जांडली कलां में गूंजा ‘इंकलाब जिंदाबाद’: विजय कमांडो के नेतृत्व में बच्चों ने निकाला विशाल देशभक्ति जुलूस

हरियाणा के जांडली कलां में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की शहादत को नमन करने के लिए भव्य विजय जुलूस निकाला गया। विजय कमांडो के नेतृत्व और रमेश कॉमरेड के संबोधन के साथ ग्रामीणों ने ली देशभक्ति की शपथ। पढ़ें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।
जांडली कलां (हरियाणा) | विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: (THE ASIA PRIME /TAP News )भूमिका: आज हरियाणा के फतेहाबाद जिले के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक गांव जांडली कलां की फिजां बदली-बदली सी नजर आई। मौका था भारत के महान क्रांतिकारी और युवाओं के प्रेरणास्रोत शहीद-ए-आजम भगत सिंह की शहादत को नमन करने का। इस अवसर पर पूरे गांव में देशभक्ति का ऐसा ज्वार उमड़ा कि हर बच्चा, युवा और बुजुर्ग भारत माता की जयघोष करता नजर आया। THE ASIA PRIME की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए कैसे एक गांव ने अपने वीर सपूतों को याद कर आधुनिक दौर में राष्ट्रभक्ति की नई मिसाल पेश की।
तिरंगे की आन-बान-शान में उमड़ा जनसैलाब
जुलूस का आगाज शाम को गांव के भक्त्त सिंह पार्क में हुआ, जहाँ सैकड़ों की संख्या में स्कूली बच्चे और ग्रामीण एकत्रित हुए। जैसे ही हाथों में तिरंगा लिए बच्चों का हुजूम गलियों में निकला, पूरा माहौल “इंकलाब जिंदाबाद” और “शहीद भगत सिंह अमर रहें” के नारों से गूंज उठा। छोटे-छोटे बच्चों के चेहरों पर झलकता जोश यह बता रहा था कि आज भी भगत सिंह के विचार नई पीढ़ी की रगों में दौड़ रहे हैं। यह आयोजन केवल एक औपचारिक जुलूस नहीं था, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और आजादी के संघर्ष से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बना।
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विजय कमांडो का ओजस्वी नेतृत्व
इस भव्य आयोजन की कमान सरपंच प्रतिनिधि विजय कमांडो ने संभाली। अनुशासन और राष्ट्रसेवा का साक्षात उदाहरण पेश करते हुए विजय कमांडो ने जुलूस का मार्गदर्शन किया। बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा:
“आजादी खैरात में नहीं मिली है, इसके पीछे भगत सिंह जैसे हजारों वीरों का लहू बहा है। आज के दौर में हाथ में तिरंगा थामने का अर्थ केवल नारा लगाना नहीं, बल्कि नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाना है ताकि जरूरत पड़ने पर हम देश की रक्षा कर सकें।”
रमेश कॉमरेड: विचारों की मशाल और सामाजिक जिम्मेदारी
कार्यक्रम के दौरान प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता रमेश कॉमरेड ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने भगत सिंह के बौद्धिक पक्ष पर जोर देते हुए कहा कि भगत सिंह केवल बम और पिस्तौल के क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि वे एक महान पाठक और विचारक थे। रमेश कॉमरेड ने भावुक स्वर में कहा:
“हमें केवल उनकी तस्वीरों पर फूल अर्पित करके अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं मान लेनी चाहिए। असली श्रद्धांजलि तब होगी जब हम उनके बताए समानता, भाईचारे और साक्षरता के मार्ग पर चलेंगे। समाज से भेदभाव मिटाना और हर हाथ को काम मिलना ही भगत सिंह का असली सपना था।”
इतिहास के पन्नों से: 23 साल की उम्र और वो बेमिसाल शहादत
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THE ASIA PRIME अपने पाठकों को याद दिलाना चाहता है कि 28 सितंबर 1907 को बंगा (अब पाकिस्तान) में जन्मे भगत सिंह ने बचपन में ही जलियांवाला बाग की मिट्टी को माथे से लगाकर अंग्रेजों को जड़ से उखाड़ने की कसम खाई थी। 1928 में लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज का बदला लेने के लिए सांडर्स का वध करना हो, या 1929 में सेंट्रल असेंबली में धमाका करके सोती हुई अंग्रेजी हुकूमत को जगाना—भगत सिंह ने हर बार मौत को गले लगाया। 23 मार्च 1931 की शाम, जब वे फांसी के फंदे की ओर बढ़ रहे थे, उनके चेहरे पर एक असीम शांति और मुस्कान थी।
गाँव में संकल्प की गूंज
ईस जुलूस का समापन गांव के भगत सिंह पार्क में एक सार्वजनिक सभा के रूप में हुआ। यहाँ दो मिनट का मौन रखकर उन तमाम ज्ञात-अज्ञात शहीदों को याद किया गया जिन्होंने भारत की मिट्टी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे अपने गांव को आदर्श बनाएंगे और आने वाली पीढ़ी को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के आदर्शों से अवगत कराते रहेंगे।
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THE ASIA PRIME की विशेष अपील
एक जिम्मेदार न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म होने के नाते THE ASIA PRIME समाज के हर माता-पिता और शिक्षक से यह अपील करता है कि आप अपने बच्चों को मोबाइल गेम्स और काल्पनिक नायकों के बजाय भारत के असली हीरोज—शहीद भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और सुभाष चंद्र बोस की कहानियां सुनाएं। यह सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हमारे महान क्रांतिकारियों का बलिदान व्यर्थ न जाए और भारत का भविष्य सुरक्षित और संस्कारवान हाथों में रहे।
- प्रकाशन: THE ASIA PRIME
- स्थान: जांडली कलां, हरियाणा
- प्रमुख व्यक्तित्व: विजय कमांडो, रमेश कॉमरेड
- विषय: शहीद भगत सिंह श्रद्धांजलि जुल।
ब्यूरो चीफ: सतबीर जांडली (The Asia Prime / TAP News)