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चंडीगढ़ : हरियाणा कांग्रेस की ‘होटल पॉलिटिक्स’: ऐश भी चाहिए, कैश भी चाहिए! जनता ‘बोन्दू’, नेताजी ‘ट्रेनिंग’ के बहाने 5-स्टार में गुलछर्रे

शर्मनाक! भ्रष्टाचार मिटाने की कसमें खाने वाले विधायक 'खरीद-फरोख्त' के डर से हिमाचल के पहाड़ों में कैद; जनता के मुद्दों पर जो कभी एक साथ नहीं दिखे, वे आज 'सुरक्षा' के नाम पर साथ हैं।

हरियाणा कांग्रेस विधायकों की हिमाचल के 5-स्टार होटल में ‘कैद’। ट्रेनिंग के नाम पर सफेद झूठ और जनता के साथ धोखा। ‘The Asia Prime’ की विशेष रिपोर्ट।

चंडीगढ़/शिमला :ब्यूरो चीफ: सतबीर जांडली (The Asia Prime / TAP News) हरियाणा की राजनीति में इस वक्त एक नया तमाशा चल रहा है। वह कांग्रेस, जो कल तक ईमानदारी और पारदर्शिता के भाषण झाड़ रही थी, आज अपने ही विधायकों को ‘चोरों’ की तरह छुपाकर हिमाचल प्रदेश के 5-स्टार होटलों में ले गई है। वजह बताई जा रही है— ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ (खरीद-फरोख्त) का डर। लेकिन जनता पूछ रही है कि क्या इन ‘जनता के नुमाइंदों’ को खुद पर और अपनी पार्टी की विचारधारा पर इतना भी भरोसा नहीं कि वे बिना ‘होटल कैद’ के ईमानदार रह सकें?

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जनता के लिए धरना नहीं, अपनी सुरक्षा के लिए एकजुटता

​यह देख कर हैरानी होती है कि हरियाणा में पिछले सालों में कितने बड़े-बड़े आंदोलन हुए, सड़कों पर लाठियां चलीं, किसानों और बेरोजगारों ने प्रदर्शन किए, लेकिन तब कांग्रेस के ये विधायक कभी एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर सड़कों पर नजर नहीं आए।

‘ट्रेनिंग’ के नाम पर सफेद झूठ!

​जब मीडिया ने इन विधायकों से पूछा कि भाई साहब, बोरिया-बिस्तर बांधकर कहां की तैयारी है? तो जवाब मिला— “हम तो ट्रेनिंग के लिए जा रहे हैं।” हैरानी की बात तो यह है कि इन ‘माननीयों’ को यह तक नहीं पता कि ट्रेनिंग कहां होनी है और कौन देने वाला है। बस, भागकर बस में चढ़ गए और ‘खिड़की वाली सीट’ पकड़ ली। क्या भ्रष्टाचार मिटाने और ईमानदारी का पाठ पढ़ाने की ट्रेनिंग किसी आलीशान रिसॉर्ट के बंद कमरों में ही दी जा सकती है?

लीडरशिप फेल या डर का माहौल?

​हरियाणा कांग्रेस की हालत इस वक्त ऐसी है कि उनकी लीडरशिप को खुद नहीं पता कि उनके विधायक किसके पाले में जा गिरेंगे। विधायकों को इस तरह छुपाकर रखना यह साबित करता है कि पार्टी के भीतर गहरा अविश्वास है। जनता को ‘बोन्दू’ समझने वाले ये नेता शायद भूल रहे हैं कि लोग सब देख रहे हैं।

भ्रष्टाचार मिटाएंगे या खुद ‘बिकने’ से बचेंगे?

​बड़ा सवाल यह है कि जो विधायक खुद को ‘बिकाऊ’ मानकर होटल में बंद होने को तैयार हैं, वे कल को भ्रष्टाचार मिटाने के लिए कानून कैसे बनाएंगे? क्या ये वही लोग हैं जो ईमानदारी के लंबे-चौड़े भाषण झाड़ते हैं?

जनता का गुस्सा वाजिब है— उन्हें ऐश भी चाहिए और कैश भी चाहिए, बस नहीं चाहिए तो जनता की सेवा के लिए सड़कों पर संघर्ष।

​लोकतंत्र के लिए यह काला अध्याय है जब जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को भेड़-बकरियों की तरह हांककर दूसरे राज्यों के रिसॉर्ट में ले जाया जाता है। यह ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ केवल कांग्रेस की कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की विफलता है। अगर नेताजी इतने ही ईमानदार हैं, तो उन्हें खुलेआम जनता के बीच रहना चाहिए, न कि हिमाचल के पहाड़ों में छिपकर ‘ट्रेनिंग’ का नाटक करना चाहिए।

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