जुनून या पागलपन? MBBS की एक सीट के लिए NEET छात्र ने खुद काटी अपनी टांग; जौनपुर के सूरज भास्कर की रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तां
"कोटे की खातिर खुद को बनाया अपंग: जौनपुर के NEET छात्र ने रची खुद पर हमले की झूठी कहानी; एनेस्थीसिया देकर काटा अपना पैर, अब सलाखों के पीछे जाने की तैयारी"

NEET परीक्षा के दबाव में जौनपुर के सूरज भास्कर ने PwD कोटे के लिए अपना पैर काट दिया। पुलिस जांच में खुली पोल, अब अस्पताल और जेल के बीच फंसा भविष्य। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
जौनपुर (उत्तर प्रदेश): (THE ASIA PRIME / TAP News) डॉक्टर बनकर दूसरों का इलाज करने का सपना जब सनक में बदल जाए, तो इंसान किस हद तक गिर सकता है, इसका एक दहला देने वाला उदाहरण उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में देखने को मिला है। यहाँ एक NEET अभ्यर्थी (NEET Aspirant) सूरज भास्कर ने PwD (दिव्यांग) कोटे के तहत MBBS की सीट पाने के लिए अपनी ही टांग का एक हिस्सा काट दिया। इस आत्मघाती कदम ने न केवल पुलिस को हैरान कर दिया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
हमले की झूठी कहानी और पुलिस का शक
घटना की शुरुआत तब हुई जब सूरज भास्कर लहूलुहान हालत में पाया गया। उसने पुलिस को दी शुरुआती शिकायत में बताया कि वह रास्ते से जा रहा था और कुछ अज्ञात बदमाशों ने उस पर धारदार हथियारों से हमला किया और उसकी टांग काट दी। मामला गंभीर था, इसलिए पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। लेकिन पुलिस को घटनास्थल पर हमले के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले। न तो वहां संघर्ष के निशान थे और न ही किसी चश्मदीद ने ऐसी कोई घटना देखी थी।
कॉल रिकॉर्ड और प्रेमिका की गवाही ने खोला राज
जौनपुर पुलिस ने जब गहराई से तफ्तीश की, तो सूरज की पूरी कहानी ताश के पत्तों की तरह ढह गई। पुलिस ने सूरज के मोबाइल के कॉल रिकॉर्ड और उसकी प्रेमिका (Girlfriend) से पूछताछ की। प्रेमिका ने पुलिस के सामने यह स्वीकार किया कि सूरज पिछले कई दिनों से बहुत तनाव में था। वह अक्सर कहता था कि सामान्य कोटे (General Category) में उसका चयन होना नामुमकिन लग रहा है, इसलिए वह दिव्यांग कोटे का लाभ लेने के लिए कुछ भी कर सकता है।
सर्जिकल औजार और एनेस्थीसिया: सब कुछ था ‘प्लान्ड’
पुलिस की फोरेंसिक टीम को जांच के दौरान सूरज के पास से एनेस्थीसिया की खाली सिरिंज और कुछ सर्जिकल औजार बरामद हुए। जांच में यह बात साफ हो गई कि सूरज ने खुद को दर्द से बचाने के लिए पहले एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लिया और फिर एक सोची-समझी साजिश के तहत अपने पैर के हिस्से को काट डाला। उसका मकसद खुद को 40% से अधिक दिव्यांग साबित करना था, ताकि वह चिकित्सा शिक्षा (MBBS) में आरक्षित सीट हासिल कर सके।
डॉक्टर बनने की चाहत और उम्र भर की अपंगता
सूरज भास्कर का डॉक्टर बनने का सपना इतना गहरा था कि उसने इसके लिए अपनी बलि देने में भी संकोच नहीं किया। हालांकि, अब वह अस्पताल में भर्ती है और डॉक्टरों का कहना है कि टांग का वह हिस्सा वापस जोड़ा जाना लगभग नामुमकिन है। जिस पेशे में वह दूसरों के अंगों की रक्षा करना सीखना चाहता था, उसी पेशे के लालच में उसने अपना ही अंग खो दिया।
कानूनी कार्रवाई और सामाजिक चिंता
पुलिस ने अब सूरज के खिलाफ झूठी सूचना देने और साजिश रचने के मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। एसपी जौनपुर ने बताया कि युवक ने कानून को गुमराह करने की कोशिश की और खुद को चोट पहुंचाकर एक गंभीर अपराध किया है। इस घटना ने कोचिंग सेंटरों और प्रतियोगी परीक्षाओं के उस “प्रेशर कुकर” जैसे माहौल की पोल खोल दी है, जहाँ छात्र अपनी जान और अंग तक दांव पर लगा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल अपराध का नहीं, बल्कि गंभीर मानसिक बीमारी और ‘करियर फोबिया’ का भी है। एक छात्र का यह सोचना कि “डॉक्टर नहीं बना तो जिंदगी खत्म है”, समाज के लिए एक चेतावनी है। सूरज भास्कर अब शायद कभी डॉक्टर न बन पाए, लेकिन वह उन लाखों छात्रों के लिए एक कड़वा सबक जरूर बन गया है जो सफलता के लिए शॉर्टकट और आत्मघाती रास्ते चुनते हैं।
By Satbir Jandli (THE ASIA PRIME / TAP News ) Sunday, 24 January 2026 (IST) 4:10 PM