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डॉलर की चकाचौंध या मौत का कुआं? अमेरिका में ‘डंकी रूट’ से घुसते रोज पकड़े जा रहे 65 भारतीय; तुर्किये-दुबई बना नया ‘हॉटस्पॉट’

कंकालों से भरे जंगल और -40 डिग्री की बर्फ: अमेरिकी सपने के पीछे भारतीयों का खूनी संघर्ष; एक साल में 23 हजार गिरफ्तार, डिपोर्टेशन ने तोड़ा 16 साल का रिकॉर्ड

अमेरिका में अवैध एंट्री का ‘डंकी रूट’ बना मौत का रास्ता। 2025 में 23,830 भारतीय गिरफ्तार। तुर्किये-दुबई रूट का बढ़ा इस्तेमाल। पनामा के जंगलों में मिले दर्जनों कंकाल। पूरी रिपोर्ट।

वॉशिंगटन/नई दिल्ली (The Asia Prime): अमेरिका में अवैध रूप से प्रवेश करने की होड़ में भारतीय अपनी जान और जमा-पूंजी दोनों दांव पर लगा रहे हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में हर दिन औसतन 65 भारतीय अमेरिकी सीमा पर गिरफ्तार किए गए। जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच कुल 23,830 भारतीयों को अवैध रूप से घुसपैठ करते हुए पकड़ा गया है।

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ट्रेंड में बदलाव: अब अकेले आ रहे हैं ‘डंकी’

​अमेरिकी बॉर्डर एंड कस्टम विभाग की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस साल पकड़े गए लगभग सभी भारतीय ‘सिंगल एंटिटी’ (अकेले) थे। 2024 के उलट, जहाँ करीब 20 हजार लोग परिवार, बच्चों और पत्नी के साथ पकड़े गए थे, इस बार केवल अकेले युवाओं का ट्रेंड बढ़ा है।

​साथ ही, अब कनाडा और मैक्सिको बॉर्डर के बजाय तुर्किये-दुबई रूट का इस्तेमाल बढ़ गया है। इसमें फ्लाइट के जरिए अमेरिका में वेकेशन वीजा पर एंट्री ली जाती है और फिर वहीं रुककर स्टे अवधि (Visa Overstay) को जम्प कर दिया जाता है।

डिपोर्टेशन में 16 साल का रिकॉर्ड टूटा

​2025 के दौरान अमेरिका ने कुल 3254 भारतीयों को डिपोर्ट (वापस भारत भेजना) किया है। यह संख्या साल 2009 के बाद सबसे ज्यादा है, जो दर्शाता है कि अमेरिकी प्रशासन अब अवैध प्रवासियों को लेकर बेहद सख्त हो गया है।

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मौत को दावत देते ‘डंकी’ के तीन जानलेवा रास्ते

1. कनाडा का ‘फ्रोजन’ नरक (-40 डिग्री सर्दी):

डंकी पहले टूरिस्ट वीजा पर कनाडा पहुँचते हैं। वहां से एजेंट उन्हें मनितोबा प्रांत ले जाते हैं। -40 डिग्री की हाड़ कंपा देने वाली सर्दी में, जहाँ पलकों पर आंसू जम जाते हैं, डंकी घुटनों तक बर्फ में पैदल चलकर अमेरिका सीमा पार करते हैं।

2. पनामा के ‘मौत के जंगल’:

साउथ अमेरिका के रास्ते आने वाले डंकी पनामा के घने जंगलों को पार करते हैं। एक प्रवासी हरजिंदर सिंह ने बताया कि 10 दिनों के पैदल सफर में उन्हें रास्ते में 40 से ज्यादा इंसानी कंकाल मिले, जो भूख या बीमारी से मर चुके थे।

3. कोलंबिया की खतरनाक नदियाँ:

जंगलों से बचने के लिए कई डंकी कोलंबिया की 150 किमी लंबी नदी को नाव से पार करते हैं। यहाँ न केवल बॉर्डर पुलिस का डर है, बल्कि नदी के खतरनाक जानवर भी जान लेने के लिए तैयार रहते हैं। इसके बाद ग्वाटेमाला पहुँचकर उन्हें दूसरे एजेंटों के हवाले कर दिया जाता है।

क्यों जान दांव पर लगा रहे हैं भारतीय?

​एजेंट युवाओं को अमीर बनने का झूठा सपना दिखाते हैं। अमेरिका में घुसने के बाद ये लोग खुद को पुलिस के हवाले कर देते हैं। वकील के जरिए ‘इमिग्रेशन कैंप’ से बाहर आते हैं और फिर वहां काम करने की अनुमति मिल जाती है। 8-10 साल बाद ग्रीन कार्ड और फिर नागरिकता पाने की उम्मीद में ये लोग अपनी जिंदगी के सबसे कीमती साल अदालतों और डर के साये में गुजार देते हैं।

THE ASIA PRIME की अपील: अवैध रास्तों से विदेश जाने का फैसला जानलेवा हो सकता है। ठग एजेंटों के झांसे में न आएं और हमेशा कानूनी रास्तों का ही चयन करें।

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