सीएम सैनी ने सोनीपत रैली स्थल की तैयारी का जायजा बीच में छोडा, पीएम मोदी का दौरा रद्द: Y. पूरन कुमार मामले की राजनीति गरमी

हरियाणा में IPS अधिकारी Y. पूरन कुमार की आत्महत्या के बाद तनाव बढ़ गया है। उनकी पोस्टमार्टम तक इजाजत न मिलने के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 17 अक्टूबर की सोनीपत रैली रद्द कर दी गई। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी उसी समय सोनीपत में तैयारी समीक्षा कर रहे थे, लेकिन संदेश मिलने पर उन्होंने दिल्ली जाने की बजाय चंडीगढ़ लौटने का फैसला किया। राज्य सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है और DGP को अवकाश पर भेजा गया है।
Delhi ब्यूरो: TAP News
चंडीगढ़ / सोनीपत: हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या के बाद लगातार बढ़ता विवाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित रैली को प्रभावित कर गया है। 17 अक्टूबर को सोनीपत के राई में होनी वाली जन विश्वास-जन विकास रैली अब रद्द कर दी गई है।
रैली स्थल पर तैयारियों की समीक्षा कर रहे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सूचना मिली कि पीएम का दौरा अब संभव नहीं है। इसके बाद उन्होंने दिल्ली जाने की योजना रद्द कर दी और वापस चंडीगढ़ लौट आए।
यह निर्णय उस समय आया जब Y. पूरन कुमार के शव का पोस्टमार्टम आज तक नहीं हो सका — परिवार ने मर्यादित शर्तों पर इसे होने की अनुमति दी है।
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि यह रद्दीकरण यातायात और संवेदनशीलता के कारण किया गया है। भाजपा की योजना थी कि इस रैली के जरिए सरकार के पहले वर्ष को जनता के सामने पेश किया जाए। परंतु अधिकारी और पार्टी संगठन पहले ही विवादों के दबाव में थे।
इस बीच, हरियाणा सरकार ने DGP शत्रुजीत कपूर को अवकाश (leave) पर भेज दिया है, और Rohtak SP नरेंद्र बिजारणिया को भी बदल दिया गया है। ये दोनों नाम उसी ‘फ़ाइनल नोट’ में थे जिसे पूरन कुमार ने आत्महत्या से पहले कहा था।
आयोग ने यह भी कहा है कि जब तक इन दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी, परिवार पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की सहमति नहीं देगा। इस मामला दलित अधिकारों, प्रशासनिक जवाबदेही और न्याय प्रक्रिया की सच्चाई पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
हरियाणा हिसार के दो युवक रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे: परिवार ने भारतीय दूतावास से मदद की अपील की
विपक्ष नेताओं ने इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बना लिया है। राहुल गांधी ने परिवार से मिलकर समर्थन जताया है। अन्य कई नेता दलित समुदाय एवं न्याय की मांग कर रहे हैं।
यह निर्णय कि रैली स्थगित की जाए, भाजपा और राज्य सरकार की विश्वसनीयता पर गंभीर असर डाल सकता है— जनता अपेक्षा करती है कि आरोपितों पर शीघ्र कार्रवाई हो और निष्पक्ष जांच हो।