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उचाना चुनाव विवाद: हाईकोर्ट में RO की ‘गैरमौजूदगी’ पर हंगामा; देवेंद्र अत्री के वकील को फटकार, बृजेंद्र सिंह की याचिका ने बढ़ाई हलचल

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में उचाना कलां सीट के चुनावी नतीजों पर तीखी बहस; रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के पेश न होने पर कोर्ट सख्त, चुनाव प्रक्रिया के रिकॉर्ड तलब।

उचाना कलां विधानसभा सीट पर चुनाव धांधली के आरोपों को लेकर हाईकोर्ट सख्त। RO की अनुपस्थिति पर जताई नाराजगी, विजेता प्रत्याशी के वकील को लगी फटकार। क्या बदलेगा उचाना का नतीजा?

चंडीगढ़/जींद ब्यूरो चीफ: सतबीर जांडली (The Asia Prime / TAP News) : हरियाणा की सबसे हॉट सीटों में शुमार रही उचाना कलां विधानसभा सीट का चुनावी दंगल अब सड़कों से निकलकर हाईकोर्ट के गलियारों में पूरी तरह गरमा गया है। उचाना सीट से बेहद मामूली अंतर (मात्र 32 वोट) से चुनाव हारे पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। मामले में तब नाटकीय मोड़ आया जब संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर (RO) कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए और विजेता प्रत्याशी देवेंद्र अत्री के वकील को अदालत की कड़ी फटकार का सामना करना पड़ा।

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क्या है पूरा विवाद?

​हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में उचाना कलां सीट पर भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र अत्री और कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह के बीच कांटे की टक्कर हुई थी। अंततः चुनाव आयोग ने देवेंद्र अत्री को मात्र 32 वोटों से विजयी घोषित किया। बृजेंद्र सिंह ने मतगणना में धांधली, पोस्टल बैलेट की गिनती में अनियमितता और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए चुनाव को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

कोर्ट में क्या हुआ? (RO की अनुपस्थिति और फटकार)

​सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और चुनाव प्रक्रिया की स्पष्टता के लिए संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को तलब किया था।

  • RO की गैरमौजूदगी: जब मामला सुनवाई पर आया, तो RO अदालत में मौजूद नहीं थे। इस पर अदालत ने गहरी नाराजगी जाहिर की। विपक्षी खेमे ने इसे ‘सच्चाई से भागने’ की कोशिश करार दिया।
  • बचाव पक्ष के वकील को फटकार: सुनवाई के दौरान जब देवेंद्र अत्री के वकील ने कुछ दलीलें पेश करने की कोशिश की, तो अदालत ने तथ्यों और प्रक्रियात्मक खामियों को लेकर उन्हें कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव की शुचिता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह होना होगा।
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बृजेंद्र सिंह के गंभीर आरोप

​बृजेंद्र सिंह के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि:

  1. पोस्टल बैलेट में गड़बड़ी: अंतिम दौर की गिनती और पोस्टल बैलेट के सत्यापन में चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
  2. रिकॉर्डिंग और डेटा: कई बूथों की वीडियोग्राफी और कंट्रोल यूनिट के डेटा में विसंगतियां हैं।
  3. कम अंतर: हार-जीत का अंतर इतना कम है कि एक भी वोट की गलत गिनती नतीजे को पलट सकती है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा

​उचाना कलां की यह लड़ाई सिर्फ दो प्रत्याशियों की नहीं, बल्कि दो बड़े राजनीतिक घरानों की साख का सवाल बन गई है। एक तरफ पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा के देवेंद्र अत्री। यदि हाईकोर्ट इस मामले में दोबारा मतगणना (Recounting) का आदेश देता है या चुनाव को रद्द करता है, तो यह हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला सकता है।

​लोकतंत्र में जनता का एक-एक वोट कीमती है। उचाना कलां जैसे हाई-प्रोफाइल मामले में रिटर्निंग ऑफिसर की गैरमौजूदगी और कोर्ट की फटकार यह संकेत देती है कि दाल में कुछ काला जरूर है या फिर प्रक्रियात्मक स्तर पर भारी लापरवाही हुई है। हाईकोर्ट की इस सख्ती ने बृजेंद्र सिंह के समर्थकों में नई उम्मीद जगा दी है, जबकि सत्ता पक्ष के लिए यह कानूनी पेच फंसता नजर आ रहा है।

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