प्रेम बाईसा केस: SIT का बड़ा खुलासा; मौत से पहले दिए गए थे ‘कई इंजेक्शन’, शक के दायरे में आश्रम का हर शख्स और करोड़ों का बैंक बैलेंस
"साध्वी की मौत या सोची-समझी साजिश? इंजेक्शन देने वाले कंपाउंडर की डिग्री पर शक, SIT खंगाल रही है आश्रम का 'आर्थिक साम्राज्य'; जल्द आएगी PM रिपोर्ट"

प्रेम बाईसा मौत मामले में SIT की बड़ी कार्रवाई। कंपाउंडर देवी सिंह ने कबूला- दिए थे कई इंजेक्शन। बैंक खातों, संपत्ति और सीसीटीवी फुटेज की हो रही है जांच।
जोधपुर/नई दिल्ली (THE ASIA PRIME / TAP News): साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। SIT प्रमुख एसीपी छवि शर्मा के नेतृत्व में चल रही जांच में यह बात सामने आई है कि साध्वी को मौत से पहले केवल एक नहीं, बल्कि कई इंजेक्शन दिए गए थे। इस खुलासे के बाद अब आश्रम से जुड़े हर व्यक्ति पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
कंपाउंडर का कबूलनामा: इंजेक्शनों का ‘खतरनाक’ खेल
SIT की पूछताछ में कंपाउंडर देवी सिंह ने स्वीकार किया है कि उसने साध्वी को एक से अधिक इंजेक्शन दिए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि उसने केवल ‘डेक्सोना’ ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य दवाएं भी शरीर में इंजेक्ट की थीं।
- जांच का केंद्र: पुलिस अब उन इंजेक्शनों की प्रकृति, दवाओं के नाम और उनकी सटीक मात्रा का पता लगा रही है।
- डिग्री पर सवाल: देवी सिंह को धारा 94 के तहत नोटिस जारी कर उसकी नर्सिंग डिग्री और दस्तावेज मांगे गए हैं। पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या वह इंजेक्शन देने के लिए अधिकृत था या नहीं।
आर्थिक एंगल: बैंक खातों और संपत्तियों का ‘जाल’
SIT को अंदेशा है कि इस मौत के पीछे केवल बीमारी नहीं, बल्कि ‘पैसा’ भी एक बड़ा कारण हो सकता है।
- संदिग्ध लेन-देन: आश्रम और उससे जुड़े सभी प्रमुख व्यक्तियों के बैंक खातों की गहन पड़ताल की जा रही है।
- अचल संपत्ति: पुलिस साध्वी के नाम मौजूद चल-अचल संपत्ति और किसी संभावित संपत्ति विवाद के एंगल को भी खंगाल रही है।
- ITR की जांच: आयकर रिटर्न (ITR) और आय के स्रोतों की तुलना खर्चों से की जा रही है ताकि किसी भी तरह की आर्थिक गड़बड़ी पकड़ी जा सके।
- पुरानी पेंशन पर हाईकोर्ट का प्रहार: ‘नेताओं को पेंशन तो फौजियों-कर्मचारियों को क्यों नहीं?’; 25 फरवरी तक सरकार से मांगा जवाब
प्रेक्षा अस्पताल और सोशल मीडिया पर शिकंजा
SIT ने प्रेक्षा अस्पताल को भी नोटिस भेजकर साध्वी के इलाज से जुड़े तमाम कागजात और घटना वाले दिन की CCTV फुटेज तलब की है। पुलिस यह जानना चाहती है कि जब साध्वी को अस्पताल लाया गया, तब उनकी वास्तविक स्थिति क्या थी?
इसके अलावा, डिजिटल फॉरेंसिक जांच के तहत साध्वी के सोशल मीडिया अकाउंट्स और मोबाइल डेटा को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह देख रही है कि उनकी मौत के ठीक पहले या बाद में पोस्ट किसने और किस डिवाइस से किए थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
एसीपी छवि शर्मा के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने में अभी 2 से 3 दिन का समय लग सकता है, जो इस पूरे केस की सबसे अहम कड़ी साबित होगी। यदि विसरा रिपोर्ट में किसी जहरीले पदार्थ या दवाओं के ओवरडोज की पुष्टि होती है, तो यह मामला सीधे तौर पर हत्या की श्रेणी में आ सकता है।
SIT का रुख: “हम किसी भी एंगल को नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं। जरूरत पड़ी तो साध्वी के पिता और आश्रम के बड़े सेवादारों से भी कड़ाई से पूछताछ की जाएगी।”