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हरियाणा: Hisar कोर्ट ने प्राइवेट बसों को महिलाओं-छात्राओं के सरकारी पास मानने का दिया आदेश

Hisar कोर्ट ने सरकारी बस पास होल्डर और ग्रामीण छात्र छात्राओं के मुफ्त सफ़र के सरकारी पास को प्राइवेट बस ऑपरेटरों द्वारा मान्य करने का आदेश दिया है। छह छात्राओं की याचिका पर निचली अदालत ने प्राइवेट बसों को कानूनी सर्कुलर का पालन करने और वैध बस पास नहीं ठुकराने का निर्देश दिया। जानिए कोर्ट की गवाही, नामज़द ऑपरेटर और क्या कहा सरकार ने इस मामले में।

हिसार ब्यूरो: THE ASIA PRIME / TAP News

Hisar, हरियाणा। ग्रामीण और कॉलेज-छात्राओं के लिए राहत भरा फैसला हुआ है। Hisar की जूनियर सिविल जज (सिविल डिवीजन) Sukhvir Kaur ने आदेश दिया है कि प्राइवेट बस ऑपरेटरों को वैध सरकारी फ्री ट्रैवल पास रखने वाली छात्र छात्राओं को यात्रा से न रोका जाए और उनका उत्पीड़न समाप्त हो। यह आदेश उन छह महिला छात्राओं की याचिका पर आया है, जिन्होंने आरोप लगाया कि उनके पास होने के बावजूद, प्राइवेट बसों में उन्हें मुफ्त यात्रा से वंचित किया।

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छात्राओ द्वारा कोर्ट में याचिका और RTO को शिकायतें

याचिका दायर की गई थी 5 सितंबर को, जिसमें शामिल थीं:

पूजा बिश्नोई (LLB फाइनल ईयर, CR Law College),

मनीषा व सपना (Government College, Hisar),

किरण रानी (Government Women’s College),

मोनिका (Government Technical College),

अनीता (Guru Jambheshwar University)।

ये छात्राएँ गाँवों से आती हैं — सारंगपुर, भाना, चिन्दड (फतेहाबाद), खराखेरी आदि। उनका आरोप था कि एक व्यक्ति (Darshan, आदमपुर का) प्राइवेट बस ऑपरेटरों की ओर से, बिना अधिकार के बस कर्मियों को कहता है कि वो उनके फ्री पास स्वीकार न करें।

सरकारी सर्कुलर और अदालत का आदेश

Regional Transport Authority (RTA) ने 25 अगस्त को एक सर्कुलर जारी किया था जिसमें कहा गया कि प्राइवेट बस ऑपरेटर वैध सरकारी यात्रियों के पास स्वीकार करें।

अदालत ने यह पाया कि इस सर्कुलर का कोई स्थगन (stay) नहीं है, इसलिए प्राइवेट बसों द्वारा इस निर्देश की अवहेलना गैरकानूनी है।

न्यायमूर्ति Sukhvir Kaur ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि ऑपरेटर तुरंत सर्कुलर का पालन करें और बस पास होल्डर व छात्र -छात्राओं को मुफ्त यात्रा देने से मना करना बंद करें।

अदालत ने प्राइवेट बस ऑपरेटरों से 9 अक्टूबर तक जवाब दाख़िल करने को कहा है।

कोर्ट ने किस किस को पार्टी बनाई व किन-किन का नाम है

याचिका में निम्न नाम शामिल हैं:

राज्य सरकार

Transport Commissioner

District Traffic Officer

Manager, Roadways

प्राइवेट बस ऑपरेटर: Deepak (Balaji Motors), Narendra (Nagpal Bus Service), और Ravindra (Ravindra Bus Service)

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छात्र व छात्राओं को कोर्ट के फैसले से राहत ।

छात्राओं ने कोर्ट से मांगा था कि उनकी यात्रा बाधित ना हो, खासकर कॉलेज आने-जाने के मौकों पर। कोर्ट ने यह माना कि शिक्षा-भेदभाव और सुविधा में असमानता छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन है।

यदि प्राइवेट बस ऑपरेटर इस आदेश का पालन नहीं करेंगे, तो उनका परमिट (परमिट इजाज़त) रद्द किया जा सकता है।

बस ऑपरेटरों की आगे की स्थिति क्या रहेगी।

9 अक्टूबर तक बस ऑपरेटरों को अपनी स्थिति अदालत के सामने प्रस्तुत करनी होगी।

परिवहन विभाग और RTA को भी इस आदेश की अनुपालन रिपोर्ट देने की संभावना है।

यदि आदेश का पालन नहीं हुआ, तो बस ऑपरेटरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है, जिसमे परमिट रद्द करना एक विकल्प है।

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