नई दिल्ली: सेहत का ‘महा-मंत्र’: आपके पैरों में छिपा है लंबी उम्र का राज; जानें क्यों 60 के बाद भी ‘उल्टा चलना’ है वरदान
हड्डियाँ, मांसपेशियाँ और हृदय—सबका रिमोट कंट्रोल हैं आपके पैर। डॉ. नरेंद्र वानखड़े और विशेषज्ञों के संग्रह से जानिए शरीर के इस अद्भुत 'लोहे के त्रिभुज' का विज्ञान।

पैरों की मजबूती और लंबी उम्र के बीच के गहरे संबंध पर विशेष रिपोर्ट। जानें क्यों ‘उल्टा चलना’ घुटनों और दिमाग के लिए फायदेमंद है और क्यों पैर शरीर के ‘दूसरे हृदय’ कहलाते हैं।
नई दिल्ली/ ब्यूरो चीफ: सतबीर जांडली (The Asia Prime / TAP News) भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर महंगे जिम और डाइट प्लान के पीछे भागते हैं, लेकिन कुदरत ने हमारे शरीर के भीतर ही स्वास्थ्य का एक ऐसा ‘इंजीनियरिंग मास्टरपीस’ फिट किया है, जिसे हम ‘पैर’ कहते हैं। हालिया स्वास्थ्य शोध और विशेषज्ञों के संग्रह बताते हैं कि इंसान के पैरों की सक्रियता ही यह तय करती है कि वह कितनी लंबी और स्वस्थ जिंदगी जिएगा।
पैरों का विज्ञान: शरीर का असली स्तंभ
मानव शरीर का 50% भार, 50% हड्डियाँ और 50% मांसपेशियाँ केवल दोनों पैरों में समाहित होती हैं। इसे शरीर का ‘लोहे का त्रिभुज’ (Iron Triangle) कहा जाता है, जिसमें शरीर के सबसे मजबूत जोड़ और हड्डियाँ शामिल हैं।
- ऊर्जा का केंद्र: जीवन की 70% मानवीय गतिविधियाँ और ऊर्जा का उपयोग पैरों के माध्यम से ही होता है।
- दूसरा हृदय: पैर शरीर का सबसे बड़ा संचार तंत्र हैं। जब पैर चलते हैं, तो रक्त का प्रवाह सुचारू होता है, जिससे सीधे तौर पर हृदय को मजबूती मिलती है।
चेतावनी: 2 हफ़्ते की निष्क्रियता और 10 साल का नुकसान
डॉ. नरेंद्र वानखड़े के संग्रह के अनुसार, यदि आप केवल 2 सप्ताह तक अपने पैरों को हिलाना बंद कर दें या पूरी तरह निष्क्रिय हो जाएं, तो आपके पैरों की असली ताकत में 10 साल तक की गिरावट आ सकती है। बुढ़ापा हमेशा चेहरे की झुर्रियों से नहीं, बल्कि पैरों की कमजोरी से शुरू होकर ऊपर की ओर बढ़ता है।
‘बैकवर्ड वॉकिंग’ (उल्टा चलना): आधुनिक युग का नया उपचार
मिलिंद पंडित के कलेक्शन के अनुसार, सीधा चलने के साथ-साथ ‘उल्टा चलना’ सेहत के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
- मांसपेशियों का संतुलन: सीधा चलने से आगे की मांसपेशियां काम करती हैं, जबकि उल्टा चलने से पीछे की मांसपेशियां (Hamstrings) सक्रिय और मजबूत होती हैं।
- घुटनों का रक्षक: जिन लोगों को घुटनों में दर्द है, उनके लिए उल्टा चलना फायदेमंद है क्योंकि इससे जोड़ों पर दबाव कम पड़ता है।
- मानसिक एकाग्रता: उल्टा चलते समय मस्तिष्क को सामान्य से अधिक सजग रहना पड़ता है, जिससे शरीर का तालमेल (Coordination) बेहतर होता है और यह एक प्रकार के ‘चलते-फिरते मेडिटेशन’ का काम करता है।
- वजन और कमर दर्द: प्रतिदिन 15 मिनट उल्टा चलने से कमर दर्द में राहत मिलती है और कैलोरी तेजी से बर्न होती है।
विशेष नोट: ईश्वर की अद्भुत ‘बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग’
इंसानी शरीर दुनिया की सबसे एडवांस मशीन है। विचार कीजिए:
- अक्षय तलवे: वाहन के टायर घिस जाते हैं, लेकिन पैर के तलवे जीवनभर चलने के बाद भी घिसते नहीं।
- लीक-प्रूफ बॉडी: शरीर 75% पानी से बना है और लाखों रोमछिद्रों के बावजूद एक बूंद भी लीक नहीं होती।
- बिना बिजली का पंप: हमारा हृदय जन्म से मृत्यु तक बिना किसी बाहरी चार्जिंग या बिजली के धड़कता रहता है।
- मेगापिक्सल की सीमा से परे: हमारी आंखें दुनिया के सबसे महंगे कैमरों से भी अधिक गुणवत्ता में दृश्यों को कैद करती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि हर व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 30 से 40 मिनट टहलना चाहिए। पैरों को सक्रिय रखकर ही हम बुढ़ापे की गति को धीमा कर सकते हैं। हमारा हर सुबह जागना एक चमत्कार है, और इस अद्भुत शरीर को स्वस्थ रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।