रेमंड ग्रुप के गौतम सिंघानिया का तलाक विवाद: पत्नी ने मांगी 75% संपत्ति, पिता विजयपत के पुराने दर्द की फिर चर्चा
करोड़ों के साम्राज्य 'द कम्प्लीट मैन' के मालिक की निजी जिंदगी में उथल-पुथल; नवाज मोदी के साथ सेटलमेंट और पारिवारिक विवादों पर उद्योग जगत की नजर

रेमंड ग्रुप के चेयरमैन गौतम सिंघानिया और नवाज मोदी के तलाक में 75% नेटवर्थ सेटलमेंट की मांग। पिता विजयपत सिंघानिया से अनबन और जेके हाउस विवाद से लेकर पूरे मामले की इनसाइड स्टोरी।
मुंबई / नई दिल्ली | सतबीर जांडली THE ASIA PRIME / TAP NEWS
देश के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक टेक्सटाइल ब्रांड रेमंड (Raymond) को पहचान दिलाने वाले सिंघानिया परिवार का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। रेमंड ग्रुप के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) गौतम सिंघानिया और उनकी पत्नी नवाज मोदी सिंघानिया के बीच तलाक की कानूनी प्रक्रिया और संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रही चर्चाओं ने कॉर्पोरेट जगत में हलचल मचा रखी है।
इस हाई-प्रोफाइल तलाक के साथ ही सोशल मीडिया और व्यावसायिक गलियारों में उनके पिता व पद्मभूषण से सम्मानित उद्योगपति डॉ. विजयपत सिंघानिया के साथ हुए पुराने पारिवारिक विवाद की यादें भी ताजा हो गई हैं।
तलाक और 75% संपत्ति की मांग का क्या है मामला?
गौतम सिंघानिया और फिटनेस ट्रेनर नवाज मोदी की शादी 32 साल की दोस्ती और 24 साल के वैवाहिक रिश्ते के बाद अलगाव के मुहाने पर पहुंची। दोनों के बीच रिश्ते बिगड़ने के बाद नवाज मोदी सिंघानिया द्वारा तलाक के एवज में परिवार की कुल संपत्ति का 75 प्रतिशत हिस्सा अपने और अपनी दो बेटियों (निहारिका और निसा) के भविष्य के लिए मांगने की खबरें सामने आईं।
- नेटवर्थ का गणित: गौतम सिंघानिया की कुल संपत्ति लगभग 1.4 अरब डॉलर (करीब 11,000 से 12,000 करोड़ रुपये) आंकी जाती है।
- नवाज मोदी की शर्त: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नवाज मोदी ने यह संपत्ति एक irrevocable (अपरिवर्तनीय) फैमिली ट्रस्ट में ट्रांसफर करने की मांग रखी, जिसकी देखरेख और प्रबंधन का अधिकार उनके पास रहे।
- गौतम सिंघानिया का रुख: हालांकि गौतम सिंघानिया ने परिवार के हितों की रक्षा के लिए ट्रस्ट बनाने पर सैद्धांतिक सहमति की बात कही थी, लेकिन संपत्ति का प्रबंधन और अकेले नियंत्रण देने पर दोनों पक्षों के बीच कानूनी खींचतान बनी रही।
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पिता विजयपत सिंघानिया और ‘जेके हाउस’ का पुराना विवाद
इस नए विवाद के सामने आने के बाद लोग 85 वर्षीय विजयपत सिंघानिया के साथ हुए अतीत के घटनाक्रम की तुलना मौजूदा हालात से कर रहे हैं:
- साम्राज्य सौंपना: विजयपत सिंघानिया ने अपने जीवनभर की मेहनत से खड़े किए गए रेमंड साम्राज्य के 37% से अधिक शेयर फरवरी 2015 में उपहार (Gift Deed) के तौर पर अपने बेटे गौतम सिंघानिया के नाम कर दिए थे।
- अनबन और कानूनी लड़ाई: शेयर ट्रांसफर के कुछ ही समय बाद पिता और पुत्र के बीच रिश्ते बेहद तल्ख हो गए। दक्षिण मुंबई के पॉश इलाके में स्थित 37 मंजिला लग्जरी ‘जेके हाउस’ (JK House) में डुप्लेक्स फ्लैट को लेकर विवाद अदालत तक पहुंच गया।
- साधनों से बेदखली के आरोप: विजयपत सिंघानिया ने आरोप लगाया था कि उन्हें कंपनी और घर से बेदखल कर दिया गया, यहां तक कि उनकी गाड़ी, ड्राइवर और मूलभूत सुविधाएं भी वापस ले ली गईं और उन्हें किराए के मकान में रहने को मजबूर होना पड़ा।
- किताब में छलका दर्द: विजयपत सिंघानिया ने अपनी आत्मकथा ‘द इनकम्प्लीट मैन’ (The Incomplete Man) में लिखा था कि बेटे को अपना सब कुछ सौंपना उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी। हालांकि, पिछले कुछ समय में दोनों के बीच कभी-कभार मुलाकातों की तस्वीरें भी सामने आईं, लेकिन कानूनी और भावनात्मक दूरियां पूरी तरह नहीं मिटीं।
रेमंड ब्रांड की टैगलाइन दशकों तक “द कम्प्लीट मैन” (The Complete Man) रही है, जो एक आदर्श पारिवारिक और संजीदा पुरुष की छवि पेश करती है। लेकिन इस ब्रांड को खड़ा करने वाले परिवार के भीतर का यह टकराव दर्शाता है कि अकूत दौलत और कॉर्पोरेट कामयाबी के बावजूद पारिवारिक रिश्तों को सहेजना कितना चुनौतीपूर्ण है।
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, इस स्तर के सेटलमेंट में कंपनी के शेयर्स, शेयरहोल्डर्स के अधिकार और बोर्ड का ढांचा भी प्रभावित हो सकता है, इसलिए इस पूरे मामले पर सेबी (SEBI) और कॉर्पोरेट निवेशकों की भी पैनी नजर है।
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