फतेहाबाद:भुना में आज से फाइनेंस दफ्तर और दुकान के बाहर ‘किसान यूनियन’ का घेरा, किसान के साथ ‘फाइनेंस’ के नाम पर बड़ा खेल! iPhone 16 चोरी हुआ तो क्लेम से मुकरी कंपनी;
"प्रीमियम लिया पूरा, क्लेम के वक्त दिखाया ठेंगा! iPhone 16 चोरी होने पर किसान को दर-दर भटका रही बजाज फाइनेंस; कल भुना में होगा आर-पार का संग्राम"

भुना में मोबाइल क्लेम को लेकर किसान और बजाज फाइनेंस आमने-सामने। iPhone 16 चोरी होने पर कंपनी ने क्लेम से किया इनकार। किसान यूनियन आज करेगी घेराव।
भुना/फतेहाबाद: Satbir Jandli (THE ASIA PRIME / TAP News): हरियाणा के भुना खंड में एक बार फिर किसान और कॉर्पोरेट कंपनी के बीच ठन गई है। गाँव दिगोह निवासी किसान सुखविंदर के मोबाइल चोरी होने के बाद बजाज फाइनेंस द्वारा क्लेम देने से इनकार करने पर किसान यूनियन ने मोर्चा खोल दिया है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सोमवार (16 फरवरी) तक किसान को उसके मोबाइल का मुआवजा नहीं मिला, तो चॉइस मोबाइल शॉप और बजाज फाइनेंस के कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
किसान सुखविंदर ने 10 महीने पहले उकलाना रोड स्थित चॉइस मोबाइल शॉप से बजाज फाइनेंस के जरिए एक iPhone 16 खरीदा था। दुर्भाग्यवश, 25 जनवरी 2026 को सफर के दौरान यह मोबाइल चोरी हो गया।
- दुकानदार का पक्ष: चॉइस मोबाइल शॉप के मालिक दीपक नारंग का कहना है कि उन्होंने मोबाइल फाइनेंस कंपनी के जरिए दिया था और उन्हें भुगतान मिल चुका है। अब क्लेम देना या न देना सीधे कंपनी और ग्राहक का मामला है।
- फाइनेंस कंपनी का इनकार: जब किसान बजाज फाइनेंस के दफ्तर पहुँचा, तो अधिकारियों ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि ‘गुम या चोरी‘ हुए मोबाइल का क्लेम पॉलिसी में कवर नहीं होता।
थाने में नहीं बनी बात, अब आंदोलन की तैयारी
शनिवार को इस मामले को लेकर भुना थाने में किसान नेताओं और कंपनी अधिकारियों के बीच लंबी वार्ता हुई, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका। किसान नेताओं का कहना है कि जब मोबाइल फाइनेंस किया गया था, तब बीमा के नाम पर मोटी रकम वसूली गई थी। अब जब मोबाइल चोरी हो गया, तो कंपनी अपनी शर्तों का हवाला देकर पीछे हट रही है।
सच्चाई: कहाँ गुमराह करती हैं बीमा कंपनियाँ? (The Asia Prime Analysis)
बीमा पॉलिसी के तकनीकी पेंच इतने जटिल होते हैं कि आम आदमी उसे समझ नहीं पाता। THE ASIA PRIME ने जब प्रमुख मोबाइल इंश्योरेंस पॉलिसियों का बारीकी से विश्लेषण किया, तो कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए: अक्सर फाइनेंस कंपनियां मोबाइल बेचते समय ‘Full Insurance‘ का झांसा देती हैं, लेकिन उनकी पॉलिसी में बारीक अक्षरों (Fine Print) में ऐसे पेच होते हैं जो ग्राहक को बाद में पता चलते हैं:
- . “Burglary” बनाम “Theft” का खेल: अक्सर पॉलिसियों में लिखा होता है कि ‘Burglary’ (सेंधमारी/जबरन घर में घुसकर चोरी) कवर है, लेकिन ‘Theft’ (सफर के दौरान जेब कट जाना या मोबाइल गिर जाना) कवर नहीं है। कंपनियां अक्सर ‘Theft’ को ‘लापरवाही’ (Negligence) बताकर क्लेम खारिज कर देती हैं।
- इनविजिबल पॉलिसी: मोबाइल खरीदते समय ग्राहक को कभी भी पूरी पॉलिसी बुकलेट नहीं दी जाती, केवल एक छोटा सा सर्टिफिकेट थमा दिया जाता है।
- क्लेम रिजेक्शन का खेल: कंपनियां अक्सर यह शर्त लगाती हैं कि अगर मोबाइल ‘सफर’ के दौरान गुम हुआ है, तो वह कवर नहीं होगा। सवाल यह है कि क्या किसान मोबाइल को तिजोरी में रखने के लिए खरीदता है?
- FIR की शर्त: कई बार पुलिस ‘चोरी’ (FIR Section 379) के बजाय ‘गुमशुदगी’ (Missing Report) लिखती है। बीमा कंपनियां FIR के बिना क्लेम नहीं देतीं, और पुलिस चोरी की रिपोर्ट लिखने में कतराती है।
- हिडन क्लॉज (Hidden Clauses): पॉलिसी लेते समय ग्राहकों को सिर्फ ‘टोटल डैमेज’ और ‘चोरी कवर’ बताया जाता है, लेकिन ‘Exclusions’ (किसे कवर नहीं किया जाएगा) की लिस्ट नहीं दिखाई जाती।
- देरी से सूचना: यदि ग्राहक मोबाइल चोरी होने के 24 से 48 घंटे के भीतर कंपनी को सूचित नहीं करता, तो तकनीकी आधार पर क्लेम रदः कर देती है।
”एक अनपढ़ या सीधा-साधा किसान कंपनी की 50 पन्नों की अंग्रेजी पॉलिसी नहीं पढ़ सकता। यह दुकानदार की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह ग्राहक को सही पॉलिसी बेचे। अगर कंपनी क्लेम नहीं दे रही, तो यह एक संगठित धोखाधड़ी है।”