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नेपाल में बाढ़: 157 मौतें, 750 से ज्यादा लापता; 133 भारतीय भी शामिल

नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड से 157 लोगों की मौत और 750 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। जानिए बाढ़ क्यों आई, नेपाल में कितना नुकसान हुआ और भारत पर क्या असर पड़ेगा।

काठमांडू/नई दिल्ली THE ASIA PRIME / TAP NEWS

काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। नेपाल पुलिस के मुताबिक अब तक 157 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि नेपाल और चीन की सीमा से जुड़े आंकड़ों में 750 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 133 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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आखिर नेपाल में इतनी भयानक बाढ़ क्यों आई?
यह सामान्य मानसूनी बारिश से आई बाढ़ नहीं थी। उपलब्ध वैज्ञानिक और सरकारी रिपोर्टों के अनुसार नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बड़े भूस्खलन/बर्फ-पत्थर के हिमस्खलन के कारण अचानक भारी मात्रा में मलबा, बर्फ और पानी नदी में आ गया। इससे Lhende Khola और Bhote Koshi नदी तंत्र में अचानक पानी का जबरदस्त उफान आया।
Reuters के अनुसार ग्लेशियर के हिस्से के ढहने और उससे जुड़े बड़े मलबे के बहाव ने फ्लैश फ्लड को जन्म दिया। वैज्ञानिक अभी यह भी जांच रहे हैं कि इसके पीछे भूकंपीय गतिविधि और पहाड़ी अस्थिरता की क्या भूमिका रही।

नेपाल में भीषण बाढ़ से तबाही और भारत पर संभावित असर
TAP NEWS : नेपाल में फ्लैश फ्लड से भारी तबाही, भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश में भी अलर्ट।                                 अचानक आई इस बाढ़ की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई स्थानों पर लोगों को संभलने और सुरक्षित जगह जाने तक का समय नहीं मिला। पानी के साथ भारी मात्रा में पत्थर और कीचड़ भी नीचे की ओर आया, जिससे रास्ते, पुल और बस्तियां इसकी चपेट में आ गईं।

नेपाल में कितना नुकसान हुआ?
बाढ़ ने रसुवा, धादिंग, नुवाकोट और आसपास के कई जिलों में भारी तबाही मचाई। कई घर और वाहन बह गए। सड़क और पुलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
रिपोर्टों के अनुसार नेपाल में कम से कम 19 मोटरेबल पुल और करीब 42 किलोमीटर सड़क बाढ़ में क्षतिग्रस्त या बह गई। इससे प्रभावित पहाड़ी क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना मुश्किल हो गया है।
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नेपाल के बिजली क्षेत्र को भी बड़ा नुकसान हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं, जिनकी संयुक्त क्षमता करीब 354 मेगावाट थी, प्रभावित हुई हैं। निर्माणाधीन परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी है।

सैकड़ों लोग अब भी लापता
नेपाल के अलावा तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्र में भी बाढ़ और मलबे से नुकसान हुआ है। चीन की ओर से 3 मौतों और 265 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। नेपाल में भी बड़ी संख्या में लोगों की तलाश जारी है।

सबसे बड़ी चिंता उन भारतीय नागरिकों को लेकर है जो नेपाल में धार्मिक यात्रा या पर्यटन के लिए गए थे। उपलब्ध रिपोर्टों में 133 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी गई है।
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भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
नेपाल की इस आपदा का असर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि नेपाल से निकलने वाली कई नदियां भारत में प्रवेश करती हैं। खास तौर पर नारायणी नदी आगे चलकर गंडक नदी प्रणाली का हिस्सा बनती है, जिसके रास्ते बिहार और उत्तर प्रदेश तक पहुंचते हैं।
नेपाल से अचानक ज्यादा पानी आने के कारण बिहार में गंडक नदी को लेकर हाई अलर्ट किया गया है। भारत सरकार ने बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से स्थिति पर चर्चा की है और संभावित प्रभावित सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन तथा NDRF को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

बिहार में गंडक बराज के सभी 36 गेट खोले जाने की रिपोर्ट सामने आई है ताकि पानी के दबाव को नियंत्रित किया जा सके। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली समेत कई क्षेत्रों में प्रशासन को सतर्क किया गया है।
अगर नेपाल की ओर से नदी में पानी का प्रवाह लगातार बढ़ता है और भारत में भी बारिश होती है, तो निचले इलाकों, खेतों, सड़कों और नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
भारत ने नेपाल को भेजी राहत
भारत ने नेपाल की मदद के लिए राहत सामग्री भेजना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत ने शुरुआती तौर पर करीब 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी, जिसमें अस्थायी आश्रय सामग्री, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बात कर हरसंभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया है। भारत की ओर से प्रभावित भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और राहत-बचाव में नेपाल के साथ समन्वय किया जा रहा है।

आगे भी खतरा क्यों?
विशेषज्ञों की चिंता सिर्फ मौजूदा बाढ़ तक सीमित नहीं है। पहाड़ी इलाकों में भारी मलबा नदी का रास्ता रोक सकता है। यदि कहीं अस्थायी बांध बनता है और बाद में टूटता है, तो दूसरी बार अचानक तेज बाढ़ आ सकती है। इसलिए नेपाल के साथ-साथ भारत के नदी किनारे वाले इलाकों में भी लगातार निगरानी जरूरी है।
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THE ASIA PRIME / TAP NEWS
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