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कंपनियों की मनमानी पर लगाम: अब 7 साल तक मिलेगा स्पेयर पार्ट्स और सॉफ्टवेयर सपोर्ट, पुराने फोन जानबूझकर ‘स्लो’ करने का खेल खत्म!

यूरोप में स्मार्टफोन कंपनियों के लिए फरवरी 2027 से लागू होंगे 'इकोडिजाइन' के कड़े नियम; क्या भारत में भी होनी चाहिए ऐसी ही सख्ती?

स्मार्टफोन कंपनियों की तानाशाही होगी खत्म! यूरोप में नए नियम लागू—अब 7 साल तक मिलेंगे मोबाइल पार्ट्स और सॉफ्टवेयर अपडेट। कंपनियां अब पुराने फोन को जानबूझकर स्लो नहीं कर पाएंगी। क्या भारत में भी चाहिए ऐसा कानून? देखिए TAP NEWS की विशेष रिपोर्ट।

​नई दिल्ली ब्यूरो चीफ सतबीर जांडली (TAP NEWS / THE ASIA PRIME): क्या आपने महसूस किया है कि जो स्मार्टफोन खरीदते समय बिजली की तरह तेज चलता था, वह 2-3 साल बीतते-बीतते हांफने लगता है? बैटरी जल्दी खत्म होने लगती है, ऐप्स हैंग होते हैं और आप मजबूर होकर नया फोन खरीद लेते हैं। यूरोपीय संघ (EU) का मानना है कि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि कंपनियों की एक सोची-समझी साजिश (Planned Obsolescence) है। अब इस ‘सिस्टम’ को तोड़ने के लिए यूरोप ने ऐतिहासिक कदम उठाया है, जिसका असर भारतीय मोबाइल बाजार पर भी पड़ना तय है।

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कंपनियों का ‘खतरनाक’ खेल: जानबूझकर धीमा किया जाता है आपका फोन

​साल 2017 में दिग्गज कंपनी एपल (Apple) ने खुद स्वीकार किया था कि वह पुराने आईफोन को सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए जानबूझकर धीमा कर रही थी। कंपनी ने इसे ‘बैटरी प्रोटेक्शन’ का नाम दिया, लेकिन असल में यह ग्राहकों को नया मॉडल खरीदने के लिए मजबूर करने का एक दबाव था। इसी ‘धोखे’ को खत्म करने के लिए अब यूरोप सख्त नियम लेकर आया है।

ईयू के नए ‘इकोडिजाइन’ नियम: क्या बदलेगा?

​यूरोपीय संघ फरवरी 2027 से नए नियम लागू करने जा रहा है। इन नियमों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • 7 साल तक स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई: स्मार्टफोन का मॉडल बंद होने के बाद भी कंपनियों को 7 साल तक उसके स्पेयर पार्ट्स (जैसे स्क्रीन, कैमरा, बैटरी) उपलब्ध कराने होंगे। साथ ही, 5-10 वर्किंग डेज के भीतर इनकी डिलीवरी सुनिश्चित करनी होगी।
  • बैटरी लाइफ पर गारंटी: स्मार्टफोन की बैटरी को कम से कम 800 चार्ज साइकल के बाद भी अपनी 80% क्षमता बनाए रखनी होगी। यानी सालों बाद भी आपका फोन अचानक बंद नहीं होगा।
  • 5 साल तक अनिवार्य अपडेट: कंपनियों को कम से कम 5 साल तक सॉफ्टवेयर और सुरक्षा अपडेट देने होंगे, ताकि पुराने फोन सुरक्षा के मामले में पीछे न रह जाएं।
  • रिपेयर रेटिंग (A से E): अब फोन पर भी फ्रिज-एसी की तरह ‘रिपेयर रेटिंग’ होगी। इससे ग्राहक जान सकेंगे कि फोन खराब होने पर उसे ठीक करना कितना आसान या मुश्किल है।

भारतीय ग्राहकों को कैसे होगा फायदा?

​भले ही ये नियम यूरोप के लिए बनाए गए हैं, लेकिन स्मार्टफोन कंपनियां हर देश के लिए अलग-अलग हार्डवेयर डिजाइन नहीं करतीं। अगर यूरोप के लिए कंपनियां 7 साल तक पार्ट्स देने और बेहतर बैटरी बनाने की व्यवस्था करेंगी, तो उसका सीधा लाभ भारतीय ग्राहकों को भी मिलेगा। भारत में एक बड़ा मध्यम वर्गीय तबका है जो सालों-साल एक ही फोन चलाना चाहता है।

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सस्ता पड़ेगा फोन, होगी भारी बचत

​रिपोर्ट के मुताबिक, नए नियमों से एक औसत स्मार्टफोन की उम्र 3 साल से बढ़कर 4.1 साल हो जाएगी। अनुमान है कि 2030 तक इससे हर परिवार को सालाना करीब 10,700 रुपये (98 यूरो) की बचत होगी।

असली सवाल: भारत में कब होगी ऐसी सख्ती?

​भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है। यहाँ भी कंपनियां रिपेयरिंग के नाम पर ग्राहकों को लूटती हैं। ‘पार्ट पेयरिंग’ जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर कंपनियों ने रिपेयर पर पूरा कंट्रोल कर लिया है। अब समय आ गया है कि भारत सरकार भी ‘राइट टू रिपेयर’ (Right to Repair) कानून को और सख्त करे ताकि मोबाइल कंपनियों की इस ‘डिजिटल तानाशाही’ को खत्म किया जा सके।

अब तक कंपनियां तय करती थीं कि आपका फोन कब ‘डेड’ होगा, लेकिन अब यह ताकत उपभोक्ता के हाथ में आने वाली है। यह लड़ाई सिर्फ बैटरी या स्क्रीन की नहीं, बल्कि उपभोक्ता के अधिकारों की है।

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