AIIMS दिल्ली रचेगा इतिहास: भारत में पहली बार होगा ‘फेस ट्रांसप्लांट’; 100 डॉक्टरों की टीम 36 घंटे तक करेगी यह महा-ऑपरेशन
"बदलेगा चेहरा, मिलेगी नई जिंदगी: AIIMS दिल्ली में शुरू होगा देश का पहला फेस ट्रांसप्लांट सेंटर; एसिड अटैक पीड़ितों के लिए विज्ञान का सबसे बड़ा तोहफा"

AIIMS दिल्ली अगले एक साल में भारत की पहली फेस ट्रांसप्लांट सर्जरी करने की तैयारी में है। 100 डॉक्टरों की टीम 36 घंटे में करेगी यह जटिल ऑपरेशन। जानें पूरी प्रक्रिया।
नई दिल्ली ब्यूरो: Satbir Jandli(THE ASIA PRIME/ TAP News): भारत के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान, AIIMS दिल्ली ने घोषणा की है कि वह अगले एक साल के भीतर देश की पहली ‘फेस ट्रांसप्लांट सर्जरी’ (Face Transplant Surgery) शुरू करने की तैयारी कर रहा है। यह सर्जरी उन लोगों के लिए एक नया जीवन लेकर आएगी जिनका चेहरा एसिड अटैक, गंभीर दुर्घटनाओं या जन्मजात विकृतियों के कारण पूरी तरह खराब हो चुका है।
डॉ. मनीष सिंघल का ‘मिशन फेस ट्रांसप्लांट’
AIIMS के सीनियर बर्न और प्लास्टिक सर्जन डॉ. मनीष सिंघल के अनुसार, यह भारत की अब तक की सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण चिकित्सा प्रक्रियाओं में से एक होगी। इस ‘महा-ऑपरेशन’ को अंजाम देने के लिए 100 से अधिक विशेषज्ञों की एक विशाल टीम तैयार की जा रही है।
सर्जरी से जुड़ी 5 बड़ी और खास बातें:
- लंबी अवधि: यह ऑपरेशन कोई सामान्य सर्जरी नहीं है। इसमें लगातार 24 से 36 घंटे का समय लग सकता है।
- जटिल प्रक्रिया: इसमें डोनर (मृत व्यक्ति) के चेहरे की त्वचा, मांसपेशियां, नसें और कभी-कभी हड्डियों को बेहद सावधानी से हटाकर मरीज के चेहरे पर प्रत्यारोपित किया जाता है।
- डॉक्टरों की फौज: टीम में प्लास्टिक सर्जन, न्यूरोसर्जन, एनेस्थेटिस्ट, इम्यूनोलॉजिस्ट और मनोवैज्ञानिक शामिल होंगे।
- इम्यूनिटी का तालमेल: सर्जरी के बाद मरीज को जीवनभर ऐसी दवाएं लेनी होंगी ताकि उसका शरीर नए चेहरे को ‘रिजेक्ट’ न करे।
- किसे मिलेगा फायदा: यह तकनीक मुख्य रूप से उन एसिड अटैक सर्वाइवर्स और गंभीर चोट के पीड़ितों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनका चेहरा साधारण प्लास्टिक सर्जरी से ठीक नहीं हो सकता।
भारत के लिए गौरव का क्षण
दुनिया भर में अब तक गिने-चुने फेस ट्रांसप्लांट ही हुए हैं (पहला सफल ट्रांसप्लांट 2005 में फ्रांस में हुआ था)। यदि AIIMS इसमें सफल रहता है, तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा हो जाएगा जिनके पास यह उन्नत तकनीक उपलब्ध है।
क्या है सबसे बड़ी चुनौती?
डॉक्टरों के अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती ‘डोनर’ (अंगदाता) मिलना है। जैसे किडनी या लीवर दान किया जाता है, वैसे ही अब लोगों को चेहरा दान करने के प्रति जागरूक करना होगा। इसके अलावा, मरीज के शरीर द्वारा नए चेहरे को स्वीकार करना एक लंबी और कठिन वैज्ञानिक प्रक्रिया है।