पंजाब

पंजाब में कुदरत का कहर और तकनीक की नाकामी: बरनाला में जैक से उठाया जा रहा मकान ढहा, 3 मजदूरों की दर्दनाक मौत

फरवाही गांव में तड़के 4 बजे हुआ भीषण हादसा; आंधी-बारिश ने बिगाड़ा संतुलन, ताश के पत्तों की तरह गिरा लेंटर। गुरुद्वारे और डेरे से हुआ एलान, मदद को दौड़े ग्रामीण।

बरनाला के फरवाही गांव में जैक से उठाया जा रहा मकान ढहा। आंधी-बारिश से बिगड़ा संतुलन, 3 मजदूरों की मौत, गुरुद्वारे से हुआ एलान।

बरनाला (पंजाब)/ ब्यूरो चीफ: सतबीर जांडली (The Asia Prime / TAP News)  : पंजाब के बरनाला जिले के गांव फरवाही में रविवार तड़के एक हृदयविदारक हादसा हो गया। यहाँ तकनीकी विशेषज्ञता की कमी और अचानक आई प्राकृतिक आपदा (आंधी-बारिश) के घातक संयोजन ने तीन गरीब मजदूरों की जान ले ली। जैक की मदद से ऊपर उठाया जा रहा एक दो मंजिला मकान अचानक भरभराकर गिर गया, जिसके मलबे में दबकर वहां सो रहे तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मकान गिरने की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी।

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कुदरत ने बिगाड़ा खेल: कैसे हुआ हादसा?

​जानकारी के अनुसार, गांव निवासी जीवन कुमार के मकान को पिछले कई दिनों से मरम्मत के तहत आधुनिक जैक तकनीक से सीधा और ऊंचा उठाने का काम चल रहा था। यह एक जोखिम भरा कार्य था, जिसे विशेषज्ञ टीम अंजाम दे रही थी। शनिवार रात और रविवार तड़के इलाके में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई।

​गांव के सरपंच जगसीर सिंह ने ‘The Asia Prime’ को बताया कि यह हादसा रविवार सुबह करीब 4:15 बजे हुआ। उन्होंने कहा कि रात में हुई भारी बारिश और तेज हवा के कारण जैक का संतुलन बिगड़ गया और नींव कमजोर पड़ गई, जिससे पूरा मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गया। सरपंच ने इसे “प्राकृतिक आपदा” की तरह बताया, न कि महज एक लापरवाही।

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गुरुद्वारे से एलान और ग्रामीणों का ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’

​तड़के सुबह जब पूरा गांव गहरी नींद में था, धमाके की आवाज ने सबको झकझोर दिया। हादसे की गंभीरता को देखते हुए गांव के गुरुद्वारा साहिब और डेरा बाबा थम्मन सिंह से तुरंत अनाउंसमेंट (एलान) करवाई गई। आवाज सुनते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण टॉर्च और घरेलू औजार लेकर मौके पर इकट्ठा हो गए और प्रशासन को सूचित किया।

चीख-पुकार और मशक्कत: ASI अमरजीत सिंह का बयान

​सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस की टीम ASI अमरजीत सिंह के नेतृत्व में मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से राहत कार्य शुरू किया। ASI अमरजीत सिंह के अनुसार, जब वे पहुंचे, तो मलबे के नीचे दबा एक मजदूर घायल हालत में मदद के लिए चिल्ला रहा था, उसकी चीखें रूह कंपा देने वाली थीं।

​काफी मशक्कत और मलबे को हटाने के बाद, तीन मजदूरों को बाहर निकाला गया। उन्हें अलग-अलग एंबुलेंस के जरिए सिविल अस्पताल बरनाला पहुंचाया गया, लेकिन दुर्भाग्य से डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान की जा रही है, जो बाहरी राज्यों से आए दिहाड़ी मजदूर बताए जा रहे हैं।

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सरपंच ने सुनिश्चित किया: कोई और तो नहीं फंसा?

​शुरुआती जानकारी के मुताबिक, मलबे में चार मजदूरों के दबे होने की आशंका थी। हालांकि, सरपंच जगसीर सिंह ने बाद में पुष्टि की कि चौथा मजदूर रात करीब 10 बजे सुरक्षित अपने घर पहुंच गया था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। एहतियात के तौर पर, सभी ग्रामीण मिलकर अभी भी मलबा हटा रहे हैं ताकि यह पूरी तरह सुनिश्चित किया जा सके कि अंदर कोई और व्यक्ति तो नहीं फंसा है।

मुआवजे की मांग और राजनीतिक प्रतिक्रिया

​हादसे की खबर मिलते ही क्षेत्रीय विधायक कुलदीप सिंह काला ढिल्लों मौके पर पहुंचे। उन्होंने इसे एक बहुत ही दुखद हादसा बताया और कहा, “मैं अपने स्तर पर हर संभव कोशिश करूंगा ताकि मृतक परिवारों को उचित मुआवजा मिल सके।”

​गाँव के सरपंच जगसीर सिंह ने भी सरकार से मांग की है कि जान गंवाने वाले मजदूरों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही, मकान के नुकसान के लिए मुख्यमंत्री कोष या सरकारी कोटे से वित्तीय सहायता प्रदान की जानी चाहिए।

​बरनाला का यह हादसा आधुनिक निर्माण तकनीकों के सुरक्षित उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जैक तकनीक से मकान उठाना निस्संदेह एक विशेषज्ञतापूर्ण कार्य है, जिसमें मौसम और भू-तकनीकी स्थितियों का सटीक आकलन अनिवार्य है। हालांकि सरपंच ने इसे प्राकृतिक आपदा बताया है, लेकिन जांच इस बात की भी होनी चाहिए कि क्या आंधी-बारिश की चेतावनी के बावजूद काम जारी रखना या मजदूरों को अंदर सुलाना सही था? ‘The Asia Prime’ मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है और सरकार से त्वरित जांच व मुआवजे की अपील करता है।

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