विशेष रिपोर्ट: रसायनों के दम पर ‘बचपन’ का कत्ल! स्वाति मालीवाल ने सुनाई GB रोड के नर्क की वो दास्ताँ, जिसे सुनकर पत्थर दिल भी रो पड़े
"हवस की मंडी का खौफनाक सच: 9 साल की मासूम को इंजेक्शन देकर बनाया 'जवान'; स्वाति मालीवाल ने बयां किया GB रोड की कोठरियों का रूह कंपा देने वाला मंजर"

स्वाति मालीवाल ने उजागर किया GB रोड का काला सच। ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन देकर 15 साल की बच्ची को बनाया गया 30 साल की औरत। बचपन के कत्ल की रूह कंपा देने वाली कहानी।
नई दिल्ली ब्यूरो (THE AISA PRIME / TAP News): दिल्ली महिला आयोग (DCW) की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने GB रोड की उन अंधेरी कोठरियों का एक ऐसा सच उजागर किया है, जो किसी भी सभ्य समाज के मुंह पर जोरदार तमाचा है। यह कहानी एक 15 साल की उस बच्ची की है, जिसे दरिंदों ने अपनी हवस और लालच की मंडी में ‘मुनाफा’ कमाने के लिए वक्त से पहले रसायनों के जरिए बूढ़ा बना दिया।
9 साल की उम्र में अपहरण, 15 में ‘जवान’ दिखने की मजबूरी
स्वाति मालीवाल बताती हैं कि जब उन्होंने उस बच्ची को देखा, तो वह कागजों पर 15 साल की थी, लेकिन शारीरिक रूप से वह 30 साल की महिला जैसी दिख रही थी। जांच में पता चला कि जब वह सिर्फ 9 साल की मासूम गुड़िया थी, तब उसे अगवा कर इस नर्क में झोंक दिया गया था।
ऑक्सीटोसिन (Oxytocin): दरिंदों का जानलेवा हथियार
उस मासूम को वक्त से पहले जवान दिखाने के लिए उसे हर रोज Oxytocin (ऑक्सीटोसिन) के इंजेक्शन लगाए जाते थे।
- क्यों दिए जाते हैं ये इंजेक्शन? ताकि बच्ची का शरीर कृत्रिम रूप से विकसित हो जाए और ऊँची कीमतों पर उसके जिस्म का सौदा किया जा सके।
- खौफनाक परिणाम: इन इंजेक्शनों ने उस छोटी सी जान के हार्मोन्स को पूरी तरह तबाह कर दिया। 15 साल की उम्र में उसके शरीर की हड्डियां गलने लगी थीं और वह अंदर से किसी बुजुर्ग की तरह बीमार हो चुकी थी।
“दीदी, क्या मेरी माँ मुझे पहचान पाएगी?”
जब उस बच्ची को इस दलदल से निकाला गया, तो उसके शब्द किसी के भी कलेजे को चीर देने के लिए काफी थे। उसने कांपते हुए पूछा— “दीदी, क्या मेरा शरीर वापस पहले जैसा होगा? क्या मेरी माँ मुझे अब पहचान पाएगी?” जिस उम्र में उसे बस्ता लेकर स्कूल जाना था, उस उम्र में उसे असहनीय दर्द वाले इंजेक्शन और नशे की दवाइयां दी गईं।
माफियाओं के खिलाफ जंग का ऐलान
स्वाति मालीवाल ने इस घटना के बाद कसम खाई है कि बचपन का कत्ल करने वाले और इन घातक इंजेक्शनों का काला धंधा करने वाले माफियाओं को वह चैन से नहीं बैठने देंगी। यह केवल एक बच्ची की कहानी नहीं है, बल्कि GB रोड की ऊंची दीवारों के पीछे दफन हजारों ऐसी ‘गुड़ियाओं’ की हकीकत है।
संपादकीय टिप्पणी (Editorial Note)
ऑक्सीटोसिन का ऐसा दुरुपयोग मानवता के खिलाफ अपराध है। यह इंजेक्शन पशुओं में दूध बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन इसे मासूम बच्चों के जिस्म के साथ खिलवाड़ करने के लिए इस्तेमाल करना ‘हैवानियत’ की पराकाष्ठा है। प्रशासन और समाज को मिलकर इस ‘इंजेक्शन माफिया’ की कमर तोड़नी होगी।
THE ASIA PRIME / TAP News की अपील: यदि आप अपने आसपास किसी भी बच्चे के साथ संदिग्ध गतिविधि या तस्करी का अंदेशा देखें, तो तुरंत पुलिस (100) या चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) पर सूचना दें। आपका एक कदम एक मासूम की जिंदगी बचा सकता है।