खतरे में बेटियों का बचपन: 8 साल की उम्र में पीरियड्स और हाथ में गुड़िया; डॉ. सुजीत पाटल ने बताया क्यों ‘ब्रायलर मुर्गी’ बन रहे हैं हमारे बच्चे?
पिज्जा-बर्गर या बेटी की सेहत? पुणे के डॉक्टर का खुलासा: कैसे हमारा 'मॉडर्न लाइफस्टाइल' छीन रहा है मासूमों का बचपन"

8 साल की उम्र में पीरियड्स? बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजीत पाटल ने हार्मोनल बम बने जंक फूड और प्लास्टिक के खतरों पर दी चेतावनी। हर माता-पिता के लिए जरूरी खबर।”
पुणे/नई दिल्ली (The Asia Prime) 8:10 udt दिनांक: 22 जनवरी, 2026
विशेष रिपोर्ट: (Satbir Jandli)“अम्मी, मुझे खून क्यों आ रहा है?” यह सवाल किसी 13-14 साल की किशोरी का नहीं, बल्कि हाथ में गुड़िया लेकर खेल रही एक 8 साल की मासूम बच्ची का है। पुणे के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) डॉ. सुजीत भारत पाटल ने हाल ही में ओपीडी में आए एक ऐसे ही मामले को साझा करते हुए माता-पिता को झकझोर देने वाली चेतावनी दी है।
डॉ. पाटल के अनुसार, जिस उम्र में बच्चियों को रस्सी कूदनी चाहिए, उस उम्र में उन्हें सैनिटरी पैड और पीरियड्स का असहनीय दर्द झेलना पड़ रहा है। इसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में ‘प्रीकोशियस प्यूबर्टी’ (Precocious Puberty) कहते हैं, जो अब एक डरावनी हकीकत बन चुकी है।
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हम बच्चों को पाल नहीं, ‘फुला’ रहे हैं: 4 मुख्य कारण
डॉ. सुजीत ने अपनी रिपोर्ट में इस स्थिति के लिए हमारी आधुनिक जीवनशैली और ‘सहल-पसंद’ (आरामपरस्त) सोच को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने इसके पीछे 4 बड़े ‘हार्मोनल बम’ बताए हैं:
1. पिज्जा-बर्गर और इंस्टाग्राम वाली ‘होली’ मैदे और प्रोसेस्ड चीज़ से भरा जंक फूड शरीर में चर्बी बढ़ाता है। शरीर में जितनी अधिक चर्बी होगी, उतना ही अधिक एस्ट्रोजन हार्मोन बनेगा। यही हार्मोन 8 साल की बच्ची के दिमाग को संकेत देता है कि उसका बचपन खत्म हो गया है और वह ‘बड़ी’ हो गई है।
2. प्लास्टिक के डब्बों का ‘जहर’ प्लास्टिक के टिफिन में गर्म खाना रखने से उसमें मौजूद जेनो-एस्ट्रोजन्स (Xenoestrogens) खाने में मिल जाते हैं। ये केमिकल शरीर के भीतर जाकर असली हार्मोन्स की नकल करते हैं और कुदरती घड़ी को समय से पहले ही आगे बढ़ा देते हैं।
3. ‘ब्रायलर चिकन’ और केमिकल वाला दूध डॉक्टर ने चेतावनी दी कि पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों को 40 दिन में बड़ा करने के लिए ग्रोथ हार्मोन्स के इंजेक्शन दिए जाते हैं। वही चिकन जब बच्चे खाते हैं, तो उनके शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है। इसी तरह, दूध बढ़ाने के लिए पशुओं को दिए जाने वाले ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन भी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो रहे हैं।
4. शारीरिक गतिविधि का अभाव बच्चे मिट्टी और धूप से दूर हो गए हैं। शारीरिक मेहनत न होने के कारण हार्मोनल इम्बैलेंस की समस्या तेजी से बढ़ रही है।
सबसे खौफनाक हकीकत: रुक जाता है कद डॉ. पाटल बताते हैं कि कम उम्र में पीरियड्स शुरू होने से हड्डियां जल्दी जुड़ जाती हैं और बच्ची का कद (Height) हमेशा के लिए रुक जाता है। इसे रोकने के लिए ‘हार्मोन सप्रेशन थेरेपी’ देनी पड़ती है, जिसमें छोटी बच्ची को हर महीने एक मोटा और दर्दनाक इंजेक्शन लगवाना पड़ता है।
डॉक्टर की सलाह: अब भी वक्त है, संभल जाएं!
- किचन से निकालें ‘सफेद जहर’: मैदा और चीनी का इस्तेमाल न्यूनतम करें।
- प्लास्टिक को कहें अलविदा: बच्चों के लिए केवल स्टील के डब्बों और बोतलों का उपयोग करें।
- असली पोषण दें: बाजार के ‘फुलाए हुए’ चिकन के बजाय देसी और प्राकृतिक आहार पर जोर दें।
- धूप और खेल: बच्चों को गैजेट्स से दूर कर मैदान में पसीना बहाने दें।
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