भारत-EU ट्रेड डील: डोनाल्ड ट्रंप को लगेगा बड़ा झटका! भारत आज करेगा ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’, जानें क्यों पछताएगा अमेरिका
यूरोप के साथ भारत का 'मेगा गेम-प्लान': 18 दौर की चर्चा के बाद FTA पर लगी मुहर; अमेरिकी टैरिफ युद्ध के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत"

भारत और EU के बीच आज होने जा रही है दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेड डील। टेक्सटाइल, लेदर और जूलरी एक्सपोर्ट को मिलेगा बढ़ावा। डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों को भारत का करारा जवाब।
नई दिल्ली : Satbir Jandli (The Asia Prime /Tap News): आज 27 जनवरी 2026 का दिन भारत के आर्थिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। चार साल के लंबे इंतजार और 18 दौर की गहन बातचीत के बाद, भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर सहमति बन गई है। इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है क्योंकि यह चीन और आसियान के बीच हुए समझौतों से भी कहीं अधिक प्रभावशाली होने वाला है।
डोनाल्ड ट्रंप के लिए क्यों है यह ‘बैट न्यूज़’?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और टैरिफ युद्ध के बीच, भारत ने यूरोप के साथ हाथ मिलाकर यह साफ कर दिया है कि वह अपनी व्यापारिक जरूरतों के लिए सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं रहेगा।
- विकल्प की तलाश: इस डील के बाद भारतीय व्यापारियों के लिए यूरोप के 27 देशों का बाजार पूरी तरह खुल जाएगा।
- अमेरिकी निर्भरता कम: ट्रंप अक्सर भारतीय उत्पादों पर भारी टैक्स लगाने की धमकी देते रहे हैं, लेकिन अब भारत के पास यूरोप के रूप में एक मजबूत और बड़ा साझेदार मौजूद है।
भारत को क्या होगा फायदा?
भारत के लिए यह समझौता एक्सपोर्ट के मोर्चे पर नई जान फूंकने वाला साबित होगा। कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल के मुताबिक, डील फाइनल हो चुकी है और इसके लागू होने से इन सेक्टरों को सीधा लाभ मिलेगा:
- टेक्सटाइल्स और गारमेंट्स: यूरोपीय बाजार में भारतीय कपड़ों की मांग बढ़ेगी।
- लेदर और फुटवियर: वर्तमान में लगने वाले 17% तक के भारी टैरिफ से राहत मिलेगी।
- जेम्स एंड जूलरी: भारतीय आभूषणों के लिए नया बाजार खुलेगा।
- समुद्री उत्पाद: सी-फूड पर लगने वाला 26% का टैरिफ हटने से निर्यातकों की चांदी होगी।
- मैक्सिको में कत्लेआम: फुटबॉल के मैदान पर ‘गोलियों की बारिश’, अंधाधुंध फायरिंग में 11 खिलाड़ियों और दर्शकों की मौत; दहल उठा देश
यूरोपीय संघ की क्या हैं शर्तें?
यूरोपियन यूनियन लंबे समय से भारत में अपनी लग्जरी कारों और वाइन पर टैक्स कम करने की मांग कर रहा था।
- कारों पर छूट: भारत अपनी गाड़ियों पर करीब 35.5% टैरिफ लगाता है, जिसमें अब कटौती की संभावना है।
- संवेदनशील सेक्टर: भारत ने अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को बचाने के लिए कड़ा रुख अपनाया है, जिसे EU ने स्वीकार किया है।
- पर्यावरण नियम: EU के कड़े कार्बन नियमों (CBAM) पर बातचीत अभी भी जारी है, लेकिन दोनों पक्षों ने बीच का रास्ता निकालने पर सहमति जताई है।
- चीन में तख्तापलट की नाकाम कोशिश! होटल में भीषण मुठभेड़, शी जिनपिंग के 9 गार्ड्स की मौत; जनरल झांग यूश्या गिरफ्तार: बड़ा खुलासा
दुनिया का सबसे बड़ा बाजार
इस समझौते के दायरे में दुनिया की 1.9 अरब आबादी आएगी। 2024-25 में भारत और EU का व्यापार 136.53 बिलियन डॉलर था, जिसमें भारत का पलड़ा भारी था (75.85 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट)। इस डील के बाद यह आंकड़ा दोगुना होने की उम्मीद है।
भारत-EU FTA केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि एक रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक है। यह भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का एक प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। अब देखना यह होगा कि वॉशिंगटन में बैठे डोनाल्ड ट्रंप भारत की इस नई चाल पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।