सोनीपत में हाई-वोल्टेज ड्रामा: 30 घंटे से 250 फीट ऊंचे टावर पर डटा किसान; प्रशासन के ‘पीले पंजे’ के खिलाफ भूखे-प्यासे जंग
मर जाऊंगा पर नीचे नहीं उतरूंगा"— लिखित आश्वासन की मांग पर अड़ा किसान; घर और स्कूल तोड़ने की तैयारी से आक्रोश। कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे के पास तनावपूर्ण स्थिति।

सोनीपत में जमीन और मकान बचाने की जंग। 30 घंटे से टावर पर बैठा किसान, प्रशासन के बुलडोजर का कर रहा विरोध।
सोनीपत/ ब्यूरो चीफ: सतबीर जांडली (The Asia Prime / TAP News) : हरियाणा के सोनीपत जिले में एक किसान पिछले 30 घंटों से 250 फीट ऊंचे हाई-टेंशन बिजली के टावर पर चढ़ा हुआ है। कड़ाके की ठंड और बिना अन्न-जल के टावर पर बैठे इस किसान ने सोनीपत प्रशासन की नींद उड़ा दी है। मामला जमीन अधिग्रहण और प्रशासन द्वारा घर व स्कूल तोड़ने की कार्रवाई से जुड़ा है। किसान का साफ कहना है कि जब तक उसे लिखित में सुरक्षा का आश्वासन नहीं मिलता, वह नीचे नहीं उतरेगा।
क्या है पूरा विवाद?
सोनीपत के विकास और सड़क चौड़ीकरण की योजना के तहत प्रशासन ने कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) के पास स्थित कुछ निर्माणों को अवैध बताते हुए गिराने का नोटिस दिया था। इसमें किसान का पुश्तैनी घर और एक छोटा स्कूल भी शामिल है।
- किसान का पक्ष: किसान का दावा है कि यह जमीन उसकी अपनी है और प्रशासन बिना उचित मुआवजे या पुनर्वास के उसके सिर से छत छीनने की कोशिश कर रहा है।
- प्रशासन की कार्रवाई: सोनीपत प्रशासन ने भारी पुलिस बल और जेसीबी (पीला पंजा) के साथ इलाके की घेराबंदी कर रखी है। प्रशासन का तर्क है कि यह निर्माण सरकारी योजना के रास्ते में बाधा है।
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30 घंटे की ‘अग्निपरीक्षा’: भूखा-प्यासा किसान
किसान बुधवार सुबह करीब 10 बजे टावर पर चढ़ा था और गुरुवार शाम तक वह वहीं डटा हुआ है। टावर की ऊंचाई और ऊपर चल रही तेज हवाओं के कारण उसकी जान को हर पल खतरा बना हुआ है। नीचे खड़ी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लाउडस्पीकर के जरिए उसे नीचे उतारने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन किसान ने दो टूक कह दिया है:
“मैं भूखा-प्यासा हूं, मुझे मौत का डर नहीं है। अगर प्रशासन ने मेरे घर और स्कूल पर बुलडोजर चलाया, तो मैं यहीं से कूद जाऊंगा। मुझे सिर्फ और सिर्फ लिखित आश्वासन चाहिए।”
प्रशासनिक अमले में हड़कंप, मौके पर भारी फोर्स
घटनास्थल पर सोनीपत के आला अधिकारी, एसडीएम और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है। एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि वे किसान की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और बातचीत के जरिए उसे नीचे उतारने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, किसान किसी भी मौखिक आश्वासन को मानने को तैयार नहीं है।
ग्रामीणों में आक्रोश, बढ़ सकती है मुश्किल
जैसे-जैसे समय बीत रहा है, आसपास के गांवों के लोग भी मौके पर जुटने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन का रवैया तानाशाहीपूर्ण है। किसान के समर्थन में नारेबाजी की जा रही है। अगर प्रशासन ने जबरन कार्रवाई की, तो स्थिति बिगड़ सकती है। किसान नेताओं ने भी चेतावनी दी है कि यदि किसान को कुछ हुआ, तो पूरा सोनीपत जाम कर दिया जाएगा।
एक किसान का 250 फीट ऊंचे टावर पर चढ़ना व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है। विकास जरूरी है, लेकिन वह किसी की छत छीनकर नहीं होना चाहिए। प्रशासन को हठ छोड़कर बीच का रास्ता निकालना चाहिए। यदि किसान लिखित आश्वासन मांग रहा है, तो उसकी जायज मांगों पर विचार करने में क्या बुराई है? एक जान की कीमत किसी भी सड़क या स्कूल की दीवार से कहीं बढ़कर है।