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जननायक से उप-प्रधानमंत्री तक: ‘ताऊ’ देवीलाल की पुण्यतिथि पर देश कर रहा नमन, जानें उनके संघर्ष की पूरी कहानी

आजादी की लड़ाई से लेकर किसानों की कर्जमाफी तक, 'हरियाणा के निर्माता' की जीवनी जो आज भी है करोड़ों के लिए प्रेरणा।

पूर्व उप-प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल की पुण्यतिथि पर विशेष जीवनी। जानिए कैसे एक साधारण किसान परिवार का बेटा बना देश का ‘किंगमेकर’।

चंडीगढ़/हरियाणा ब्यूरो चीफ: सतबीर जांडली (The Asia Prime / TAP News) : भारतीय राजनीति के ‘भीष्म पितामह’ और किसानों के मसीहा कहे जाने वाले चौधरी देवीलाल की पुण्यतिथि पर आज देशभर में उन्हें याद किया जा रहा है। हरियाणा की मिट्टी से उठकर देश के उप-प्रधानमंत्री पद तक पहुँचने वाले ‘ताऊ’ का जीवन केवल राजनीति नहीं, बल्कि त्याग और संघर्ष की एक अमर गाथा है। आज उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर ‘The Asia Prime’ उनके जीवन और संघर्षों पर विशेष रिपोर्ट पेश कर रहा है।

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1. जन्म और शुरुआती संघर्ष (1914 – आजादी तक)

​चौधरी देवीलाल का जन्म 25 सितंबर 1914 को अविभाजित पंजाब (अब हरियाणा) के सिरसा जिले के गांव चौटाला में हुआ था। उनके पिता चौधरी लेखराम एक समृद्ध जमींदार थे, लेकिन देवीलाल का मन सुख-सुविधाओं के बजाय देश की आजादी में रमा।

  • जेल यात्रा: मात्र 16 साल की उम्र में वे महात्मा गांधी के आह्वान पर ‘नमक सत्याग्रह’ से जुड़ गए और उन्हें एक साल की जेल हुई।
  • 1942 का आंदोलन: ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई और फिर से जेल गए। उन्होंने अपना पूरा युवावस्था देश को अंग्रेजों से आजाद कराने में लगा दी।

2. हरियाणा राज्य का उदय और राजनीतिक सफर

​आजादी के बाद देवीलाल ने महसूस किया कि किसानों और मजदूरों की आवाज दब रही है। उन्होंने अलग हरियाणा राज्य की मांग को लेकर ‘हरियाणा संघर्ष समिति’ का नेतृत्व किया। 1966 में जब हरियाणा बना, तो उन्होंने इसे विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया।

3. ‘किंगमेकर’ और उप-प्रधानमंत्री का पद

​1989 के लोकसभा चुनाव में चौधरी देवीलाल राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र बिंदु बन गए। उन्होंने विपक्षी दलों को एकजुट किया और ‘जनता दल’ की सरकार बनवाई।

  • त्याग की मिसाल: उनके पास प्रधानमंत्री बनने का स्पष्ट मौका था, लेकिन उन्होंने बड़े दिल का परिचय देते हुए वी.पी. सिंह को प्रधानमंत्री की कुर्सी सौंपी और खुद उप-प्रधानमंत्री बनना स्वीकार किया। राजनीति के इतिहास में उन्हें इसी कारण ‘किंगमेकर’ कहा जाता है।

4. ‘ताऊ’ का संबोधन और जन-जुड़ाव

​उन्हें जनता प्यार से ‘ताऊ’ कहती थी। वे एकमात्र ऐसे नेता थे जो खाट पर बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनते थे। उनका नारा था— “लोकराज लोकलाज से चलता है”। उन्होंने हमेशा सादगी को प्राथमिकता दी और कभी भी सत्ता के अहंकार को खुद पर हावी नहीं होने दिया।

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5. आधुनिक हरियाणा के निर्माता

​चौधरी देवीलाल को आधुनिक हरियाणा का शिल्पकार माना जाता है। उन्होंने राज्य में सड़कों का जाल बिछाने, सिंचाई के लिए नहरों का निर्माण और बिजली आपूर्ति को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाई। 6 अप्रैल 2001 को इस महान जननायक ने अंतिम सांस ली, लेकिन उनके विचार आज भी हर किसान के दिल में जिंदा हैं।

​चौधरी देवीलाल महज एक नाम नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे। आज के दौर में जब राजनीति अक्सर स्वार्थ पर आधारित होती है, ताऊ देवीलाल का ‘त्याग’ और ‘किसानों के प्रति समर्पण’ एक मिसाल है। उन्होंने सिखाया कि असली नेता वही है जिसकी जड़ें जमीन से जुड़ी हों और जिसका दरवाजा हर गरीब के लिए हमेशा खुला रहे।

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