पलवल: छायंसा गांव बना ‘मातम का टापू’; 15 दिन में 5 बच्चों समेत 12 की मौत, दूषित पानी ने घोला ‘जहर’
"छायंसा में पसरा सन्नाटा: 12 मौतों के बाद जागा प्रशासन; 23 पानी के नमूने फेल होने से हड़कंप, 5 मासूमों के जाने का कौन है जिम्मेदार?"

पलवल के छायंसा गांव में दूषित पानी के सेवन से 15 दिनों में 12 लोगों की मौत। जांच में 23 पानी के नमूने फेल। स्वास्थ्य विभाग ने गांव में चलाया विशेष जांच अभियान।
पलवल/हरियाणा.ब्यूरो चीफ: सतबीर जांडली (The Asia Prime / TAP News) :हरियाणा के पलवल जिले का छायंसा गांव इस वक्त एक बड़े स्वास्थ्य संकट और गहरे शोक से गुजर रहा है। पिछले दो हफ्तों के भीतर गांव में 12 लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में जान चली गई है। मरने वालों में 5 स्कूली बच्चे भी शामिल हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी रोष और दहशत का माहौल है।
बीमारी के लक्षण और मौत का पैटर्न
ग्रामीणों के अनुसार, जिन लोगों की मृत्यु हुई उनमें लगभग एक जैसे लक्षण पाए गए थे:
- तेज बुखार और खांसी।
- बदन दर्द और लगातार उल्टी होना।
- शरीर में संक्रमण का तेजी से फैलना।
जांच में बड़ा खुलासा: ‘जहरीला’ साबित हो रहा है पानी
![]()
इंडिया टुडे की रिपोर्ट और स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं:
- नमूनों की विफलता: गांव के 107 घरों से पानी के नमूने लिए गए, जिनमें से 23 नमूने गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए।
- बैक्टीरिया और क्लोरीनेशन की कमी: फेल हुए नमूनों में हानिकारक बैक्टीरिया की अधिकता पाई गई है। साथ ही, पानी में क्लोरीनेशन (कीटाणुशोधन प्रक्रिया) की मात्रा पर्याप्त नहीं थी।
- सप्लाई का संकट: गांव की करीब 5,000 की आबादी नगर पालिका की सीमित आपूर्ति, पुराने भूमिगत टैंकों और निजी टैंकरों पर निर्भर है। दूषित पानी के कारण जलजनित बीमारियों (Waterborne Diseases) की आशंका अब हकीकत में बदलती दिख रही है।
- फतेहाबाद:भुना में आज से फाइनेंस दफ्तर और दुकान के बाहर ‘किसान यूनियन’ का घेरा, किसान के साथ ‘फाइनेंस’ के नाम पर बड़ा खेल! iPhone 16 चोरी हुआ तो क्लेम से मुकरी कंपनी;
स्वास्थ्य विभाग की ‘इमरजेंसी’ कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने गांव में डेरा डाल दिया है:
- 400 से अधिक ग्रामीणों की अब तक स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
- 300 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए हैं ताकि संक्रमण के असली कारण का पता लगाया जा सके।
- अब तक केवल दो नमूनों में हेपेटाइटिस बी या सी की पुष्टि हुई है, जो यह संकेत देता है कि मौत के पीछे का मुख्य कारण दूषित पानी से फैला कोई अन्य घातक बैक्टीरिया या वायरस हो सकता है।

ग्रामीणों का आक्रोश: प्रशासन की अनदेखी?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने समय रहते जलापूर्ति की सफाई और गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया। गांव के भूमिगत टैंकों की लंबे समय से सफाई नहीं हुई थी और सीवरेज का पानी पेयजल लाइनों में मिलने की आशंका जताई जा रही है।
एक तरफ हम ‘स्मार्ट सिटी’ और ‘नल से जल’ की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पलवल के एक गांव में महज दूषित पानी पीने से 12 जिंदगियां खत्म हो जाती हैं। यह प्रशासन की घोर लापरवाही है। 5 मासूम बच्चों की मौत केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की विफलता है।