SYL पर बड़ी हलचल: चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सैनी और भगवंत मान की ‘सार्थक’ बैठक; बोले— “पंजाब-हरियाणा भाई-भाई, राजनीति से ऊपर उठकर निकालेंगे हल”
दशकों पुराने विवाद पर जमी बर्फ पिघली? चंडीगढ़ में मान और सैनी ने की दिल खोलकर बात; सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई बैठक से बढ़ी समाधान की उम्मीद"

SYL विवाद को लेकर चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों की अहम बैठक। भगवंत मान और नायब सैनी ने सकारात्मक माहौल में रखा अपना पक्ष। क्या खत्म होगा पानी का झगड़ा?
चंडीगढ़ ब्यूरो:Satbir Jandli (THE ASIA PRIME / TAP News): दशकों से चले आ रहे सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद को सुलझाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच चंडीगढ़ में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई।
बैठक के बाद दोनों मुख्यमंत्रियों के सुर काफी सकारात्मक नजर आए, जिससे उम्मीद जगी है कि इस पेचीदा मसले का कोई बीच का रास्ता निकल सकता है।
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सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई चर्चा
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, “बैठक बहुत ही अच्छे और सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई है। हमने पंजाब का पक्ष पूरी मजबूती के साथ रखा है। हमारा मानना है कि पंजाब और हरियाणा बड़े और छोटे भाई की तरह हैं। हम राजनीति से ऊपर उठकर इस मसले का सार्थक समाधान चाहते हैं।”
वहीँ, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी बैठक को सकारात्मक बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही इस वार्ता से दोनों राज्यों के किसानों के हितों की रक्षा होगी।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख और बैठक का एजेंडा
यह बैठक सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद हुई है जिसमें कोर्ट ने दोनों राज्यों को केंद्र के साथ मिलकर आपसी सहमति बनाने को कहा था। बैठक में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर चर्चा हुई:
- पानी की उपलब्धता: पंजाब का कहना है कि उनके पास किसी अन्य राज्य को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है और भूजल स्तर लगातार गिर रहा है।
- हरियाणा का हक: हरियाणा का तर्क है कि SYL नहर का निर्माण उसका संवैधानिक हक है और दक्षिण हरियाणा के प्यासे खेतों तक पानी पहुँचाना जरूरी है।
- नहर का निर्माण: नहर के अधूरे हिस्से के निर्माण को लेकर तकनीकी और राजनीतिक पहलुओं पर मंथन किया गया।

“भाई-भाई” वाली केमिस्ट्री का क्या होगा असर?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों मुख्यमंत्रियों द्वारा एक-दूसरे को ‘भाई’ कहना और राजनीति से ऊपर उठने की बात करना एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, SYL एक ऐसा भावनात्मक मुद्दा है जो दोनों राज्यों की क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित करता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ‘सार्थक बैठक’ वास्तव में जमीन पर किसी समझौते में बदल पाती है या नहीं।
अगला कदम क्या होगा?
इस बैठक की विस्तृत रिपोर्ट अब केंद्र सरकार के माध्यम से माननीय सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी। कोर्ट की अगली सुनवाई में इस बातचीत के नतीजों के आधार पर भविष्य की रूपरेखा तय होगी।