मंडी किसानों की है, आपकी जागीर नहीं”: महिला अधिकारी ने आढ़तियों को जमकर लताड़ा, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
नकली खाद-बीज बेचने वालों को चेतावनी: "कार्रवाई की तो नेताओं के पीछे मत भागना, मैं अपनी मेहनत की रोटी खाती हूं"

हनुमानगढ़ मंडी में महिला अधिकारी का रौद्र रूप! आढ़तियों ने जब किसानों को रोकने की कोशिश की, तो अधिकारी ने लगा दी क्लास। बोलीं- “नकली खाद-बीज बेचने वाले हमें न सिखाएं, किसान का हक सबसे पहले है।” देखिए TAP NEWS की यह विशेष ग्राउंड रिपोर्ट।
हनुमानगढ़ ब्यूरो चीफ सतबीर जांडली (TAP NEWS / THE ASIA PRIME): राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले से प्रशासन और आढ़तियों के बीच तीखी बहस का एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। रबी सीजन के दौरान गेहूं की सरकारी खरीद और मंडियों में भीड़ के प्रबंधन को लेकर हुई एक बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों के तेवर देख आढ़ती सन्न रह गए। विशेष रूप से महिला अधिकारियों ने जिस तरह से किसानों के हक की बात की, उसकी चर्चा अब हर तरफ हो रही है।
“किसान नशा बेचने नहीं, बच्चों का पेट काटकर दाने बेचने आता है”
बैठक के दौरान जब आढ़तियों ने किसानों के मंडी आने के समय और तरीके पर सवाल उठाए, तो अधिकारियों ने दो-टूक लहजे में कहा कि मंडी पर पहला हक किसान का है। आढ़तियों को फटकार लगाते हुए कहा गया, “आप यह तय करने वाले कोई नहीं होते कि किसान गेहूं लेकर कब आए और कब नहीं। किसान का जब मन करेगा, वह तभी अपनी फसल लेकर आएगा। वह यहाँ कोई नशा बेचने नहीं आता, वह अपने और अपने बच्चों के हिस्से के दाने बेचने आता है। कोई भी किसान शौक से अनाज नहीं बेचता, वह अपने बच्चों का पेट बांधकर दाने मंडी लाता है ताकि घर की अन्य जरूरतें पूरी हो सकें।”
कर्ज और भुगतान पर सुनाई खरी-खरी
आढ़तियों द्वारा किसानों पर बकाया कर्ज का हवाला देने पर अधिकारियों ने और भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “जिस किसान के पैर पकड़ने चाहिए, आप उसके गले पड़ रहे हो। अगर किसान ने आपसे कर्ज लिया भी है, तो आपने उसे एक साथ मोटी रकम नहीं दी थी। उसने 5000-10000 करके अपनी जरूरत के हिसाब से पैसे लिए हैं, तो वह वैसे ही धीरे-धीरे उतारेगा। आप उसे अनाज बेचने से रोकने या परेशान करने का हक नहीं रखते।”
“कार्रवाई हुई तो नेताओं के पास मत भागना”
सबसे प्रभावशाली प्रहार तब हुआ जब महिला अधिकारी ने मंडी में होने वाली धांधलियों और नकली उत्पादों का जिक्र किया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “किसान अपनी मेहनत की कमाई खाता है, आपकी तरह नकली बीज या नकली खाद बेचकर लोगों को ठगता नहीं है। अगर मैंने अपनी ड्यूटी के हिसाब से नियमों के तहत कार्रवाई शुरू कर दी, तो फिर बचने के लिए नेताओं की शरण में मत भागना। मैं किसी से भीख नहीं लेती, अपनी मेहनत की रोटी खाती हूं और अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाना जानती हूं।”
मंडी में व्यवस्था सुधारने के निर्देश
इस तीखी बहस के बाद प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अनाज मंडियों में किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। गेहूं की तुलाई, उठान और भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी आढ़ती ने किसान को परेशान किया या अनाज खरीद में बाधा डाली, तो उसका लाइसेंस रद्द करने जैसी कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
सोशल मीडिया पर मिली वाहवाही
इस घटना का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर आया, किसानों और आम जनता ने प्रशासनिक अधिकारियों की ईमानदारी और बेबाकी की जमकर तारीफ की। लोगों का कहना है कि अगर हर जिले में ऐसे ही निडर अधिकारी हों, तो किसानों का शोषण बंद हो जाएगा।