राज्यसभा में गूंजी डाक कर्मचारियों की पीड़ा: सांसद सुभाष बराला ने उठाई ‘होम स्टेट’ पोस्टिंग की मांग
दूर-दराज के राज्यों में जॉइनिंग से परेशान युवा कर्मचारियों के हक में उतरे बराला; कहा- "भाषा और दूरी बनी बड़ी बाधा, अपने राज्य में मिले तैनाती।"

राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने डाक कर्मचारियों की दूरस्थ पोस्टिंग का मुद्दा संसद में उठाया। होम स्टेट पोस्टिंग की मांग से युवाओं में जगी उम्मीद।
नई दिल्ली/ ब्यूरो चीफ: सतबीर जांडली (The Asia Prime / TAP News) : हरियाणा के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने संसद के उच्च सदन में देश के हजारों युवा डाक कर्मचारियों की एक ज्वलंत समस्या को प्रमुखता से उठाया है। बराला ने राज्यसभा में शून्यकाल (Zero Hour) के दौरान सरकार का ध्यान उस नीति की ओर खींचा, जिसके तहत डाक विभाग (India Post) में नवनियुक्त कर्मचारियों को उनके गृह राज्य (Home State) से सैकड़ों-हजारों किलोमीटर दूर दूसरे राज्यों में तैनात किया जा रहा है।
सांसद सुभाष बराला ने क्या कहा?
सांसद बराला ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि डाक विभाग में भर्ती होने वाले अधिकांश युवा साधारण परिवारों से आते हैं। वर्तमान भर्ती प्रक्रिया के कारण उत्तर भारतीय राज्यों के युवाओं को सुदूर दक्षिण या उत्तर-पूर्वी राज्यों में जॉइनिंग दी जा रही है। उन्होंने तर्क दिया कि इससे न केवल कर्मचारियों को मानसिक और आर्थिक तनाव होता है, बल्कि विभाग की कार्यक्षमता पर भी असर पड़ता है।
बराला द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु:
- भाषा की दीवार: डाक विभाग का काम सीधे जनता से जुड़ा होता है। जब किसी उत्तर भारतीय कर्मचारी को ऐसे राज्य में भेजा जाता है जहाँ की स्थानीय भाषा उसे नहीं आती, तो वह ग्रामीण जनता की समस्याओं को समझ नहीं पाता।
- आर्थिक बोझ: कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए दूसरे राज्य में घर किराए पर लेना और परिवार से दूर रहना एक बड़ी वित्तीय चुनौती है।
- सामाजिक समस्याएं: अपने बुजुर्ग माता-पिता और परिवार से दूर रहने के कारण युवा कर्मचारी सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं।
- जमीन के टुकड़े के लिए खूनी जंग: सगे भाइयों में चली अंधाधुंध गोलियां; ट्रैक्टर से रौंदा, लाठियों से पीटा— 2 की मौत, 12 घायल
“होम स्टेट” पोस्टिंग ही एकमात्र समाधान
सुभाष बराला ने मांग की कि सरकार को डाक विभाग की स्थानांतरण और नियुक्ति नीति (Posting Policy) में बदलाव करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि:
- मेरिट और वरीयता के आधार पर नवनियुक्त कर्मचारियों को उनके गृह राज्य (Home State) या पड़ोसी राज्य में ही तैनाती दी जाए।
- जो कर्मचारी वर्तमान में दूर-दराज के राज्यों में कार्यरत हैं, उन्हें एकमुश्त स्थानांतरण (One-time Transfer) का विकल्प देकर उनके घर के नजदीक लाया जाए।
युवाओं में भारी उत्साह, बराला का जताया आभार
सांसद सुभाष बराला के इस कदम की सोशल मीडिया और कर्मचारी यूनियनों के बीच जमकर सराहना हो रही है। विशेषकर हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के उन हजारों युवाओं ने खुशी जाहिर की है जो वर्तमान में दक्षिण भारत के राज्यों में डाक विभाग में सेवाएं दे रहे हैं और लंबे समय से ‘घर वापसी’ की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
डाक विभाग जैसे सार्वजनिक सेवा क्षेत्र में स्थानीय भाषा और स्थानीय भूगोल का ज्ञान होना अनिवार्य है। सांसद सुभाष बराला ने एक बहुत ही व्यावहारिक मुद्दा उठाया है। यदि कर्मचारी अपने घर के पास रहेगा, तो वह अधिक निष्ठा और ऊर्जा के साथ काम कर सकेगा। सरकार को चाहिए कि वह तकनीक और डेटा का उपयोग कर ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे रिक्त पदों को स्थानीय प्रतिभाओं से भरा जा सके या मौजूदा कर्मचारियों को उनके गृह क्षेत्र में समायोजित किया जा सके।