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पंचकूला में ट्रेनी पटवारियों का हल्ला बोल: ₹300 दिहाड़ी पर काम का विरोध; बोले- “CM साहब! घोषणा का नोटिफिकेशन कहाँ है?”

सेक्टर-5 में अनिश्चितकालीन धरना शुरू; ट्रेनिंग अवधि बढ़ाने से भड़के पटवारी। चेतावनी— "अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो ठप करेंगे प्रदेश का राजस्व कार्य।"

पंचकूला के सेक्टर-5 में ट्रेनी पटवारियों का अनिश्चितकालीन धरना। स्टाइपेंड बढ़ाने और ट्रेनिंग अवधि कम करने की मांग। सीएम की घोषणा के बावजूद नोटिफिकेशन न होने पर रोष।

पंचकूला/ब्यूरो रिपोर्ट  ब्यूरो चीफ: सतबीर जांडली (The Asia Prime / TAP News) : हरियाणा के पंचकूला में प्रदेश भर से जुटे अंडर-ट्रेनिंग पटवारियों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। सेक्टर-5 स्थित धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू करते हुए पटवारियों ने नायब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पटवारियों का आरोप है कि सरकार ने एक साल के ट्रेनिंग पीरियड के वादे को भुलाकर इसे जबरन जुलाई तक बढ़ा दिया है, जो उनके साथ सरासर अन्याय है।

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₹10,000 स्टाइपेंड और 14 महीने का संघर्ष

​प्रदर्शनकारी पटवारियों का कहना है कि वे पिछले 14 महीनों से केवल ₹10,000 प्रति माह (करीब ₹333 प्रतिदिन) के स्टाइपेंड पर काम कर रहे हैं।

  • न्यूनतम मजदूरी से भी कम: पटवारियों ने तर्क दिया कि आज के दौर में ₹300 प्रतिदिन में गुजारा करना नामुमकिन है।
  • सुविधाओं का अभाव: इतने कम वेतन के बावजूद उन्हें किसी भी प्रकार की मेडिक्लेम या अन्य सरकारी सुविधा नहीं दी जा रही है।

CM की घोषणा बनाम जमीनी हकीकत

​झज्जर सर्कल से पहुंचे पटवारी नीतिश ने बताया कि 7 जनवरी 2025 को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खुद घोषणा की थी कि पटवारियों की ट्रेनिंग अवधि घटाकर 1 वर्ष की जाएगी और इस दौरान उन्हें पूर्ण वेतन दिया जाएगा। साथ ही, इस अवधि को उनकी सर्विस में भी काउंट किया जाएगा।

प्रमुख मांगें जिन पर अड़े हैं पटवारी:

  1. एक वर्ष की ट्रेनिंग: सीएम की घोषणा के अनुसार ट्रेनिंग पीरियड को 1 वर्ष तक सीमित किया जाए।
  2. पूर्ण वेतनमान: ट्रेनिंग के दौरान स्टाइपेंड की जगह पूरा वेतन दिया जाए।
  3. सर्विस काउंट: ट्रेनिंग अवधि को नियमित सेवा (Service Period) का हिस्सा माना जाए।
  4. मेडिक्लेम सुविधा: ऑन-ड्यूटी सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाए।

“नोटिफिकेशन नहीं, तो काम नहीं”

​पटवारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे जल्द ही निदेशक भू-अभिलेख से मुलाकात कर अपनी मांगें रखेंगे। यदि एक निश्चित समय सीमा के भीतर सरकार ने नोटिफिकेशन जारी नहीं किया, तो प्रदेश भर के ट्रेनी पटवारी पूर्ण हड़ताल पर चले जाएंगे। इससे प्रदेश के राजस्व विभाग के कार्यों पर बुरा असर पड़ सकता है।

​पटवारी किसी भी सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि शिक्षित युवाओं को ₹300 प्रतिदिन जैसी मामूली राशि पर काम करने के लिए मजबूर किया जाएगा, तो उनका मनोबल गिरना लाजमी है। मुख्यमंत्री नायब सैनी की घोषणाओं के बावजूद नोटिफिकेशन में देरी प्रशासनिक सुस्ती का बड़ा उदाहरण है। सरकार को चाहिए कि वह पटवारियों की जायज मांगों पर तुरंत ध्यान दे ताकि प्रदेश की जनता को राजस्व संबंधी कार्यों में परेशानी न हो।

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