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चंडीगढ़ : मेडिकल साइंस में पीजीआई चंडीगढ़ का बड़ा धमाका: अब सिर्फ एक ‘जादुई’ इंजेक्शन से खत्म होगा वर्षों पुराना कमर घुटनों और जोड़ों का दर्द!

ऑर्थो और न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग की संयुक्त रिसर्च में 85% सफलता; स्पोर्ट्स इंजरी और बिस्तर पर पड़े मरीजों के लिए वरदान साबित होगी यह नई तकनीक।

पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों की बड़ी खोज! पुराने कमर दर्द और स्पोर्ट्स इंजरी के लिए तैयार किया विशेष इंजेक्शन। 85% मरीज हुए पूरी तरह ठीक।

चंडीगढ़ : ​ब्यूरो चीफ: सतबीर जांडली (The Asia Prime / TAP News) : चिकित्सा के क्षेत्र में उत्तर भारत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान PGI चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने एक ऐसी ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है, जो करोड़ों लोगों के जीवन से दर्द का अंधेरा मिटा सकती है। यदि आप या आपके परिचित लंबे समय से कमर दर्द, घुटनों के दर्द, हड्डियों की कमजोरी या किसी पुरानी स्पोर्ट्स इंजरी से परेशान हैं और तमाम दवाओं के बाद भी आराम नहीं मिल रहा, तो अब घबराने की जरूरत नहीं है। पीजीआई के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा विशेष इंजेक्शन तैयार किया है, जो पुराने से पुराने दर्द को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखता है।

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दो विभागों की जुगलबंदी ने रचा इतिहास

​यह बड़ी कामयाबी पीजीआई के ऑर्थोपेडिक (हड्डी रोग) विभाग और न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग की संयुक्त रिसर्च का परिणाम है। डॉक्टरों की इस टीम ने वर्षों तक गहन शोध के बाद एक ऐसी थेरेपी विकसित की है, जो सीधे दर्द वाले हिस्से के सेल्स पर जाकर काम करती है। आमतौर पर पुराने दर्द के लिए सर्जरी को ही अंतिम रास्ता माना जाता था, लेकिन इस रिसर्च ने साबित कर दिया है कि बिना चीर-फाड़ के भी गंभीर से गंभीर मामलों को ठीक किया जा सकता है।

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85 प्रतिशत मरीजों पर सफल रहा ट्रायल

​इस रिसर्च की सबसे खास बात यह है कि इसका परीक्षण केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा। डॉक्टरों ने इस तकनीक को 85 प्रतिशत मरीजों पर सफलतापूर्वक अप्लाई किया है।

  • चमत्कारी परिणाम: इस ट्रायल में उन मरीजों को शामिल किया गया था जो लंबे समय से बिस्तर पर थे या बिना सहारे के चल भी नहीं पाते थे।
  • बिस्तर से उठे मरीज: इंजेक्शन लगने के कुछ समय बाद ही इन मरीजों की स्थिति में क्रांतिकारी सुधार देखा गया और वे अब अपनी सामान्य दिनचर्या में वापस लौट चुके हैं।

किन-किन बीमारियों में कारगर है यह इंजेक्शन?

​पीजीआई की यह रिसर्च कई तरह की शारीरिक समस्याओं के लिए ‘रामबाण’ मानी जा रही है:

  1. क्रोनिक बैक पेन (पुराना कमर दर्द): रीढ़ की हड्डी के पास होने वाले असहनीय दर्द में यह तुरंत राहत देता है।
  2. जोड़ों का दर्द (Joint Pain): घुटनों, कंधों और कूल्हों के दर्द से जूझ रहे बुजुर्गों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है।
  3. स्पोर्ट्स इंजरी: खिलाड़ियों को अक्सर लिगामेंट या मांसपेशियों में ऐसी चोटें आती हैं जो सालों तक पीछा नहीं छोड़तीं, यह इंजेक्शन उन्हें फिर से मैदान पर उतारने की ताकत रखता है।
  4. हड्डियों का पुराना दर्द: ऑस्टियोपोरोसिस या अन्य कारणों से हड्डियों में होने वाले गहरे दर्द को यह सोख लेता है।
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कैसे काम करती है यह तकनीक?

​न्यूक्लियर मेडिसिन के विशेषज्ञों के अनुसार, इस इंजेक्शन में विशेष रेडियोधर्मी कणों या औषधियों का उपयोग एक निश्चित मात्रा में किया जाता है, जो शरीर के प्रभावित हिस्से में जाकर सूजन और दर्द पैदा करने वाले कारकों को निष्क्रिय कर देते हैं। यह तकनीक सुरक्षित है और इसके साइड इफेक्ट्स न के बराबर पाए गए हैं।

​भारत जैसे देश में जहाँ एक बड़ी आबादी जोड़ों और कमर के दर्द से जूझ रही है, वहां पीजीआई चंडीगढ़ की यह उपलब्धि स्वास्थ्य क्षेत्र में नई क्रांति लेकर आएगी। अक्सर लोग दर्द निवारक गोलियां (Pain Killers) खा-खाकर अपनी किडनी खराब कर लेते हैं, ऐसे में यह ‘सिंगल शॉट’ इलाज न केवल सस्ता होगा बल्कि जीवन की गुणवत्ता को भी सुधार देगा। केंद्र सरकार को चाहिए कि इस रिसर्च को जल्द से जल्द देश के अन्य सरकारी अस्पतालों तक भी पहुँचाए।

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