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नई दिल्ली : आप सांसद संजय सिंह ने संसद में पूजीपतियों का लोन माफी का मुद्दा जोर शोर से उठाया: “43 कंपनियों का 3.53 लाख करोड़ कर्ज माफ, पर किसानों-छात्रों के लिए पैसा नहीं”

हेयरकट' स्कीम के नाम पर कॉर्पोरेट घरानों को दी गई भारी छूट; AAP सांसद ने सदन में पेश की डिफॉल्टर कंपनियों की लिस्ट।

राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने संसद में 43 कंपनियों के 3.53 लाख करोड़ रुपये के लोन माफी का कच्चा चिट्ठा खोला। देखिए किस कंपनी का कितना पैसा हुआ माफ।

नई दिल्ली/ ब्यूरो चीफ: सतबीर जांडली (The Asia Prime / TAP News) : आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने संसद में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए ‘कॉर्पोरेट लोन माफी’ का मुद्दा जोर-शोर से उठाया है। संजय सिंह ने सरकार की ‘हेयरकट’ (Haircut) स्कीम पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जहाँ एक तरफ सरकार के पास किसानों, छात्रों और छोटे व्यापारियों का कर्ज माफ करने के लिए बजट नहीं है, वहीं दूसरी ओर 43 बड़ी कंपनियों का 3 लाख 53 हजार 655 करोड़ रुपये का कर्ज माफ (Write-off) कर दिया गया है।

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क्या है ‘हेयरकट’ स्कीम का गणित?

​संजय सिंह ने सदन में आंकड़ों के साथ बताया कि इन 43 बड़ी कंपनियों पर कुल 5,44,434 करोड़ रुपये का बकाया कर्ज था। सरकार की योजना के तहत इन कंपनियों से केवल 1,90,779 करोड़ रुपये की वसूली की गई, जबकि बाकी की भारी-भरकम राशि यानी 3,53,655 करोड़ रुपये को ‘हेयरकट’ के नाम पर छोड़ दिया गया। सांसद ने तंज कसते हुए कहा कि यह ‘हेयरकट’ नहीं बल्कि आम जनता की ‘गर्दन काटना’ है।

बड़े डिफॉल्टरों की लिस्ट और माफी का ब्योरा:

​सांसद संजय सिंह ने कुछ प्रमुख कंपनियों के नाम और उनकी कर्ज माफी का ब्योरा भी साझा किया:

कंपनी का नाम

कुल बकाया कर्ज (करोड़ में)

कितनी राशि माफ हुई (करोड़ में)

आलोक इंडस्ट्रीज लिमिटेड

₹29,524

₹24,472

एबीजी शिपयार्ड

₹26,350

₹24,100 (लगभग)

एमटेक ऑटो लिमिटेड

₹12,641

₹10,026

वीडियोकॉन ग्रुप

₹46,000

₹42,000 (80% से ज्यादा छूट)

एस्सार स्टील

₹49,000

₹7,000 (करीब)

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“आम आदमी के लिए नहीं है पैसा”

​संजय सिंह ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश का छात्र शिक्षा ऋण (Education Loan) माफी की मांग करता है या रेहड़ी-पटरी वाले अपने छोटे कर्ज के लिए गुहार लगाते हैं, तो सरकार कहती है कि “खजाना खाली है”। उन्होंने कहा कि अगर यह 3.53 लाख करोड़ रुपये माफ नहीं किए जाते, तो इससे:

  • ​पूरे देश के किसानों का कर्ज माफ हो सकता था।
  • ​पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू की जा सकती थी।
  • ​’अग्निवीर’ योजना को खत्म कर पुरानी भर्ती प्रक्रिया बहाल की जा सकती थी।

​संजय सिंह द्वारा उठाए गए ये आंकड़े बैंकिंग सेक्टर की सेहत और सरकारी नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। हालांकि सरकार इसे एनपीए (NPA) कम करने और कंपनियों को दोबारा चालू करने की प्रक्रिया बताती है, लेकिन आम आदमी के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि “बड़े घरानों को माफी और छोटे किसानों को कुर्की” का यह भेदभाव कब खत्म होगा?

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