
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के वायरल दावों और लाल किले के प्रवेश पत्र को लेकर विवाद। राजनीतिक रसूख और पुलिस कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल।
हमले के पीड़ित को न्याय के इंतजार के बीच आरोपी का वीडियो वायरल; रक्षा मंत्रालय के नाम जारी प्रवेश पत्र और बड़े नेताओं संग तस्वीरों ने खड़े किए सवाल
नई दिल्ली | सतबीर जांडली THE ASIA PRIME TAP NEWS
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक संरक्षण को लेकर एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से एक लड़की के पिता पर जानलेवा हमला करने और सिर फोड़ने के मामले में चर्चा में आए स्वतंत्र भारद्वाज का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह कथित तौर पर खुद को राजनीतिक रूप से प्रभावशाली बताते हुए पुलिस और कानूनी प्रक्रियाओं को धता बताते नजर आ रहे हैं।
इसके साथ ही, स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) द्वारा जारी लाल किले का आधिकारिक एडमिट कार्ड/निमंत्रण पत्र भी सामने आया है, जिस पर स्वतंत्र भारद्वाज का नाम दर्ज है। गंभीर आरोपों से घिरे व्यक्ति का लाल किले जैसे अति-संवेदनशील और वीआईपी कार्यक्रम में पहुंचना सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
क्या है पूरा मामला और पुराना विवाद?
यह विवाद जंतर-मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान एक युवती (निशु) के पिता के साथ कथित तौर पर गंभीर मारपीट की गई थी, जिसमें उनके सिर पर गहरी चोटें आई थीं और कई टांके लगाने पड़े थे। घटना के समय घायल व्यक्ति को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया था। उस दौरान थाने के बाहर पीड़ित परिवार ने न्याय की गुहार लगाते हुए जमकर विरोध दर्ज कराया था।
पीड़ित पक्ष का आरोप था कि हमलावरों के खिलाफ हत्या के प्रयास (धारा 307) जैसी गंभीर धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए थी, लेकिन रसूख के चलते मामले में अपेक्षित सख्ती नहीं बरती गई।


वायरल वीडियो में किए गए चौंकाने वाले दावे
हाल ही में सामने आए एक साक्षात्कार/वीडियो क्लिप में स्वतंत्र भारद्वाज खुद पर लगे आरोपों को लेकर बेबाकी से बात करते दिख रहे हैं। वीडियो में वह यह दावा करते नजर आ रहे हैं कि:
- घटना के बाद उन्हें किसी प्रकार की सख्त पुलिस हिरासत या जेल का सामना नहीं करना पड़ा।
- वीडियो में उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक संपर्कों और वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव के चलते उन पर कोई आंच नहीं आई।
- उन्होंने कई बड़े राजनीतिक चेहरों और मंत्रियों के साथ अपने कथित संबंधों का भी सार्वजनिक रूप से जिक्र किया।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही वायरल हो गया और विपक्षी दलों समेत आम जनता ने सवाल उठाया कि एक संगीन मामले से जुड़ा व्यक्ति खुलेआम कानून का उपहास कैसे उड़ा सकता है।
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लाल किले के निमंत्रण पत्र पर उठते सवाल
मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए जारी एक प्रवेश पत्र (Admit Card) की तस्वीर सामने आई। इस कार्ड पर:

- रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence, Ceremonials) का आधिकारिक प्रारूप अंकित है।
- ऊपर हाथ से “For Swatantra Bhardwaj” लिखा हुआ देखा जा सकता है।
- यह पास लाल किला समारोह के लिए जारी किया गया था।
सोशल मीडिया पर यूजर्स सवाल कर रहे हैं कि जहां देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय पर्व पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम होते हैं और आम नागरिकों के लिए कड़े सत्यापन नियम लागू होते हैं, वहां आपराधिक विवादों में घिरे शख्स को वीआईपी गैलरी तक पहुंचने का पास कैसे आवंटित हुआ?
The Asia Prime / TAP News के मुख्य सवाल:
- सुरक्षा सत्यापन में चूक या अनदेखी? लाल किला जैसे संवेदनशील आयोजन के लिए सुरक्षा पास जारी करने से पहले क्या पुलिस और खुफिया विभाग द्वारा संबंधित व्यक्तियों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन नहीं किया जाता?
- कानून के सामने सब बराबर कब? जब कोई व्यक्ति कैमरे के सामने किसी पर हमला करने की बात स्वीकारने का दावा कर रहा हो, तो दिल्ली पुलिस की ओर से उस पर अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं?
- नेताओं के साथ तस्वीरों की आड़ में मनमानी: क्या केवल राजनीतिक हस्तियों के साथ तस्वीरें होना किसी को भी कानून से ऊपर होने का लाइसेंस दे देता है?
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