
राज्यसभा में राघव चड्ढा ने उठाया मिलावटखोरी का मुद्दा। मसालों और दूध में रसायनों की मिलावट पर सरकार से मांगे जवाब। कहा—सख्त कानून के बिना नहीं रुकेगा ‘ज़हर’ का व्यापार।
नई दिल्ली (THE ASIA PRIME / TAP News): राज्यसभा में आज उस समय सन्नाटा पसर गया जब सांसद राघव चड्ढा ने देश में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। उन्होंने आंकड़ों और तथ्यों के साथ बताया कि कैसे बच्चों के दूध से लेकर रसोई के मसालों तक में कैंसर पैदा करने वाले खतरनाक केमिकल्स की मिलावट की जा रही है। चड्ढा ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल (National Health Emergency) जैसी स्थिति करार दिया।
“थाली में ज़हर, किचन में मौत”
सदन को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने कहा, “सभापति महोदय, आज स्थिति यह है कि एक आम आदमी जो खाना खा रहा है, वह उसे पोषण नहीं बल्कि बीमारियाँ दे रहा है। दूध में यूरिया और डिटर्जेंट मिलाया जा रहा है, मसालों में ईंट का चूरा और प्रतिबंधित कीटनाशक मिल रहे हैं। यह मिलावट नहीं, बल्कि धीमी गति से दिया जाने वाला ज़हर है जिसे देश की जनता को खिलाया जा रहा है।”
मसालों और कैंसर का कनेक्शन
हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय मसालों के कुछ ब्रांड्स पर लगे प्रतिबंधों का हवाला देते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि जब विदेशों में हमारे मसालों की जांच होती है, तो वहां ‘एथिलीन ऑक्साइड’ जैसे खतरनाक केमिकल पाए जाते हैं। उन्होंने सवाल पूछा कि जो मसाले विदेशों में रिजेक्ट (Reject) कर दिए जाते हैं, क्या वही गुणवत्ता मानक भारत में लागू नहीं होने चाहिए? क्या भारतीय नागरिकों के जीवन की कीमत कम है?
FSSAI की कार्यप्रणाली पर खड़े किए सवाल
सांसद ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की भूमिका पर भी तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा:
- निगरानी का अभाव: देश में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए पर्याप्त लैब और इंस्पेक्टर क्यों नहीं हैं?
- ढिलाई: क्यों बड़ी कंपनियों को जांच के घेरे से बाहर रखा जाता है और केवल छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई की खानापूर्ति होती है?
- सजा का प्रावधान: राघव चड्ढा ने मांग की कि खाने में मिलावट करने वालों के खिलाफ ‘हत्या के प्रयास’ जैसी कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
राघव चड्डा ने सरकार से पूछे तीखे सवाल
चड्ढा ने सरकार से मांग की कि वह इस दिशा में ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति अपनाए। उन्होंने पूछा कि सरकार मिलावटखोरी को रोकने के लिए नया और सख्त कानून कब लाएगी? उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि मिलावटी खाने के कारण देश में कैंसर, किडनी फेलियर और हृदय रोगों के मामले युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं।
देशव्यापी चर्चा की शुरुआत
संसद में राघव चड्ढा के इस भाषण के बाद सोशल मीडिया पर #FoodAdulteration ट्रेंड करने लगा। आम जनता ने चड्ढा के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि फल-सब्जियों को पकाने के लिए जिस तरह ऑक्सीटोसिन और अन्य केमिकल्स का इस्तेमाल हो रहा है, उसने घरों की रसोई को असुरक्षित बना दिया है।
राघव चड्ढा का यह संबोधन केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की सेहत से जुड़ा एक गंभीर अलार्म है। अब देखना यह है कि संसद में दी गई इस चेतावनी के बाद सरकार खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर क्या ठोस कदम उठाती है।