“रियायत सिर्फ भारत की जनता के लिए…”— ईरान का बड़ा बयान; हॉर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों को रास्ता देने का असल कारण आया सामने!
कूटनीति नहीं, जनभावना की जीत! ईरानी प्रतिनिधि बोले— "भारतीयों ने हमारा साथ दिया, मासूमों के हक में आवाज उठाई, इसलिए गैस और जहाजों के लिए दी विशेष अनुमति।"
ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों को गुजरने की दी इजाजत। ईरानी प्रतिनिधि बोले— यह रियायत भारत की जनता के समर्थन की वजह से है, किसी सरकार या कूटनीति की वजह से नहीं।
तेहरान/नई दिल्ली ब्यूरो चीफ: सतबीर जांडली (The Asia Prime / TAP News) : ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच वैश्विक कूटनीति के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसने सबको हैरान कर दिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही पर लगे प्रतिबंधों के बीच ईरान ने भारतीय जहाजों को जो रियायत दी है, उसका श्रेय किसी सरकार या नेता को नहीं, बल्कि भारत की “आम जनता” को दिया है। ईरानी प्रतिनिधि के इस बयान ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि असली ‘डिप्लोमेसी’ सरकारों के बीच नहीं, बल्कि लोगों के दिलों के बीच होती है।
ईरानी प्रतिनिधि का सीधा प्रहार: “सरकार नहीं, जनता का समर्थन”
एक प्रेस वार्ता के दौरान जब ईरानी प्रतिनिधि से सवाल पूछा गया कि “क्या भारत के लिए कोई खास रियायत दी जाएगी?” तो उनका जवाब बेहद भावुक और चौंकाने वाला था। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान का यह फैसला भारत सरकार की किसी नीति या कूटनीतिक दबाव का नतीजा नहीं है।
- जनता की सहानुभूति: ईरानी प्रतिनिधि ने कहा, “हमने देखा कि मुश्किल समय में भारत की जनता हमारे साथ खड़ी रही। अमेरिका द्वारा थोपे गए युद्ध की निंदा की गई और गाजा व लेबनान में मासूम बच्चों पर हो रहे हमलों के खिलाफ भारतीयों ने मजबूती से आवाज उठाई।”
- गैस की आपूर्ति: उन्होंने आगे बताया कि ईरान सरकार को यह जानकारी दी गई कि जिन भारतीयों ने उनका समर्थन किया है, उन्हें गैस की सख्त जरूरत है। इसके बाद ईरानी सरकार ने तुरंत मानवीय आधार पर अनुमति जारी कर दी।
हॉर्मुज स्ट्रेट: कूटनीति की जगह जनभावना ने खोला रास्ता
हॉर्मुज स्ट्रेट सामरिक रूप से दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जहाँ से वैश्विक तेल और गैस की सप्लाई होती है। युद्ध के कारण यहाँ भारतीय जहाजों को लेकर भी संशय बना हुआ था।
- बड़ा खुलासा: ईरानी प्रतिनिधि ने साफ शब्दों में कहा, “सिर्फ और सिर्फ भारत की जनता की सहानुभूति और समर्थन की वजह से ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों को सुरक्षित गुजरने की इजाजत दी है।”
“न कोई मोदी, न जयशंकर…”— असली ताकत है आवाम!
सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस बयान की चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि इसमें किसी राजनैतिक दल (BJP) या सरकार के चेहरे को क्रेडिट नहीं दिया गया है।
- असली डिप्लोमेसी: यह संदेश दिया गया है कि जब किसी देश की जनता दूसरे देश के दुख-दर्द में साथ खड़ी होती है, तो कूटनीति के बंद दरवाजे अपने आप खुल जाते हैं।
- सहानुभूति का असर: ईरान का मानना है कि सोशल मीडिया और प्रदर्शनों के जरिए भारतीयों ने जिस तरह इजरायली हमलों के खिलाफ और ईरान के पक्ष में स्टैंड लिया, वह किसी भी सरकारी फाइल से कहीं ज्यादा वजनदार साबित हुआ।
- फतेहाबाद: नामी पेस्टीसाइड कंपनी नागार्जुन एनएसीएल इंडस्ट्रीज लिमिटेड (NACL) के MD और चेयरपर्सन समेत 12 पर FIR; डीलर के 1.63 करोड़ हड़पने का आरोप
ईरान का यह बयान भारत की उस ‘सॉफ्ट पावर’ की याद दिलाता है, जहाँ जनता की राय अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बदलने का दम रखती है। हालांकि, कूटनीतिक जानकार इसे ईरान की एक ‘रणनीति’ भी मान सकते हैं, जिससे वह भारत सरकार के बजाय सीधे जनता के साथ अपना जुड़ाव मजबूत करना चाहता है। लेकिन एक बात साफ है— विश्व राजनीति के इस कठिन दौर में, आम जनता की आवाज ने भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा का रास्ता साफ कर दिया है।