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संसद में गूंजी आदिवासियों की आवाज: डॉ. संदीप पाठक ने माइनिंग और भूमि अधिग्रहण पर सरकार को घेरा; आजीविका संकट पर जताई चिंता

आदिवासी क्षेत्रों में विकास के नाम पर विनाश बर्दाश्त नहीं!"— शून्यकाल के दौरान आप सांसद ने उठाए आदिवासियों के विस्थापन और अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल।

राज्यसभा सांसद डॉ. संदीप पाठक ने संसद में आदिवासियों के भूमि अधिग्रहण और माइनिंग से होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाया। आजीविका संकट और विस्थापन पर सरकार से पूछे तीखे सवाल।

नई दिल्ली/ब्यूरो चीफ: सतबीर जांडली (The Asia Prime / TAP News) : संसद के चालू सत्र के दौरान आज आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद डॉ. संदीप पाठक ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में माइनिंग (खनन) और उससे उत्पन्न होने वाले संकटों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। शून्यकाल (Zero Hour) के दौरान डॉ. पाठक ने सरकार का ध्यान उन लाखों आदिवासियों की ओर आकर्षित किया जिनकी जमीनें माइनिंग प्रोजेक्ट्स के लिए अधिग्रहित की जा रही हैं, लेकिन बदले में उन्हें केवल ‘विस्थापन’ और ‘बेरोजगारी’ मिल रही है।

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माइनिंग बनाम आदिवासी अधिकार: डॉ. पाठक के तर्क

डॉ. संदीप पाठक ने सदन में कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन तो तेजी से हो रहा है, लेकिन वहां के मूल निवासियों के अधिकारों को कुचला जा रहा है। उनके भाषण के मुख्य बिंदु रहे:

  1. जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया: डॉ. पाठक ने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में नियमों को ताक पर रखकर जबरन भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे आदिवासी अपनी पैतृक जमीन से बेदखल हो रहे हैं।
  2. आजीविका का संकट: माइनिंग के कारण जंगल और जमीन नष्ट हो रहे हैं। आदिवासी समाज, जो पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर है, आज दाने-दाने को मोहताज हो रहा है। विकास का लाभ उन तक नहीं पहुंच रहा।
  3. पेसा (PESA) कानून का उल्लंघन: उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ग्राम सभाओं की सहमति ली जा रही है? संवैधानिक प्रावधानों के बावजूद आदिवासियों की आवाज को दबाया जा रहा है।
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संसद में सरकार से तीखे सवाल

​सांसद पाठक ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा कि आदिवासियों के पुनर्वास (Rehabilitation) के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा, “हमें कोयला और खनिज चाहिए, लेकिन इसकी कीमत आदिवासियों की जिंदगी और संस्कृति को उजाड़ कर नहीं चुकाई जा सकती।” उन्होंने मांग की कि माइनिंग प्रोजेक्ट्स में स्थानीय आदिवासियों को सीधे तौर पर हिस्सेदार बनाया जाए और उनकी शिक्षा व स्वास्थ्य पर माइनिंग रॉयल्टी का बड़ा हिस्सा खर्च हो।

आम आदमी पार्टी का स्टैंड

अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी लगातार ‘जल-जंगल-जमीन’ के अधिकारों की बात करती रही है। डॉ. संदीप पाठक का संसद में यह आक्रामक रुख छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे आदिवासी बहुल राज्यों में पार्टी की सक्रियता और आदिवासियों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

डॉ. संदीप पाठक द्वारा उठाया गया यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय है। विकास की अंधी दौड़ में यदि देश के मूल निवासियों को ही हाशिए पर धकेल दिया जाएगा, तो ऐसा विकास समावेशी नहीं हो सकता। संसद में इस आवाज का उठना जरूरी था ताकि सरकार अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करे।

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