विशेष रिपोर्ट: क्या ₹1 लाख के नीचे आएगा सोना? रूस-अमेरिका की संभावित ‘डॉलर डील’ बदल सकती है वैश्विक बाजार का समीकरण
"डॉलर की वापसी, सोने की विदाई? रूस और अमेरिका के बीच बढ़ती नजदीकी से गिर सकते हैं सोने के दाम; भारत सहित BRICS देशों की गोल्ड होर्डिंग पर लगेगा ब्रेक"

रूस और अमेरिका के बीच संभावित व्यापारिक समझौते से सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट के आसार। ₹1.76 लाख से गिरकर ₹1 लाख के नीचे आ सकता है सोना। जानें विशेषज्ञ क्या कहते हैं।
नई दिल्ली ब्यूरो चीफ: सतबीर जांडली (THE ASIA PRIME / TAP News) वैश्विक सराफा बाजार में पिछले कुछ महीनों से मची हलचल अब एक नए मोड़ पर खड़ी है। जहाँ एक समय सोने की कीमतें ₹1,76,000 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर को छू रही थीं, वहीं अब विशेषज्ञों का अनुमान है कि कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है और सोना ₹1,00,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे गिर सकता है। इस संभावित गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह रूस और अमेरिका के बीच पर्दे के पीछे चल रही एक बड़ी ‘इकनॉमिक डील’ मानी जा रही है।
रूस-अमेरिका डील: डॉलर की वापसी और सोने पर असर
अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, रूस जल्द ही अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने के लिए अमेरिकी डॉलर में व्यापार की वापसी कर सकता है।
- भरोसे की बहाली: यदि दुनिया के दो सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी (रूस और अमेरिका) डॉलर में व्यापार को फिर से हरी झंडी देते हैं, तो वैश्विक बाजारों में डॉलर के प्रति भरोसा बढ़ेगा।
- सोने की डिमांड में कमी: जब डॉलर मजबूत और स्थिर होता है, तो दुनिया भर के सेंट्रल बैंक सोने को ‘सुरक्षित निवेश’ के रूप में खरीदना कम कर देते हैं। मांग घटने से सीधे तौर पर कीमतों में गिरावट आती है।
- पत्रकारिता या केवल शोर? जूली ब्राउन और ‘एपस्टीन फाइल्स’ का वो सच, जिसने दुनिया के सबसे ताकतवर चेहरों को बेनकाब कर दिया
BRICS देशों का ‘गोल्ड रिजर्व’ गेम
पिछले कुछ वर्षों में डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए BRICS देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) ने भारी मात्रा में सोना खरीदा है:
- भारत का बढ़ता भंडार: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, 2005 में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी मात्र 4.3% थी, जो 2025 तक बढ़कर 15% के करीब पहुंच गई है।
- ब्राजील की सक्रियता: ब्राजील, जिसने पिछले चार वर्षों में कोई सोना नहीं खरीदा था, उसने अकेले 2025 में 16 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा।
- वैश्विक हिस्सेदारी: वर्तमान में दुनिया के कुल गोल्ड रिजर्व का करीब 20% हिस्सा अकेले BRICS देशों के पास है।
ट्रम्प फैक्टर और आर्थिक अस्थिरता
पिछले साल अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद, वैश्विक व्यापार में टैरिफ (Tarrif) की जंग शुरू हुई थी। इस अस्थिरता के कारण दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों ने डॉलर के विकल्प के रूप में सोने को प्राथमिकता दी, जिससे कीमतें ₹1.76 लाख तक चली गईं। लेकिन अब बदली हुई कूटनीति इस ट्रेंड को पलट सकती है।
विशेषज्ञों की राय: क्या होगा आगे?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस-अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध सामान्य होते हैं, तो सोने में ‘पैनिक बाइंग’ (घबराहट में खरीदारी) बंद हो जाएगी।
”सोने की ऊंची कीमतों का मुख्य आधार ‘डर’ और ‘अस्थिरता’ था। यदि बड़ी शक्तियां डॉलर पर सहमत होती हैं, तो सोने की कीमतों का गुब्बारा फूट सकता है, जिससे यह ₹1 लाख के नीचे आ सकता है।”
सोने की कीमतों में गिरावट आम आदमी के लिए राहत की खबर हो सकती है, लेकिन यह पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय समझौतों की सफलता पर निर्भर करेगा। यदि डॉलर का प्रभुत्व फिर से कायम होता है, तो ‘येलो मेटल’ (सोना) अपनी चमक खो सकता है।