सुपर गेहूं CG 1047: कम पानी में बंपर पैदावार, आयरन-जिंक से भरपूर; BARC और IGKV ने किया विकसित
10 साल के कड़े शोध के बाद BARC मुंबई और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित की बायोफोर्टिफाइड किस्म ‘छत्तीसगढ़ ट्रॉम्बे कुमुद’

वैज्ञानिकों ने तैयार की सुपर गेहूं की बायोफोर्टिफाइड किस्म ‘सीजी 1047’ (छत्तीसगढ़ ट्रॉम्बे कुमुद)। मात्र 2-3 सिंचाई में 36.7 क्विंटल पैदावार, भरपूर प्रोटीन, आयरन और जिंक।
कृषि डेस्क | सतबीर जांडली (THE ASIA PRIME / TAP NEWS)
कृषि वैज्ञानिकों ने देश के किसानों और आम जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए गेहूं की एक क्रांतिकारी बायोफोर्टिफाइड किस्म विकसित की है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (रायपुर) के अंतर्गत बिलासपुर क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र और मुंबई स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के वैज्ञानिकों ने 10 वर्षों के संयुक्त अनुसंधान के बाद गेहूं की उन्नत किस्म ‘सीजी 1047’ (CG 1047) तैयार की है। इसे ‘छत्तीसगढ़ ट्रॉम्बे कुमुद’ के नाम से नई आधिकारिक पहचान दी गई है।
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ट्रॉम्बे में गेहूं की सूक्ष्म विशेषताओं का गहन परीक्षण करने के बाद प्रमाणित किया गया है कि यह किस्म कुपोषण से लड़ने के साथ-साथ कम सिंचाई वाले क्षेत्रों के किसानों के लिए वरदान साबित होगी।
पोषण का पावरहाउस: भरपूर आयरन, जिंक और प्रोटीन
यह एक बायोफोर्टिफाइड किस्म है, जिसका अर्थ है कि इसमें सामान्य गेहूं की तुलना में प्राकृतिक रूप से पोषक तत्वों की मात्रा काफी अधिक है:
- प्रोटीन: 12 प्रतिशत से अधिक
- आयरन (लोहा): 41.7 पीपीएम (PPM)
- जिंक (जस्ता): 41.7 पीपीएम (PPM)
आयरन और जिंक की उच्च मात्रा शरीर में खून की कमी (एनीमिया) और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में बेहद मददगार है।
चपाती और बेकिंग क्वालिटी में अव्वल
इस गेहूं की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहतरीन बेकिंग और चपाती बनाने की गुणवत्ता है:
- चपाती मेकिंग स्कोर: 10 में से 8 अंक मिले हैं, जिससे इसकी रोटियां काफी समय तक मुलायम और स्वादिष्ट बनी रहती हैं।
- बिस्किट स्प्रेडिंग फैक्टर: 10 में से 8.7 स्कोर दर्ज हुआ है, जिसके चलते यह बेकरी व बिस्किट उद्योग के लिए भी सबसे उपयुक्त मानी जा रही है।
कम पानी में बंपर पैदावार: फसल गिरने का खतरा नहीं
- सिंचाई की कम जरूरत: यह किस्म केवल 2 से 3 सिंचाई वाले सीमित जल संसाधनों में भी बेहतरीन परिणाम देती है।
- उत्पादकता: इसकी औसत उत्पादन क्षमता लगभग 36.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है।
- मजबूत तना: पौधे की औसत ऊंचाई 85 से 90 सेंटीमीटर है। मध्यम ऊंचाई होने के कारण तेज हवा या आंधी में फसल के गिरने (Lodging) का जोखिम नहीं रहता।
- दाने व पकने का समय: 1000 दानों का वजन करीब 41.5 ग्राम है। दानों का रंग आकर्षक अम्बर (गेहुआं) है और यह फसल मात्र 107 से 110 दिनों में पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है।
किन राज्यों के लिए सबसे उपयुक्त?
परीक्षणों के आधार पर यह किस्म महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक के कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए अत्यधिक उपयुक्त पाई गई है। साथ ही छत्तीसगढ़ के किसान भी इसकी खेती कर कम लागत में बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।
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