हरियाणा बिजली टैरिफ विवाद: 3000 करोड़ के बोझ की तैयारी, पूर्व मंत्री संपत सिंह ने आयोग के सामने खोली ‘डिस्कॉम’ की पोल

हरियाणा बिजली टैरिफ में 3000 करोड़ की वृद्धि के प्रस्ताव पर विवाद। पूर्व मंत्री संपत सिंह ने डिस्कॉम पर रिपोर्ट छिपाने और घाटा बढ़ाने के लगाए गंभीर आरोप। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
चंडीगढ़ (The Asia Prime): हरियाणा के बिजली उपभोक्ताओं पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ने की आशंका है। उत्तर हरियाणा (UHBVNL) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVNL) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए करीब 3000 करोड़ रुपए के टैरिफ इजाफे का प्रस्ताव दिया है। पूर्व विद्युत मंत्री प्रोफेसर संपत सिंह ने इस प्रक्रिया को नियमों के विरुद्ध बताते हुए आयोग को कड़ा पत्र लिखा है।
प्रमुख आपत्तियां: डेटा छिपाने का आरोप
प्रो. संपत सिंह ने आरोप लगाया कि डिस्कॉम ने ‘वोल्टेज व उपभोक्ता वर्गवार सर्विस कास्ट’ (Cost of Service) की रिपोर्ट आयोग के निर्देशों के बावजूद दाखिल नहीं की।
- बिना सुनवाई के मंजूरी: उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी बिना किसी विधिवत याचिका या जनसुनवाई के भारी टैरिफ बढ़ा दिया गया, जो उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है।
- घाटे का भ्रामक आंकड़ा: कंपनियों ने 4484 करोड़ रुपए के संयुक्त राजस्व घाटे का अनुमान लगाया है, लेकिन इसे पूरा करने का कोई ठोस रोडमैप नहीं दिया।
- हरियाणा में BPL कार्ड धारकों पर बड़ी कार्रवाई: अब रजिस्ट्री, बैंक लोन और बच्चों की स्कूल फीस से खुलेगी पोल; तुरंत कटेगा नाम
पूंजीगत व्यय पर सवाल
डिस्कॉम ने हजारों करोड़ के पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) का प्रस्ताव रखा है (DHBVN – 2738 करोड़, UHBVN – 2056 करोड़)। संपत सिंह के अनुसार, “बिना लागत-लाभ विश्लेषण के इतना भारी खर्च अर्थहीन है। इसका प्रभाव आपूर्ति की गुणवत्ता पर क्या पड़ेगा, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है।”
प्रस्तावित नई दरें: आपकी जेब पर कितना असर?
उपभोक्ता वर्ग (यूनिट) | पुरानी दर (रु./यूनिट) | प्रस्तावित नई दर (रु./यूनिट) |
|---|---|---|
घरेलू: 150 यूनिट तक | 2.75 | 2.95 |
घरेलू: 251-500 यूनिट | 6.30 | 6.45 |
कमर्शियल: 0-50 यूनिट | 2.00 | 2.20 |
कमर्शियल: 51-100 यूनिट | 2.50 |
नोट: 300 से 500 यूनिट पर प्रति किलोवाट 50 रुपये और 500 यूनिट से ऊपर भी 50 रुपये का अतिरिक्त ‘फिक्स चार्ज’ लगाने का प्रस्ताव है।
सप्लाई लॉस का ‘अजीब’ गणित
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के लिए वितरण हानियां (Line Loss) 9.54% निर्धारित थीं। लेकिन हैरानी की बात है कि आगामी वर्ष (2026-27) के लिए इस लक्ष्य को कम करने के बजाय बढ़ाकर 9.75% कर दिया गया है। पूर्व मंत्री ने कहा कि भारी निवेश के बावजूद इतनी हानि कंपनियों की ‘परिचालन अक्षमता’ को दर्शाती है। आदर्श स्थिति में यह घाटा 6 से 8 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
9 जनवरी की सुनवाई पर टिकी नजरें
9 जनवरी को होने वाली एचईआरसी (HERC) की सुनवाई में आयोग यह तय करेगा कि क्या डिस्कॉम की इन दलीलों को स्वीकार किया जाए या उपभोक्ताओं को राहत दी जाए। संपत सिंह ने मांग की है कि कंपनियों की ‘सुस्त वसूली’ और बढ़ते ब्याज के बोझ का भुगतान आम जनता से न करवाया जाए।