ऐतिहासिक: 18 साल का लंबा इंतज़ार खत्म! भारत और EU के बीच ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर लगी मुहर; BMW से लेकर चॉकलेट तक सब होगा सस्ता
"विश्व व्यापार में भारत की ऐतिहासिक छलांग: ₹110% की ड्यूटी वाली विदेशी कारें अब 10% पर; भारत-EU की 'मदर ऑफ ऑल डील्स' ने बदली वैश्विक अर्थव्यवस्था की तस्वीर"

भारत और EU के बीच ऐतिहासिक FTA संपन्न। 18 साल का संघर्ष लाया रंग। ऑटोमोबाइल, वाइन और चॉकलेट होंगे सस्ते, भारतीय एक्सपोर्ट को लगेंगे पंख। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
नई दिल्ली (The Asia Prime): मंगलवार, 27 जनवरी 2026
आज का दिन भारत और यूरोपीय संघ (EU) के संबंधों में एक नए युग की शुरुआत के रूप में दर्ज हो गया है। लगभग 18 साल की लंबी प्रतीक्षा और कई दौर की जटिल वार्ताओं के बाद, भारत और यूरोपीय संघ ने दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने आज नई दिल्ली में इस ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ का आधिकारिक ऐलान किया।
90% उत्पादों पर ड्यूटी खत्म: आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?
इस समझौते के तहत दोनों पक्ष एक-दूसरे के 90% से अधिक उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क (Import Duty) को या तो पूरी तरह खत्म कर देंगे या उनमें भारी कटौती करेंगे।
टैरिफ में बड़े बदलाव की तालिका:
सेक्टर | वर्तमान ड्यूटी | नई ड्यूटी (FTA के बाद) |
|---|---|---|
यूरोपीय कारें (BMW, Mercedes आदि) | 110% | 10% (2.5 लाख कारों के कोटा तक) |
वाइन्स (Wines) | 150% | 75% (धीरे-धीरे 20% तक आएगी) |
बीयर (Beer) | 110% | 50% |
प्रोसेस्ड फूड (चॉकलेट, बिस्किट) | 50% | 0% |
दवाइयां (Pharmaceuticals) | 11% | 0% |
भारत के लिए मास्टरस्ट्रोक: 33 अरब डॉलर के निर्यात की उम्मीद
यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। भारत के टेक्सटाइल, चमड़ा, समुद्री उत्पाद और रत्न एवं आभूषण क्षेत्रों को यूरोपीय बाजार में ‘ड्यूटी-फ्री’ एंट्री मिलेगी। इससे न केवल निर्यात में 33 अरब डॉलर की बढ़ोतरी की उम्मीद है, बल्कि देश के श्रम-प्रधान क्षेत्रों (Labor Intensive Sectors) में लाखों नए रोजगार भी पैदा होंगे।
छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी खुशखबरी
समझौते में व्यापार के साथ-साथ ‘पीपल टू पीपल’ कनेक्टिविटी पर भी जोर दिया गया है। यूरोपीय संघ ने भारतीय छात्रों और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए ‘अनकैप्ड मोबिलिटी’ का वादा किया है। इसका मतलब है कि अब भारतीय युवाओं के लिए यूरोप में पढ़ाई करना और वहां काम के सिलसिले में आना-जाना काफी आसान हो जाएगा।
किसानों के हितों की रक्षा: डेयरी और कृषि सेक्टर सुरक्षित
भारत ने बहुत ही समझदारी के साथ अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को इस समझौते से सुरक्षित दूरी पर रखा है। डेयरी, अनाज, और मुर्गी पालन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को FTA के दायरे से बाहर रखा गया है, ताकि देश के करोड़ों छोटे किसानों के हितों पर कोई आंच न आए।
कब से प्रभावी होगी यह डील?
आज की घोषणा के बाद अब ‘लीगल स्क्रबिंग’ (कानूनी जांच) की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें करीब 5-6 महीने लगेंगे। उम्मीद है कि साल के अंत तक औपचारिक हस्ताक्षर हो जाएंगे और 2027 की शुरुआत से यह ऐतिहासिक समझौता जमीन पर लागू हो जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश: > “यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ के 2 अरब लोगों के लिए सुनहरे अवसर लेकर आया है। यह वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को गति देगा।”