“दूध का कर्ज उतारो रे!” : जाटों से तो मांग ली माफी, अब ‘झोटा समाज’ हुआ आगबबूला; नवीन जयहिंद ने भाला उठाकर संभाला मोर्चा
बिजली विभाग के SE के बयान पर मचा 'पशुलोक' में हड़कंप; झोटा बोला- "मेरी लुगाई (भैंस) का दूध पीकर तगड़े हुए और अब मुझे ही लट्ठ?"

हरियाणा में ‘झोटा समाज’ ने खोला मोर्चा! SE गीतू राम के ‘लट्ठ’ वाले बयान पर नवीन जयहिंद ने झोटे की सवारी कर मांगा इंसाफ। देखिए यह मजेदार रिपोर्ट।
रोहतक/सोनीपत (TAP News/The Asia Prime): हरियाणा की राजनीति में आए दिन नए-नए सियासी घमासान देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार मामला ‘इंसानों’ से निकलकर ‘झोटा समाज’ (Bulls/Buffaloes) तक पहुंच गया है। बिजली विभाग के सस्पेंड हुए SE गीतू राम के उस बयान ने, जिसमें उन्होंने “जाट और झोटा देखते ही लट्ठ मारने” की बात कही थी, अब एक नया मोड़ ले लिया है।
“जाटों की तो सुनवाई हो गई, मेरा क्या?”
खबर है कि आज सुबह ‘झोटा समाज’ के प्रधान खुद नवीन जयहिंद के दरबार में जा पहुंचे। झोटा भाईसाहब काफी गुस्से में थे और बोले- “दादा, ये तो सरासर भेदभाव है! लट्ठ मारने की बात जाट और झोटे दोनों के लिए कही गई थी। जाटों ने तो अपनी हनक दिखा दी और SE साहब से सरेआम माफी मंगवा ली, लेकिन मेरे को तो लट्ठ भी पड़े और माफी का एक शब्द भी नहीं नसीब हुआ।”
दूध का कर्ज और लुगाई का अपमान
झोटा प्रधान ने भावुक होते हुए कहा कि पूरा हरियाणा उनकी लुगाई (भैंस) का दूध पीकर ‘दूध-दही का खाना’ वाले नारे बुलंद करता है। झोटा बोला- “मैं बोझ भी ढोऊं, बुग्गी में भी जुडूं और दूध का इंतजाम भी मेरी ही फैमिली करे, और बदले में मुझे लट्ठ? कोई तो इस दूध का कर्ज उतारो! अगर अब भी कोई आवाज नहीं उठाएगा, तो हरियाणा में दूध-घी का संकट खड़ा कर दूंगा।”
नवीन जयहिंद का ‘भाला’ अवतार
जब झोटे ने गुस्से में आकर नवीन जयहिंद से कहा- “तू ज्यादा बातें मत फोड़, सीधा मेरे ऊपर बैठ और चल इंसाफ दिलाने”, तो जयहिंद भी पीछे नहीं हटे। सोशल मीडिया पर एक अजीब और ‘मजाक’ टाइप फोटो वायरल हो रही है, जिसमें नवीन जयहिंद हाथ में भाला लिए झोटे पर सवार नजर आ रहे हैं। जयहिंद ने साफ संदेश दिया है कि झोटा समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तंवर साहब को भी दी सलाह
गीतू तंवर और अन्य नेताओं को भी सलाह दी गई है कि झोटे की नाराजगी दूर करना बहुत जरूरी है। आखिर झोटा तो सबका ‘साझा’ (Shared) होता है। सबने उसका दूध पिया है और अहसान फरामोशी ठीक नहीं है।
कहते हैं ‘भैंस के आगे बीन बजाना’ बेकार है, लेकिन यहाँ तो ‘झोटे’ ने ही बीन बजानी शुरू कर दी है। SE साहब का एक बयान उन्हें कुर्सी से तो ले ही डूबा, अब पशुलोक में भी उनकी एंट्री बैन होने की कगार पर है। झोटा समाज की मांग जायज है—अगर माफी जाटों से मांगी है, तो झोटों से भी मांगे ओर ‘स्पेशल चारे’ की घोषणा भी होनी ही चाहिए!