सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट में ₹17.29 करोड़ के जाली नोट, आम आदमी पर सख्ती पर उठे सवाल
सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट में ₹17.29 करोड़ के जाली नोट मिलने से बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल उठे। ₹4.30 लाख की कमी से खुला मामला, NIA जांच में जुटी।

सहारनपुर के PNB करेंसी चेस्ट में मिले करोड़ों के जाली नोटों ने खड़े किए गंभीर सवाल; ₹4.30 लाख की कमी से शुरू हुई जांच पहुंची ₹17.29 करोड़ की नकली करेंसी तक, NIA ने PNB के पूर्व मैनेजर को किया गिरफ्तार सहारनपुर/नई दिल्ली:TAP NEWS / THE ASIA PRIME
अगर आम आदमी गलती से बैंक में नकदी की गड्डी जमा कराने जाए और उसमें से एक नकली नोट निकल जाए, तो उस नोट को बैंक तत्काल ‘COUNTERFEIT BANKNOTE’ की मुहर लगाकर जब्त कर लेता है। उस नकली नोट की रकम खाते में जमा नहीं की जाती। भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक बैंक को ऐसे नोट को वापस ग्राहक को नहीं देना होता और निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुलिस को रिपोर्ट भी करनी होती है।
Reserve Bank of India
लेकिन अब उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट से करीब ₹17.29 करोड़ मूल्य के जाली नोट मिलने का मामला सामने आया है। यही वजह है कि यह घटना सिर्फ नकली नोटों की बरामदगी नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम की निगरानी और आंतरिक नियंत्रण पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
₹4.30 लाख की कमी से खुला ₹17.29 करोड़ की जाली करेंसी का मामला
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मामला सहारनपुर के घंटाघर के पास सोफिया मार्केट स्थित PNB करेंसी चेस्ट से जुड़ा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, करेंसी चेस्ट से बड़ी मात्रा में नकदी भारतीय रिजर्व बैंक के जयपुर कार्यालय भेजी गई थी। नोटों की जांच के दौरान करीब ₹4,30,900 की कमी सामने आई। इसके बाद बैंक मुख्यालय की टीम ने सहारनपुर पहुंचकर करेंसी चेस्ट की जांच शुरू की।
शुरुआती जांच में करीब ₹7.40 करोड़ मूल्य के जाली नोट मिलने की बात सामने आई। जांच आगे बढ़ने पर बरामद जाली करेंसी की कुल कीमत करीब ₹17.29 करोड़ तक पहुंच गई। मामले में जांच एजेंसियों ने बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल शुरू की।
मामला अब NIA के हाथ में, PNB मैनेजर गिरफ्तार
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) तक पहुंच चुकी है।
NIA ने 7 सितंबर को इस मामले में एक प्रमुख आरोपी को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गिरफ्तार किए गए व्यक्ति अमित कुमार PNB के करेंसी चेस्ट से जुड़े पूर्व मैनेजर हैं।
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जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट करेंसी चेस्ट के अंदर कैसे पहुंचे और क्या इस पूरे मामले में बैंकिंग व्यवस्था के भीतर से किसी ने मदद की।
रिपोर्टों के अनुसार जांच में ₹111 करोड़ के एक करेंसी ट्रेल को भी अहम कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
करेंसी चेस्ट में सुरक्षा की इतनी परतें, फिर करोड़ों के नकली नोट कैसे पहुंचे?
यह सवाल सबसे बड़ा है।
करेंसी चेस्ट सामान्य बैंक शाखा की तरह नहीं होता। यहां भारी मात्रा में करेंसी रखी और भेजी जाती है। ऐसे स्थानों पर नकदी के आने-जाने का रिकॉर्ड, मशीनों से नोटों की जांच और अधिकारियों की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं होती हैं।
RBI के निर्देशों के अनुसार बैंक शाखाओं और करेंसी चेस्ट में नकदी की जांच के लिए Currency Verification and Processing System/Machines का इस्तेमाल किया जाता है। करेंसी चेस्ट में सीधे आने वाली बड़ी मात्रा की नकदी की भी मशीनों के माध्यम से जांच की जानी चाहिए।
फिर सवाल यही है—
अगर मशीनें नकली नोट पहचान सकती हैं, रिकॉर्ड मौजूद हैं और करेंसी चेस्ट में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय है, तो ₹17.29 करोड़ के जाली नोट वहां तक पहुंचे कैसे?
आम आदमी के एक नोट पर इतनी सख्ती क्यों?
आम ग्राहक बैंक में नकदी जमा कराने जाता है तो छोटी-सी कमी पर भी उसे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
कभी कहा जाता है—
“आपका सिग्नेचर मैच नहीं हो रहा।”
कभी—
“पासबुक लेकर आइए, तभी पैसे मिलेंगे।”
कभी—
“आपका फोटो/केवाईसी अपडेट नहीं है।”
कभी किसी छोटी सी औपचारिकता के कारण ग्राहक को घंटों बैंक के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
और अगर उसकी नकदी में एक नकली नोट निकल आए तो बैंक उस नोट को स्वीकार नहीं करता, उसे जब्त कर निर्धारित प्रक्रिया अपनाता है।
यह नियम जरूरी भी है क्योंकि नकली नोट अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर समस्या हैं। लेकिन इसके साथ एक दूसरा सवाल भी उठता है—
जिस आम आदमी के हाथ में एक नकली नोट मिलने पर बैंक और कानून की पूरी प्रक्रिया सक्रिय हो जाती है, उसी बैंकिंग सिस्टम की करेंसी चेस्ट में करोड़ों रुपये के जाली नोट आखिर कैसे पहुंच गए?
क्या बैंक की जांच व्यवस्था पर उठेंगे सवाल?
इस मामले ने बैंकिंग सिस्टम की उस सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर आम नागरिक अपना पैसा और देश अपनी मुद्रा व्यवस्था भरोसे के साथ छोड़ता है।
यहां सवाल केवल PNB का नहीं है। सवाल यह है कि करेंसी चेस्ट जैसी हाई-सिक्योरिटी व्यवस्था में यदि करोड़ों की नकली करेंसी पहुंच सकती है, तो निगरानी की कौन-सी कड़ी कमजोर पड़ी?
जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि—
जाली नोट करेंसी चेस्ट तक किस रास्ते से पहुंचे?
नकली नोटों की मशीनों से जांच क्यों नहीं हुई?
करेंसी की गिनती और रिकॉर्ड में इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई?
किन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी थी?
क्या असली नोटों को हटाकर उनकी जगह नकली नोट रखे गए?
क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था?
बैंकिंग चैनल के जरिए इन नोटों को आगे भेजने की कोशिश हुई या नहीं?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
जांच के दायरे में बैंक कर्मचारी भी
मामले की जांच के दौरान बैंक से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी सामने आई है। एक कर्मचारी को लेकर उसकी आय और संपत्तियों से जुड़े सवाल भी जांच का हिस्सा बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार कम वेतन पाने वाले एक संविदा कर्मचारी की कथित संपत्तियों और करेंसी चेस्ट में उसकी गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
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हालांकि किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकता है।
17.29 करोड़ की जाली करेंसी ने आम आदमी के सामने खड़ा किया बड़ा सवाल
नकली नोट पकड़े जाने पर आम नागरिक से उम्मीद की जाती है कि वह नोट की जांच करे, सावधानी बरते और बैंकिंग नियमों का पालन करे।
लेकिन जब करोड़ों रुपये की जाली करेंसी बैंक की अपनी करेंसी चेस्ट तक पहुंचने की खबर सामने आती है, तो सवाल सिर्फ ग्राहक से नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था से पूछा जाना चाहिए।
आम आदमी के एक नकली नोट पर बैंक की सख्ती जायज है, लेकिन बैंक के भीतर करोड़ों के जाली नोट पहुंचने पर जवाबदेही उससे भी ज्यादा सख्त होनी चाहिए।
सहारनपुर का यह मामला अब सिर्फ ₹17.29 करोड़ की जाली करेंसी का मामला नहीं रहा। यह देश की मुद्रा सुरक्षा, बैंकिंग निगरानी और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन चुका है।
जांच एजेंसियां जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगी, यह साफ होगा कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट करेंसी चेस्ट तक पहुंचने के पीछे महज लापरवाही थी या कोई सुनियोजित साजिश।