क्या भारत की अर्थव्यवस्था के आँकड़े भरोसेमंद हैं? IMF की नई रिपोर्ट के बाद बढ़ी चिंतायें
IMF की ताज़ा रिपोर्ट भारत की तेज़ वृद्धि दर की पुष्टि करती है, वहीं कुछ विशेषज्ञ आंकड़ों की पारदर्शिता पर सवाल भी उठा रहे हैं। सच क्या है? एक विस्तृत विश्लेषण।

IMF की नई रिपोर्ट में भारत की GDP वृद्धि दर 6.6% बताई गई है। अर्थव्यवस्था मजबूत, लेकिन कुछ क्षेत्रों में डेटा पारदर्शिता पर बहस जारी। पूरी खबर पढ़ें।
Delhi ब्यूरो: THE ASIA PRIME/TAP News
नई दिल्ली।
हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा जारी की गई आर्थिक रिपोर्ट के बाद भारत में अर्थव्यवस्था के आंकड़ों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि “अर्थव्यवस्था के सारे आँकड़े नकली हैं” और IMF ने इस पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, वास्तविकता इससे काफी अलग है। IMF की रिपोर्ट में भारत की आर्थिक स्थिति को स्थिर और मजबूत बताया गया है, लेकिन साथ ही कुछ ऐसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई है, जिनसे डेटा पारदर्शिता को लेकर बहस बढ़ गई है।
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IMF की रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था को ‘तेजी से बढ़ती’ बताया गया
IMF ने वर्ष 2025–26 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 6.6% रहने का अनुमान दिया है। यह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ वृद्धि दरों में से एक है। वैश्विक संस्थान ने साफ कहा है कि भारत की आर्थिक मजबूती का आधार घरेलू मांग, सार्वजनिक निवेश, नीतिगत स्थिरता और उभरते उद्योग हैं।
IMF ने यह भी स्वीकार किया कि भारत ऊर्जा संक्रमण, डिजिटल इकोनॉमी और विनिर्माण क्षेत्र में लगातार मजबूत संकेत दे रहा है। यानी रिपोर्ट में अर्थव्यवस्था को नकली या कमजोर बताने जैसा कुछ नहीं कहा गया।
फिर विवाद क्यों? सवाल कहाँ उठे?
बहस तब शुरू हुई जब कुछ आर्थिक विश्लेषकों ने रिपोर्ट के बाहर “डेटा पारदर्शिता” का मुद्दा उठाया। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार —
सरकारी आंकड़ों का संकलन तरीका और
बेरोजगारी व गरीबी के आंकड़ों का सीमित प्रकाशन
कई बार चर्चा का विषय बनता है।
हालाँकि, IMF की रिपोर्ट में यह कहा जरूर गया कि “कुछ क्षेत्रों में डेटा कवरेज बेहतर हो सकता है”, लेकिन इसे लेकर “नकली”, “शर्मसार” या “भयंकर असर” जैसे शब्दों का इस्तेमाल IMF ने कहीं नहीं किया।
क्या भारत के आर्थिक आंकड़े गलत हैं? भारत सरकार GDP, महंगाई, औद्योगिक उत्पादन, निर्यात-आयात और वित्तीय स्थिति से जुड़े आंकड़े राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), वित्त मंत्रालय और RBI के माध्यम से जारी करती है।
इनमें से कुछ आंकड़ों की विश्वसनीयता पर समय-समय पर बहस होती रही है, लेकिन ये सभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तैयार किए जाते हैं।
IMF, विश्व बैंक और अन्य निकाय नियमित रूप से इन पर अपनी समीक्षा करते हैं।
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IMF का स्पष्ट संकेत — भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है
— GDP वृद्धि मजबूत
— सार्वजनिक निवेश बढ़ रहा
— डिजिटल भुगतान दुनिया में सबसे बड़ा
— विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा
ऐसे में यह कहना कि “IMF ने भारत की अर्थव्यवस्था को नकली बताया” पूरी तरह गलत दावा है।
तो फिर खबर क्या है?
खबर यह है कि IMF के आंकड़ों ने एक बार फिर भारत को उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में सामने रखा है।
और बहस यह है कि कुछ क्षेत्रों में आंकड़ों की पारदर्शिता और उपलब्धता को और बेहतर किया जा सकता है।
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर IMF की रिपोर्ट में कोई नकारात्मक या शर्मनाक टिप्पणी नहीं है।
बल्कि रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था की प्रमुख ताकतों में से एक होगा।
हाँ, आंकड़ों की पारदर्शिता को लेकर विशेषज्ञों के सुझाव भविष्य की नीतियों के लिए जरूरी संकेत अवश्य देते हैं।
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