फैक्ट चेक: बिल गेट्स की ‘मच्छर फैक्ट्री’ का खौफनाक दावा या जीवन रक्षक विज्ञान? जानें क्या है ‘वोल्बाचिया’ प्रोजेक्ट और एपस्टीन ईमेल का पूरा सच
"मौत के मच्छर या जीवन का वरदान? बिल गेट्स की 'मच्छर फैक्ट्री' पर वायरल दावों की पोल खुली; जानें कैसे एक छोटा सा बैक्टीरिया खत्म कर रहा है दुनिया से डेंगू"

बिल गेट्स की मच्छर फैक्ट्री पर वायरल दावों का फैक्ट चेक। जानें ‘वोल्बाचिया’ बैक्टीरिया का विज्ञान और क्यों छोड़े जा रहे हैं करोड़ों मच्छर। क्या है एपस्टीन ईमेल की सच्चाई?
ब्यूरो चीफ: सतबीर जांडली (The Asia Prime / TAP News) : इंटरनेट पर एक ऐसी थ्योरी वायरल हो रही है जो किसी डरावनी फिल्म जैसी लगती है। दावा किया जा रहा है कि कोलंबिया में बिल गेट्स की एक फैक्ट्री है जहाँ ‘जहरीले’ मच्छर तैयार कर गरीब देशों में लोगों को मारने के लिए छोड़े जाते हैं। साथ ही, इसे जेफ्री एपस्टीन के एक कथित ईमेल से भी जोड़ा जा रहा है। आइए जानते हैं इस दावे के पीछे की असली हकीकत क्या है।
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1. कोलंबिया में मच्छर फैक्ट्री: क्या यह सच है?
तथ्य: हाँ, कोलंबिया के मेडेलिन (Medellín) में एक बड़ी मच्छर लैब है, लेकिन इसका मकसद लोगों को मारना नहीं, बल्कि बचाना है। यह ‘वर्ल्ड मॉस्किटो प्रोग्राम’ (WMP) का हिस्सा है, जिसे ‘बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन’ फंड देता है।
- मच्छर ‘जहरीले’ नहीं ‘संक्रमित’ हैं: इन मच्छरों में ‘वोल्बाचिया’ (Wolbachia) नाम का एक प्राकृतिक बैक्टीरिया डाला जाता है।
- विज्ञान क्या कहता है? जब मच्छरों में यह बैक्टीरिया होता है, तो उनके शरीर के अंदर डेंगू, ज़िका, चिकनगुनिया और येलो फीवर के वायरस विकसित नहीं हो पाते।
- परिणाम: जब ये ‘वोल्बाचिया’ वाले मच्छर बाहर छोड़े जाते हैं, तो वे जंगली मच्छरों के साथ प्रजनन करते हैं और धीरे-धीरे पूरे इलाके के मच्छरों में यह बैक्टीरिया फैल जाता है। इससे उस क्षेत्र में डेंगू जैसी बीमारियों का फैलना लगभग 94% तक कम हो गया है।
2. जेफ्री एपस्टीन और 3 फरवरी 2011 का ईमेल
तथ्य: वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि एपस्टीन ने बिल गेट्स को ईमेल कर पूछा था कि “गरीब लोगों से कैसे छुटकारा पाया जाए”।
- सच्चाई: इस तरह के किसी भी सार्वजनिक या लीक हुए ईमेल का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। हालांकि, बिल गेट्स और जेफ्री एपस्टीन के बीच मुलाकातों की खबरें (2011 के बाद) सार्वजनिक हुई थीं, जिसे गेट्स ने अपनी “बड़ी गलती” माना है। लेकिन “गरीबों को खत्म करने” जैसी साजिश का कोई दस्तावेजी सबूत आज तक नहीं मिला है।
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3. क्या मच्छरों के जरिए ‘जहर’ फैलाया जा रहा है?
तथ्य: यह दावा वैज्ञानिक रूप से असंभव और अतार्किक है।
- मच्छर के डंक में जहर इंजेक्ट करके उसे बड़े पैमाने पर छोड़ना और उससे एक खास वर्ग (गरीबों) को निशाना बनाना संभव नहीं है।
- बीमारियों में वृद्धि का कारण: विशेषज्ञों के अनुसार, बीमारियों में हालिया वृद्धि का मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन (Climate Change), अनियंत्रित शहरीकरण और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस है, न कि कोई लैब-निर्मित मच्छर।
4. जनसंख्या नियंत्रण की थ्योरी का सच
बिल गेट्स अक्सर ‘वैक्सीन’ और ‘हेल्थकेयर’ के जरिए जनसंख्या वृद्धि दर को कम करने की बात करते हैं। उनके अनुसार, जब बच्चों की मृत्यु दर कम होती है (वैक्सीन की मदद से), तो माता-पिता कम बच्चे पैदा करते हैं, जिससे जनसंख्या स्थिर होती है। इसे अक्सर उनके विरोधी “लोगों को मारने की साजिश” के रूप में तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं।
कोलंबिया की फैक्ट्री में मच्छर मानवता को बचाने के लिए तैयार किए जा रहे हैं ताकि डेंगू और ज़िका जैसी जानलेवा बीमारियों को खत्म किया जा सके। इसे “गरीबों को मारने की साजिश” कहना पूरी तरह से निराधार और भ्रामक है। यह विज्ञान के प्रति अविश्वास पैदा करने वाला एक ‘कॉन्स्पिरेसी थ्योरी’ (Conspiracy Theory) है।