन को टिकट नहीं मिलने पर सवाल उठने की बात कही गई है। रिपोर्ट में कुछ पार्टी सूत्रों के हवाले से टिकट चयन पर आलोचना भी दर्ज की गई है। इन दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि संबंधित सूत्रों/विश्लेषण के रूप में देखना चाहिए।
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DUSU में ABVP ने तीन पद जीते
2026 के DUSU चुनाव में ABVP ने चार में से तीन केंद्रीय पद जीते:
अध्यक्ष: यश डबास — 24,576 वोट
उपाध्यक्ष: दीपांशु शौकीन — निर्दलीय, 30,615 वोट
सचिव: रिया छाबड़ी — 21,650 वोट
संयुक्त सचिव: लक्ष्य राज सिंह — 16,615 वोट
NSUI अध्यक्ष पद पर भी करीबी मुकाबले में रही। यश डबास ने NSUI के विजय शंकर मीणा को 2,053 वोट से हराया।

क्या यह कांग्रेस के लिए संगठनात्मक संदेश है?
DUSU का परिणाम निश्चित रूप से NSUI के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक-संगठनात्मक घटनाक्रम है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि एक पूर्व NSUI सदस्य ने संगठन से टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय लड़कर उपाध्यक्ष पद जीत लिया और NSUI का उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहा।
हालांकि, केवल DUSU परिणाम के आधार पर कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति या भविष्य के चुनावी प्रदर्शन पर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसी तरह यह कहना भी तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा कि राहुल गांधी या किसी विशेष नेता को आगे बढ़ाने की नीति ही भाजपा की जीत की गारंटी है।
लेकिन DUSU परिणाम ने टिकट वितरण, जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका और संगठन के भीतर उम्मीदवार चयन पर बहस जरूर तेज कर दी है। द फेडरल और अन्य रिपोर्टों ने भी इसी पहलू को चुनाव के बाद चर्चा का विषय बताया है।
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The DUSU Election Result 2026 has ignited a new debate within the Congress student organization regarding ticket distribution and strategic decisions. Notably, the NSUI failed to secure any central positions, while former NSUI member Deepanshu Shaukeen won the vice-presidential role as an independent candidate, garnering 30,615 votes. This outcome not only highlights the challenges faced by NSUI but also raises questions about the effectiveness of their candidate selection process, particularly in light of the close contest for various positions.